पीरियड्स के बाद भी रहता है दर्द तो कारण हो सकती हैं ये 5 समस्याएं, जानें बचाव के उपाय

कुछ मह‍िलाओं को पीर‍ियड्स के बाद भी दर्द महसूस होता है, अगर आपके साथ भी ये समस्‍या है तो जानें क्‍या है कारण और बचाव के उपाय

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurUpdated at: Sep 07, 2021 12:53 IST
पीरियड्स के बाद भी रहता है दर्द तो कारण हो सकती हैं ये 5 समस्याएं, जानें बचाव के उपाय

मह‍िलाओं में पीर‍ियड्स के दौरान होने वाला दर्द सामान्‍य होता है पर ये दर्द पीर‍ियड्स के बाद भी हो तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। कई बीमार‍ियों के कारण ऐसी स्‍थ‍िति आ सकती है। वहीं जो मह‍िलाए प्रेग्‍नेंट होती हैं उन्‍हें भी पीर‍ियड्स के बाद दर्द हो सकता है ऐसे में आपको डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए। अगर आप पूछें क‍ि क्‍या पीर‍ियड्स के बाद भी दर्द होना सामान्‍य है तो इसका जवाब है नहीं, ये लक्षण ब‍िल्‍कुल सामान्‍य नहीं हैं इसका कारण र‍िप्रोडक्‍ट‍िव ऑर्गन से जुड़ी कोई बीमारी हो सकती है। आप समय रहते इलाज करवाएं तो समस्‍या का इलाज नामुमक‍िन नहीं है। इस लेख में हम पीर‍ियड्स के बाद होने वाले दर्द और दर्द से बचने के उपायों पर चर्चा करेंगे। इस व‍िषय पर ज्‍यादा जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के केयर इंस्‍टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की एमडी फ‍िजिश‍ियन डॉ सीमा यादव से बात की।

pain after periods

(image source:dailypioneer)

पीर‍ियड्स के बाद दर्द होने के कारण (Causes of pain after periods)

1. प्रेग्नेंसी (Pregnancy) 

पीर‍ियड्स के बाद भी पीर‍ियड्स जैसा दर्द प्रेग्नेंसी का एक लक्षण हो सकता है। हम ये समझते हैं क‍ि प्रेग्नेंसी में ब्‍लीड‍िंग होना एक समस्‍या है पर प्रेग्नेंसी के शुरूआती लक्षण में भी कुछ ऐसा ही होता है। प्रेग्नेंट होने पर फर्टाइल एग यूट्रस की वॉल से च‍िपक जाता है ज‍िसके कारण ब्‍लीड‍िंग या पीर‍ियड्स के बाद दर्द हो सकता है, ऐसे में आपको डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए और प्रेग्नेंसी टेस्‍ट करवाना चाह‍िए।  

2. एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)

एंडोमेट्रियोसिस भी महिलाओं को होने वाली बीमारी है जो 15 से 44 साल की उम्र की मह‍िलाओं को हो सकती है। इस बीमारी में ट‍िशू, यूट्रस की लाइन‍िंग के बाहर बढ़ने लगता है। इसके कारण गर्भधारण में परेशानी हो सकती है, पीर‍ियड्स के दौरान तेज दर्द या पीर‍ियड्स के बाद भी तेज दर्द का अहसास हो सकता है।

इसे भी पढ़ें- पीरियड्स के दौरान सामान्य से कम ब्लीडिंग होने पर अपनाएं ये 6 घरेलू नुस्खे, नॉर्मल हो जाएगा ब्लड फ्लो

3. फाइब्रॉएड (Fibroids)

periods pain

(image source:makatimed)

कुछ मह‍िलाओं के यूट्रस में फाइब्रॉएड बनने लगता है ये एक तरह का ट्यूमर होता है। इसका असर फर्ट‍िल‍िटी पर पड़ता है। ट्यूमर का साइज बढ़ने से तकलीफ बढ़ सकती है इसल‍िए असामान्‍य लक्षण नजर आने पर आपको डॉक्‍टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। ये समस्‍या वैसे तो मह‍िलाओं को क‍िसी भी उम्र में हो सकती है पर ज्‍यादातर ट्यूमर 30 से 40 की उम्र के बीच वाली मह‍िलाओं को होती है। फाइब्रॉएड के कारण पीर‍ियड्स के दौरान तेज दर्द हो सकता है जो पीर‍ियड्स के बाद भी बना रह सकता है। 

4. पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिसीज (Pelvic inflammatory disease) 

पेल्‍व‍िक इंफ्लेमेटरी ड‍िसीज यूट्रस की एक बीमारी है जो मह‍िलाओं के र‍िप्रोडक्‍टिव ऑर्गन पर असर डालतजी है ज‍िसके कारण पीर‍ियड्स के बाद भी दर्द का अहसास हो सकता है। पेल्‍व‍िक इंफ्लेमेटरी ड‍िसीज के कारण गर्भावस्‍था में भी परेशानी हो सकती है। आज के समय में ये समस्‍या इंफर्ट‍िल‍िटी का एक कारण भी है। ये बीमारी कम उम्र की लड़क‍ियों के ल‍िए ज्‍यादा हान‍िकारक मानी जाती है। अगर पीर‍ियड्स के बाद आपको दर्द होता है या कोई असामान्‍य लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्‍टर को द‍िखाएं। 

