कई समस्याओं में काम आता है चीड़ का तेल (पाइन ऑयल), जानें इसके 5 फायदे, प्रयोग का तरीका और नुकसान

चीड़ का तेल कई समस्याओं में उपयोगी होता है। यहां आयुर्वेदाचार्य से जानें इसके फायदे और नुकसान। 

 
Kunal Mishra
Written by: Kunal MishraPublished at: Jul 02, 2021Updated at: Jul 02, 2021
कई समस्याओं में काम आता है चीड़ का तेल (पाइन ऑयल), जानें इसके 5 फायदे, प्रयोग का तरीका और नुकसान

क्या आपने कभी चीड़ के पेड़ के बारे में सुना है? दरअसल, चीड़ एक उंचे कद का पेड है, जो अधिकांश पहाड़ी छेत्रों में पाया जाता है। चीड का पेड़ स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में भी इस पेड़ को विशेष महत्तव दिया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं चीड़ के पेड़ में से निकलने वाला तेल भी आपको कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचाने में मदद करता है? जी हां, आज हम इस लेख के माध्यम से चीड़ के तेल के कुछ फायदों के बारे में जानेंगे। इसे अंग्रेजी में पाइन ऑयल के नाम से भी जाना जाता है। चीड़ के तेल में एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो आपको शरीर में हो रहे दर्द और सूजन आदि से छुटकारा दिलाने में फायदेमंद माने जाते हैं। इसी विषय पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने हरियाणा के सिरसा जिले के आयुर्वदाचार्य डॉक्टर श्रेय शर्मा (Dr. Shrey Sharma, Ayurvedacharya, Haryana) से बातचीत की। चलिए जानते हैं चीड़ के तेल के कुछ फायदों और नुकसान के बारे में।   

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1. त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद (Beneficial for Hair and Skin)

चीड़ के तेल पर हुए एक शोध में यह पाया गया कि इस तेल को आप शरीर में  होने वाली जलन, खुजली आदि पर लगा सकते हैं। वहीं इसमें बायोटिन और विटामिन बी6 जैसे भी तत्व पाए जाते हैं, जो स्कैल्प से डैंड्रफ निकालने और उसे इंफेक्शन से बचाता है। यह तेल आपके बालों के विकास में भी मदद करता है। वहीं इसमें हीलिंग प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं, जो त्वचा की समस्याओं जैसे एक्ने, एक्जिमा या फिर त्वचा के इंफेक्शन आदि से बचाने में मददगार होती है।  

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2. सूजन कम करने में सहायक (Reduces Swelling) 

डॉ. श्रेय ने बताया कि चीड़ के तेल में मुख्य रूप से एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। जो आपकी शरीर में हो रहे दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। चीड़ के तेल में थेरेप्यूटिक तत्व पाए जाते हैं, जो अर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द आदि जैसी समस्याओं में काफी कारगर होते हैं। शोध में यह पाया गया कि चीड़ के तेल में मुख्य रूप से एंटी ऑक्सीडेंट्स और एंटी इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं। यह ओस्टियोअर्थराइटिस, अर्थराइटिस और मसल पेन में काफी आरामदायक होता है। दर्द के लिए इसे तिल के तेल के साथ मिलाकर लगाया जा सकता है।

3. संक्रमण से बचाए (Prevents Infection) 

चीड़ का तेल शरीर में होने वाले सामान्य सर्दी-जुकाम और संक्रमण से आपको बचाता है। चीड़ के तेल में एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं, जो आपके त्वचा के चकत्ते, घाव आदि को कम करते हैं। सर्दी जुकाम से बचने के लिए आप इसे अपने सीने, पीठ आदि पर मला जा सकता है। इस तेल की तासीर गर्म होती है, जो सर्दी जुकाम जैसे वायरल इंफेक्शन से लड़ने में अच्छी प्रतिक्राया देता है। 

4. भूख बढ़ाने में मददगार (Helps In increasing Appetite)

भूख बढ़ाने के लिए लोग तरह-तरह के नुस्खे आजमाते हैं, लेकिन कई बार फायदा नहीं मिलता है। ऐसे में पाइन ऑयल यानि चीड़ का तेल आपकी भूख को बढ़ा सकता है। इसमें फैटी एसिड की भी मात्रा होती है इसलिए भूख बढ़ाने के लिए आप अपने आयुर्वेदाचार्य से इस तेल को प्रयोग करने का तरीका और मात्रा जान सकते हैं। 

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5. जलन और जख्म भरने में मददगार (Heals Wounds and Burning Sensations)

डॉ. श्रेय ने बताया कि चीड़ के तेल को जख्म भरने और जलन से छुटकारा पाने के लिए भी उपयोग किया जाता है। इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी प्रॉर्पटीज पाई जाती हैं, जो जलन को दूर करने में बहुत अहम भूमिका निभाती हैं। जख्म भरने के लिए किसी अन्य तेल जैसे तिल के तेल आदि की कुछ बूंदें प्रभावित हिस्से पर लगाने से जख्म जल्दी भरता है। लेकिन ऐसे में ध्यान रखें कि इस तेल की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे कम मात्रा ही प्रयोग करें। 

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चीड़ के तेल के नुकसान (Side Effects of Pine Oil)

  • आयुर्वेदाचार्य डॉ. श्रेय शर्मा ने बताया कि इस तेल का उपयोग कम मात्रा में ही करना चाहिए। इसकी तासीर गर्म होती है और यह आपकी त्वचा पर जलन, खुजली आदि की समस्या हो सकती है।  
  • इस तेल में टरपीन नामक तत्व पाया जाता है, जिसका अधिक सेवन आंखों और सिर में भारीपन और जलन पैदा कर सकता है। 
  • सर्दी जुकाम में भी इसका ज्यादा प्रयोग करना आपको घबराहट और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्या पैदा कर सकता है। 

यह लेख आयुर्वेदाचार्य द्वारा प्रमाणित है। चीड़ का तेल फायदेमंद होने के साथ ही ज्यादा इस्तेमाल करने पर नुकसानदेह भी हो सकता है। इसलिए इसे इस्तेमाल करने से पहले इसकी मात्रा और नुकसान भी जान लें। 

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