सर्दियों में नवजात शिशु की देखभाल में न करें लापरवाही, ध्यान रखें ये 5 बातें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 24, 2018
Quick Bites

  • 1 साल तक के बच्‍चों को सरसों के तेल से मालिश न करें।
  • तापमान सामान्‍य रखने के लिए शिशु को कपड़े से लपेटना जरूरी है।
  • मालिश के बाद शिशु को हर बार नहलाना चाहिए।

 

नवजात बच्चों की देखभाल आसान काम नहीं है। सर्दियों के मौसम में चूंकि वातावरण का तापमान काफी कम हो जाता है इसलिए इस मौसम में उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इस दौरान बच्चों के स्वास्थ्य में थोड़ी सी लापरवाही उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। अक्सर वर्किंग वीमेन और काम में बिजी महिलाओं को शिशु की देखभाल करने में परेशानी होती है, तो उन्हें झल्लाहट होती है। ऐसे में इन परेशानियों से बचने के लिए जरूरी है कि आप सर्दियों में शिशु का ठीक तरह से ध्यान रखें, जिससे न तो शिशु को कोई समस्या हो और न ही आपको।

कब कराएं स्तनपान

जन्‍म के 6 महीने तक बच्‍चे को केवल स्‍तनपान कराना चाहिए। यह बहुत ही शानदार तरीका है बच्‍चे को सुलाने का जब आपकी गोद में ही आपका लाडला छपकी ले ले। शुरूआत के 3-4 महीने तक बच्‍चा दिन और रात में फर्क नहीं कर पाता है, इसलिए बच्‍चे को इस दौरान दिन और रात दोनों समय बराबर मात्रा में स्‍तनपान करायें। जब बच्‍चा सो रहा हो तब उसे स्‍तनपान न करायें। जब बच्‍चे का पेट खाली हो जायेगा तो वह खुद नींद से जाग जायेगा ऐसे में उसे स्‍तनपान कराकर सुलाइए।

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बच्चे की मालिश जरूर करें

बच्‍चों को मालिश बहुत जरूरी है, बच्‍चों की मालिश कीजिए। लेकिन मालिश के वक्‍त तेल का चयन करते वक्‍त ध्‍यान रखें। बहुत ज्यादा सुगंधित तेलों का इस्तेमाल न करें, क्योंकि कुछ सुगंधों से त्वचा में एलर्जी या खुजली हो सकती है। 1 साल तक के बच्‍चों को सरसों के तेल से मालिश न करें। शिशु के लिए सबसे आरामदेह स्थिति यही होती है कि आप अपने पैरों को सीधा फैलाकर बैठें। फिर शिशु को दोनों पैरों के बीच लिटाकर उसके सिर के नीचे छोटा तकिया लगाएं और हल्के हाथों से उसकी मालिश करें। शुरुआत हमेशा उसके पैरों से करें। इस दौरान शिशु के हाथ-पैरों को हलके से मोड़़ते हुए उसकी एक्सरसाइज़ भी करानी चाहिए। फिर उसके पेट और छाती की मालिश करें। इसके बाद उसे पेट के बल उलटा लिटाकर पीठ और कमर की मालिश करें और अंत में सिर की मालिश करें।

शिशु को ठंड न लगने दें

नवजात के शरीर का तापमान सामान्‍य रखने के लिए उसे कपड़े से लपेटना जरूरी है, इसके आलावा बच्‍चे को चौंका देने वाले झटके भी आते हैं इससे बचाने के लिए भी उनको लपेटें। शिशु को लपेटने से पहले यह जांच लीजिए कि शिशु कहीं भूखा या गीला तो नहीं है। यह सुनिश्चित करें कि आपने उसका चेहरा या सिर तो नहीं ढक दिया है, क्योंकि इससे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है और उसके शरीर का तापमान सामान्‍य से अधिक हो सकता है। यदि आप अपने शिशु को लपेटती हैं तो सामान्यत: उसे ऊपर एक कम्बल या चादर की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

बच्चे के रोने पर गुस्सा न करें

नवजात शिशु रोकर ही आपके साथ अपना संवाद स्थापित करता है। उसमें इतनी समझ नहीं होती है कि वह अपनी ज़रूरतों की प्राथमिकता पहचान सके। इसलिए उसे जब भी कोई बात नापसंद होती है तो वह रो कर ही अपनी नाराज़गी का इज़हार करता है। शिशु का रोना नई मां के लिए सबसे बड़ी समस्या होती है। आमतौर पर भूख लगने, नैपी गीली होने, कोई नया चेहरा देखने या नई आवाज़ सुनने और बड़ों द्वारा गोद में उठाए जाने का तरीका नापसंद होने पर वह रोकर अपना विरोध प्रदर्शित करता है। कभी-कभी बच्चे थकान की वजह से भी रोते हैं। अगर आपका बच्चा गहरी नींद से चौंककर जागने के बाद रोने लगे तो सबसे पहले उसकी नैपी चेक करें कि कहीं वह गीलेपन की वजह से तो नहीं रो रहा। ये कुछ ऐसे सामान्य लक्षण हैं, जिन्हें आसानी से पहचानकर आप यह अंतर समझ सकती हैं कि आपका बच्चा किस कारण से रो रहा है।

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शिशु को नहलाने का सही तरीका

मालिश के बाद शिशु को हर बार नहलाना चाहिए। सर्दियों के मौसम में बच्चों को गुनगुने पानी से नहलाएं और सप्ताह में कम से कम 2-3 बार जरूर नहलाएं। इससे उसे बहुत आराम महसूस होता है और अच्छी नींद भी आती है। शिशु को नहलाने से पहले उसके नहाने से संबंधित सारा ज़रूरी सामान जैसे बेबी सोप, शैंपू, तौलिया, बच्चे के कपड़े और बाथ टब को एक जगह व्यवस्थित करके फिर उसे नहलाना शुरू करना चाहिए। चाहे कोई भी मौसम हो शिशु को नहलाने के लिए हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। उसे नहलाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उसकी आंख, नाक या कान में पानी न जाने पाए। इसके लिए शिशु को अपने बाएं हाथ पर उलटा लिटाकर नहलाना चाहिए। नहलाते समय शिशु के अंडर आर्म्स, गर्दन और प्राइवेट पाट्र्स की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि ऐसी जगहों में पसीना ज्य़ादा जमा होने की वजह से रैशेज़ पड़ सकते हैं। उसके कान और नाक की सफाई करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। मुलायम सूती कपड़े के कोने से उसके कान का बाहरी हिस्सा सा$फ करना चाहिए। सप्ताह में एक बार अच्छे बेबी शैंपू से शिशु का सिर अवश्य धोएं। ध्यान रखें कि इस दौरान उसकी आंखों में पानी न जाने पाए। नहलाने के तुरंत बाद उसका सिर सूखे तौलिये से पोंछें वरना उसे जुकाम हो सकता है।

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