5. ऐडेनोमायोसिस (Adenomyosis) 

ऐडेनोमायोस‍िस मह‍िलाओं में होने वाली एक बीमारी है ज‍िसके कारण यूट्स की मांसपेश‍ियों के अंदर स्‍थ‍ित लाइन‍िंग टिशू ज‍िसे हम एंडोमीट्र‍ियम कहते हैं उसमें सूजन आ जाती है ज‍िसके कारण पीर‍ियड्स के दौरान या उसके बाद तेज दर्द हो सकता है।

पीर‍ियड्स के बाद होने वाले दर्द से कैसे बचें? (How to prevent pain after periods)

1. अदरक की चाय पीएं (Drink ginger tea)

ginger tea during periods

(image source:firstpost.com)

पीर‍ियड्स से जुड़ी समस्‍या या पीर‍ियड्स के दौरान होने वाले दर्द को दूर करने के ल‍िए आपको अदरक की चाय पीनी चाह‍िए। अदरक से पीर‍ियड्स के दौरान होने वाले दर्द से बच सकते हैं। दर्द को कम करने के ल‍िए आप सुबह गुनगुने पानी में अदरक पीसकर डालें या पानी में अदरक डालकर पानी को उबाल लें और उसे छानकर उसमें शहद म‍िलाकर पीएं। अदरक दर्द को दूर करने में फायदेमंद माना जाता है। पीर‍ियड्स के डेट नज़दीक है तो आप उसके शुरू होने से पहले ही अदरक की चाय का सेवन कर सकती हैं।  

2. पीर‍ियड्स के दौरान भी कसरत जरूरी है (Exercise during periods)

पीर‍ियड्स में आपको तेज दर्द का अहसास होता होगा पर आपको बता दें क‍ि इस दौरान भी आपको हल्‍की कसरत करते रहना चाह‍िए। कसरत करने से मसल्‍स रिलैक्‍स होती है और दर्द कम होता है। आप चाहें तो वॉक पर भी जा सकती हैं या कार्ड‍ियो एक्‍सरसाइज भी कर सकती हैं। इसके साथ ही आपको पानी की मात्रा भी बनाए रखना चाहि‍ए, कई बार पानी की कमी के कारण भी दर्द उठ सकता है इसल‍िए पानी की पर्याप्‍त मात्रा शरीर में बनाए रखें। 

3. सौंफ का सेवन करें (Benefits of saunf)

saunf during periods

(image source:amazonaws.com)

कई बार पीर‍ियड्स के दौरान महिलाओं को दस्‍त या पेट से जुड़ी शि‍कायत जैसी कब्‍ज की समस्‍या भी होती है ज‍िसके कारण पीर‍ियड्स के बाद भी दर्द हो सकता है। अगर पेट से जुड़ी श‍िकायत है तो आप सौंफ का सेवन कर सकते हैं। सौंफ पेट के ल‍िए फायदेमंद होती है। सौंफ को आप सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं। आप पीर‍ियड्स के बाद दर्द को कम करने के ल‍िए दालचीनी की चाय भी पी सकते हैं। पेट से जुड़ी समस्‍याओं को दूर करने के लि‍ए दालचीनी और सौंफ का पानी म‍िलाकर पीएं तो फायेदा होगा। 

इसे भी पढ़ें- पीरियड्स पर कैसे असर डालता है थायराइड रोग? जानें इससे होने वाली समस्याएं और थायराइड कंट्रोल करने के 5 उपाय

4. पीर‍ियड्स के दौरान इन चीजों का सेवन न करें (Avoid these foods during periods)

पीर‍ियड्स के दौरान आपको क‍िन चीजों का सेवन अवॉइड करना चाह‍िए? पीर‍ियड्स के दौरान या बाद में दर्द को बढ़ाने के ल‍िए कुछ खाद्य पदार्थ ज‍िम्‍मेदार हो सकते हैं जैसे चीनी, ब्रेड, पास्‍ता। आपको ट्रांस-फैटी एस‍िड अवॉइड करना चाह‍िए जो क‍ि ज्‍यादातर कुकीज़, फ्रेंच फ्राइज़, क्रैकर्स में पाया जाता है। इसके अलावा एल्‍कोहॉल, कैफीन, तंबाकू का सेवन भी न करें। आपको पीर‍ियड्स के दौरान ऐसी चीजों का सेवन करने का मन कर सकता है ज‍िसमें म‍िर्च-मसाला या चीनी की मात्रा ज्‍यादा होती है पर आपको क्रेव‍िंग शांत करने के उपाय ढूंढने चाह‍िए ताक‍ि आप इस दौरान कुछ भी ऐसा न खाएं ज‍िससे दर्द बढ़ जाए।

क‍िसी भी बीमारी का इलाज समय रहते क‍िया जाए तो उसे बढ़ने से रोका जा सकता है, मह‍िलाओं को स्‍वास्‍थ्‍य के मामले में लापरवाही न बरतते हुए इलाज जल्‍द से जल्‍द करवाना चाह‍िए।

(main image source:www.raleighob.com)

Read more on Women Health in Hindi 

Disclaimer