ऑस्टियोअर्थराइटिस के बारे में आज ही दूर करें ये 5 भ्रांतियां, हड्डियां रहेंगी सुरक्षित

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 30, 2018
Quick Bites

  • ऑस्टियोअर्थराइटिस के मामले में अनेक लोग भ्रांतियों के शिकार हैं।
  • अर्थराइटिस से संबंधित ज्यादातर समस्याएं बुजुर्ग लोगों में देखी जाती हैं।
  • ऑस्टियोअर्थराइटिस से पीड़ित अधिकतर लोगों को सर्जरी की आवश्यकता होगी। 

अर्थराइटिस खासकर ऑस्टियो अर्थराइटिस के मामले में अनेक लोग भ्रांतियों के शिकार हैं, जिनका तथ्यों की रोशनी में निराकरण करना जरूरी है। आज हम आपको इस रोग से संबंधित भ्रांति और तथ्य के बारे में बता रहे हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वो—

भ्रांति: केवल बुजुर्ग लोगों को अर्थराइटिस होती है। 

तथ्य: हालांकि अर्थराइटिस से संबंधित ज्यादातर समस्याएं बुजुर्ग लोगों में देखी जाती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ बुजुर्ग लोग ही इससे प्रभावित हो सकते हैं। अब हमारे पास ऑस्टियोअर्थराइटिस से ग्रस्त ऐसे मरीज भी आ रहे हैं, जिनकी उम्र 30 से 40 साल के बीच है। आरामतलब जीवनशैली, मोटापा और जंक फूड्स खाना कुछ ऐसे कारक हैं जो युवा पीढ़ी में अर्थराइटिस के मामलों को बढ़ा रहे हैं। 

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भ्रांति: अगर अर्थराइटिस का पता चलता है तो आपको व्यायाम नहीं करना चाहिए। 

तथ्य: यदि आपको दर्द रहता है तो भी आपको व्यायाम करना चाहिए। व्यायाम आपके जोड़ों को अधिक लचीला बनाने में मदद करता है, जिससे आपको अर्थराइटिस के दर्द से राहत मिलती है। आप अपने डॉक्टर से बात करें। वह आपको कुछ ऐसे साधारण व्यायाम करने की सलाह दे सकते हैं जो आपके जोड़ों के लिए फायदेमंद होंगे। अर्थराइटिस के दर्द से राहत पाने के लिए कुछ बेहतरीन व्यायामों में तैराकी, स्ट्रेंग्थ ट्रेनिंग, तेज चलना और योग शामिल हैं। 

भ्रांति: यदि कोई व्यक्ति कम उम्र में ही ज्वाइंट रिप्लेसमेंट कराता है, तो वह कृत्रिम इंप्लांट या डिवाइस उसकी पूरी जिंदगी तक नहीं चलेगा। 

तथ्य: यह सच है कि डिवाइस के कुछ पाट्र्स समय के साथ खराब हो जाते हैं, और संभवत: उसमें सुधार या बदलाव करना पड़ सकता है या इस प्रक्रिया को दोबारा करना पड़ सकता है। इसके बावजूद ऑक्सीडाइज्ड जिरकोनियम जैसी नई तकनीक और नए प्रत्यारोपण इंप्लांट्स लगभग 30 साल तक चलते हैं, जो यूएस एफडीए द्वारा अनुमोदित हैं। इन इंप्लांट्स के कारण व्यक्ति बेहतर जीवन जी सकता है। 

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भ्रांति: ऑस्टियोअर्थराइटिस से पीड़ित अधिकतर लोगों को सर्जरी की आवश्यकता होगी। 

तथ्य: यदि रोगी को तेज दर्द होता हो या उसके जोड़ अधिक क्षतिग्रस्त हो गए हों, और अन्य चिकित्सकीय उपचार से रोगी को अधिक राहत नहीं मिल रही हो तो सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। कृत्रिम जोड़ से क्षतिग्रस्त जोड़ों को बदलने से व्यक्ति के चलने- फिरने में सुधार होता है, उसे दर्द से छुटकारा मिल सकता है और वह किसी सहारे के बगैर रह सकता है। जोड़ों को फिर से अलाइन करने से भी ऑस्टियोअर्थराइटिस के अनेक रोगियों में सुधार संभव है। 

डा. संजय कुमार श्रीवास्तव 
ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, सर्जन, लखनऊ

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