वृद्धावस्‍था में सिगरेट छोड़ना भी होता है फायदेमंद

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 21, 2013

quitting smoking good for healthयह तो हम जानते हैं कि धूम्रपान सेहत के लिए कितना खतरनाक होता है औ इसे छोड़ना काफी लाभप्रद होता है। लेकिन, एक ताजा शोध धूम्रपान छोड़ने के फायदों के बारे में और व्‍यापक तस्‍वीर पेश करता है। इस शोध में बताया गया है कि धूम्रपान किसी भी उम्र में छोड़ा जाए उसके बहुत फायदे होते हैं। इस शोध के अनुसार वे लोग जो वृद्धावस्‍था में भी धूम्रपान छोड़ देते हैं, उन्‍हें भी इसके काफी फायदे होते हैं।


वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ऐसे लोग जिनकी उम्र अधिक हो चुकी है वे अगर धूम्रपान छोड़ देते हैं, तो भी वे हृदय रोग के संभावित खतरे को कम कर सकते हैं और अपनी सेहत में सुधार को महसूस कर सकते हैं।


पिछले शोधों में यह बात सामने आयी थी धूम्रपान करने वाला व्‍यक्ति अगर धूम्रपान छोड़ दे, तो भी उसकी कार्डियोवस्‍कुलर रोगों से मृत्‍यु होने की आशंका को धूम्रपान न करने वाले व्‍यक्ति के समान स्‍तर पर आने में 15 वर्ष का समय लग सकता है।


लेकिन, नए शोध के मुताबिक अगर 65 वर्ष की आयु के बाद अगर कोई व्‍यक्ति धूम्रपान छोड़ता है उसे यह स्‍तर हासिल करने में महज आठ वर्ष का समय लगेगा।


हालांकि, कार्डियोवस्‍कुलर से इतर कैंसर, फेफड़ों के रोग और इम्‍फेसिमा (वातस्‍फीति) जैसे रोग उनकी जान के लिए बड़ा खतरा बने रहेंगे। इस शोध में ऐसे वृद्धों को शामिल किया गया जिन्‍होंने अधिक से अधिक दस वर्षों तक रोजाना 64 से कम सिगरेट अथवा तीस वर्षों तक रोजाना एक पैकेट से कम सिगरेट पी।


कार्डियोवस्‍कुलर डिजीज के प्रोफेसर डॉक्‍टर अली अहमद ने कहा कि यह अच्‍छी खबर है। उन्‍होंने कहा इस शोध से ऐसे संकेत मिलते हैं कि कार्डिवस्‍कुलर हेल्‍थ अब पहले के मुकाबले जल्‍द सुधरने लगेगी।


डॉक्‍टर अली का कहना है कि अगर आप लंबा जीवन जीना चाहते हैं, तो आपका धूम्रपान से दूर रहना चाहिए। यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा यूनिवर्सिटी के बर्मिंघम स्‍कूल ऑफ मेडिसन में कार्यरत प्रोफेसर अली ने 1989 में संकलित 13 वर्षों की चिकित्‍सकीय जानकारी का विश्‍लेषण करने के बाद यह निष्‍कर्ष निकाला।


उन्‍होंने 15 वर्ष या उससे कुछ पहले धूम्रपान छोड़ने वाले 853 लोगों की तुलना 2557 ऐसे लोगों से की जिन्‍होंने कभी धूम्रपान नहीं किया था। सभी की उम्र 65 वर्ष या उससे अधिक थी। नतीजों को उम्र, लिंग और नस्‍ल के आधार पर संशोधित किया गया। इस शोध के नतीजे अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के साइंटिफिक सेशन 2013 में पेश किया गए।

 

 

 

 

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