किशोरों पर डेटिंग के गलत प्रभाव

अधिकतर किशोर डेटिंग का मतलब रोमांस या सेक्स से लेते हैं। दोस्तों के प्रभाव में आकर किशोर डेटिंग जैसे संबंधों के साथ कई बार अपने लिए परेशानियां भी मोल लेते हैं। आइए किशोरों पर डेटिंग के गलत प्रभावों के बारे में जानते है

Pooja Sinha
डेटिंग टिप्सWritten by: Pooja SinhaPublished at: May 27, 2011
किशोरों पर डेटिंग के गलत प्रभाव

किशोरावस्था बहुत ही नाजुक स्टेज होती है, इस स्टेज में किशोर हर बात को जल्द से जल्द जानना चाहते हैं। 12 से 18 साल तक के बीच की अवस्था किशोरावस्था कहलाती है। इसी स्टेज में किशोरों का मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास होता है। आज के समय में डेटिंग को ग्लैमर बना दिया गया है। किशोर डेटिंगका मतलब रोमांस या सेक्स ही समझते हैं जबकि वास्तव में डेटिंग इन दोनों में से कुछ भी नहीं। दोस्तों के प्रभाव में आकर किशोर खेल-खेल में डेटिंग करने लगते हैं। इन्हीं कारणों से किशोरों में इंटरनेट पर चैट करने का भी खूब क्रेज देखने को मिल रहा है। किशोरों की परिपक्वता उनके विकास पर निर्भर करती है। यदि सही तरह से उनका विकास होगा तभी वे स्वस्थ रह पाएंगे। आइए जानते हैं किशोरों पर डेटिंग के गलत प्रभावों के बारे में।

किशोरों पर डेटिंग के गलत प्रभाव

  • किशोर आमतौर पर डेटिंग को एक फैशन, रोमांच और एंडवेंचर के तौर पर लेते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि डेटिंग न जाने ऐसी क्या चीज है जिसमें खूब रोमांच है। इसी सोच के चलते वे डेटिंग को सेक्स तक से जोड़ देते हैं।
  • डेटिंग दरअसल, एक-दूसरे को जानने-समझने का मौका है न कि सेक्स के लिए डेटिंग की जाती है।
  • डेटिंग पर सेक्स को लेकर किशोर उत्साहित होते हैं। सेक्स को लेकर ही उनके दिमाग में अलग-अलग टैबू बैठ जाते हैं जिससे उनके मानसिक विकास में बाधा होने लगती हैं।
  • किशोरावस्था में पूरी तरह से मानसिक और शारीरिक विकास नहीं होता लेकिन एक-दूसरे ट्रेंड को फॉलो करते हुए लड़के-लड़कियां इसे कुछ अलग समझ डेटिंग करते हैं और एक-दूसरे से शारीरिक तौर पर जुड़ने की कोशिश करते हैं जो कि लड़के और लड़की दोनों के विकास से लिए हानिकारक है क्योंकि वे इस उम्र में पूरी तरह से सेक्स के बारे में नहीं जानते, इसीलिए उनके दिमाग में कहीं न कहीं डर भी बना रहता है।
  • डेटिंग के दौरान जब किशोर एक-दूसरे के प्यार में पड़ जाते हैं तो दरअसल, ये प्यार नहीं विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होता है जिससे संबंधों में कड़वाहट होने पर दोनों ही और से इमोशनल प्रॉब्लम्स हो जाती है जिससे कई बार किशोर डिप्रेशन या मानसिक बीमारी का भी शिकार हो जाते हैं।
  • कई बार दोस्तों के प्रभाव में आकर जोश-जोश में भी किशोर डेटिंग पर जाने से नहीं कतराते लेकिन यह भी उनके मानसिक विकास के लिए अच्छा नहीं हैं।
  • किशोरों को समझना चाहिए कि डेटिंग का मतलब एक-दूसरे को जानना-समझना है। यह सही है कि किशोरावस्था  में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होता है लेकिन आकर्षण कस मतलब ये नहीं कि आप डेटिंग के दौरान अचानक खुलापन दिखाने लगे।
  • किशारों की परिवक्वता के दौरान कामवासना के विकास के साथ-साथ भावों का विकास भी होता है। वह अपने प्रेम या प्रिय वस्तु के लिए कुछ त्याग करने को तैयार हो जाते हैं। ऐसे में पहली डेटिंग के बाद उनका हमउम्र साथी उनसे संबंध न रखना चाहे तो वे एकदम से निराश हो जाते हैं और भावावेश में आकर कुछ भी गलत करने के लिए तैयार हो जाते हैं। यही गलत कारण उनके विकास में बाधा पहुंचाते हैं।
  • किशोरों में इंटरनेट पर चैट करना भी कई बार गलत प्रभाव डालता है। चैट के दौरान किशोर कई ऐसी चीजों की जानकारी पाते है जो वे नहीं जानते कि वह कितनी सही है कितनी गलत। ऐसे में आधी-अधूरी जानकारी किशारों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।

किशोर परिपक्वता के दौरान दोस्तों के प्रभाव में आकर गलत कारणों को अंजाम दे देते हैं जो कि उनके विकास के लिए खतरनाक हो सकता है। बहरहाल, डेटिंग के दौरान किशोरों को किसी भी तरह का भय, संशय और किसी चीज का टैबू अपने मन में नहीं रखना चाहिए।

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