शिशुओं और बच्चों में सोरायसिस के 11 लक्षण, कारण और बचाव के टिप्स

शिशु या बच्चे को सोरायसिस होने पर कई लक्षण नजर आ सकते हैं। ऐसे में इसके प्रकार, कारण और बचाव के बारे में जानना जरूरी है।

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Jul 13, 2021Updated at: Jul 13, 2021
शिशुओं और बच्चों में सोरायसिस के 11 लक्षण, कारण और बचाव के टिप्स

जब बच्चों की त्वचा पर लालिमा या दाग धब्बे हो जाते हैं तो माता-पिता उसे त्वचा संबंधी समस्या समझ बैठते हैं। लेकिन हो सकता है यह सोरायसिस के लक्षण हों। ऐसे में नजरअंदाज करना सही नहीं है। बता दें, जब सोरायसिस की समस्या बच्चों या शिशुओं में पैदा होती है तो कोशिकाएं स्किन के ऊपर उभरने लगती हैं। उस दौरान शिशु की या बच्चे की त्वचा पर पपड़ी या उनकी त्वचा मृतक दिखाई देती है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि बच्चों में सोरायसिस होने के कितने प्रकार हैं। साथ ही इसके लक्षण, कारण और बचाव भी जानेंगे। इसके लिए हमने श्री राम सिंह हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट और डायरेक्टर ऑफ स्किन लेजर सेंटर नोएडा डॉक्टर टी.ए राणा (Consultant Dermatologist Dr. T.A.Rana) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...

 

शिशुओं और बच्चों में सोरायसिस कई प्रकार के हो सकते हैं। अगर शिशु या बच्चा क्रॉनिक प्लाक सोरायसिस का शिकार हो जाए तो उसकी त्वचा पर मोटे धब्बे दिखाई देते हैं। जो लाल रंग के होते हैं। वहीं उनकी त्वचा में पपड़ी भी उभरने लगती है। यह सोरायसिस आमतौर पर चेहरे के साथ-साथ कोहनी और घुटनों पर भी हो सकता है। दूसरे सोरायसिस का नाम है डायपर सोरायसिस। इस सोरायसिस में बच्चों के डायपर वाले हिस्से में लाल चकते उभरने लगते हैं जो कि लाल रंग के होते हैं। इसके कारण बच्चों को काफी तकलीफ का सामना करना पड़ सकता है। तीसरा सोरायसिस गटेट सोरायसिस है। इसमें बच्चों के चेहरे पर लाल रंग के निशान दिखाई देते हैं। चौथा प्रकार है पस्टूलर सोरायसिस। जब किसी बच्चे को सोरायसिस का प्रकार होता है तो उसके त्वचा में पीले रंग के छाले हो सकते हैं, जिससे मवाद आना शुरू हो सकता है। इसके अलावा सोरायसिस के और भी प्रकार हैं लेकिन वह प्रकार बच्चों में कम नजर आते हैं।

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बच्चों में सोरायसिस के लक्षण

जब बच्चे इस गंभीर समस्या से ग्रस्त हो जाते हैं तो माता पिता को कुछ संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। जो निम्न प्रकार हैं-

1 - त्वचा कर पपड़ी हो जाना या फटा हुआ हो जाना।

2 - त्वचा पर सफेद परत दिखाई देना।

3 - त्वचा में खुजली हो जाना।

4 - त्वचा में दर्द महसूस करना।

5 - नाखून के आकार का बदलना।

6 - त्वचा में जलन महसूस करना

7 - नाखून के रंग का बदलाव।

8 - बालों में रूसी की समस्या हो जाना।

9 - त्वचा पर लाल निशान होना।

10 - पैरों और जोड़ों में सूजन महसूस करना।

11 - हाथों की उंगली और हाथों में भी सूजन आना।

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आमतौर पर शिशु या बच्चों में सोरायसिस लाल चकत्ते के रूप में दिखाई देता है। इससे अलग कुछ सोरायसिस छाले के रूप में भी दिखाई देते हैं। ये बच्चे पर निर्भर करता है कि आपका बच्चा किस प्रकार के सोरायसिस का शिकार हुआ है। ऐसे में इससे संबंधित रिसर्च पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। लेकिन ऊपर बताए गए लक्षण भी इस समस्या को दर्शाते हैं। ऐसे में माता-पिता को समय-समय पर जांच करवाने की जरूरी होती है।

शिशुओं और बच्चों में सोरायसिस होने के कारण

  • शिशुओं और बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह से विकसित नहीं होता। ऐसे में वे इस समस्या के शिकार हो जाते हैं। जी हां, सोरायसिस के पीछे का मुख्य कारण इम्यूनिटी सिस्टम है। जब वाइट ब्लड सेल्स ज्यादा एक्टिव होने लगते हैं तो प्रोटीन ग्रुप अधिक मात्रा में बनना शुरू हो जाता है, जिसके कारण त्वचा पर सूजन या लाल चकत्ते दिखाई दे सकते हैं। 
  • इससे अलग यह समस्या जेनेटिक भी हो सकती है। अगर परिवार में कोई व्यक्ति इस समस्या से ग्रस्त रहता है या वे जल्दी समस्या का शिकार हो जाता है तो बच्चे में भी इस प्रकार की समस्या आ सकती है। 
  • इससे अलग यदि बच्चा चिंता या तनाव में है तब भी इस समस्या से ग्रस्त हो सकता है। कल कुछ ऐसे संक्रमण भी होते हैं जो इस समस्या का कारण बनते हैं। 
  • जब त्वचा पर अत्यधिक जलन रहती है तब भी सोरायसिस जैसी समस्या हो सकती हैं। 
  • वहीं शिशु या बच्चे के अधिक वजन के कारण भी ये समस्या हो सकती है। 
  • अगर बच्चे की त्वचा रूखी है या बच्चों की त्वचा पर किसी भी प्रकार की चोट आदि समस्या हो गई है तब भी यह समस्या हो सकती है। 
  • ज्यादा धूप के कारण भी बच्चे सोरायसिस की समस्या का शिकार हो सकते हैं।

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बच्चों और शिशुओं की को सोरायसिस से बचाव

अगर आप बच्चों को य से बचाव करना चाहते हैं तो कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है जो निम्न प्रकार है।

1 - बच्चे को किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाना।

2 - रूखी त्वचा है तो मॉइश्चराइजर का प्रयोग करना।

3 - बच्चे को ज्यादा धूप में ना रखना।

4 - बच्चे के तापमान को समय-समय पर चेक करना।

5 - बच्चे के आसपास साफ सफाई का पूरा ध्यान रखना।

6 - बच्चे को नियमित रूप से नहलाना।

7 - बच्चा का तनाव में है तो उसकी परेशानी को दूर करना और उसके मन को कहीं और लगाना।

8 - बच्चे को संतुलित आहार देना।

शिशु और बच्चे को सराय से के कारण होने वाली और बीमारियां

अगर शिशु या बच्चे को सोरायसिस हो गया है तो इसके कारण उन्हें कुछ और भी समस्या हो सकती है जैसे सांस से संबंधित समस्या, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, वजन बढ़ना, हृदय रोग, स्ट्रोक। इससे अलग जोड़ों में दर्द, सूजन, आंखों के भीतरी परत में सूजन आदि समस्याओं का सामना बच्चों को करना पड़ सकता है।

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नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि बच्चों में सोरायसिस की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में अगर ऊपर बताए गए लक्षण आपको अपने बच्चे में या शिशु में नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही ऊपर बताए गए टिप्स से आप अपने बच्चों का सोरायसिस से बचाव कर सकते हैं। समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। 

ये लेख इसके लिए हमने श्री राम सिंह हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट और डायरेक्टर ऑफ स्किन लेजर सेंटर नोएडा डॉक्टर टी.ए राणा (Consultant Dermatologist Dr. T.A.Rana) द्वारा दिए गए इनपुट्स पर बनाया गया है।

इस लेख में इस्तेमाल की जानें वाली फोटोज pixabay से ली गई हैं।

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