बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने के लिए अपनाएं ये 6 तरीके, हृदय स्वास्थ्य रहेगा बेहतर

कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए आप कुछ तरीकों को आजमा सकते हैं। जानें किस तरह से एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल कैसे करें- 

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: May 10, 2022Updated at: May 10, 2022
बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने के लिए अपनाएं ये 6 तरीके, हृदय स्वास्थ्य रहेगा बेहतर

How to Cure Cholesterol: शरीर के लिए कोलेस्ट्रॉल बहुत जरूरी होता है। कोलेस्ट्रॉल लिवर में बनता है, कई जरूरी कार्य करता है। यह कोशिकाओं की दीवारों को लचीला बनाए रखने में मदद करता है, इसके साथ ही कुछ हॉर्मोन बनाने के लिए भी इसकी जरूरत होती है। लेकिन शरीर में किसी भी चीज की तरह, बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल कई समस्याओं का कारण बन सकता है। कोलेस्ट्रॉल पानी में नहीं घुलता है, बल्कि शरीर के चारों तरफ घूमता है। इसके लिए कोलेस्ट्रॉल लिपोप्रोटीन नामक अणुओं पर निर्भर रहता है। लिपोप्रोटीन रक्त में कोलेस्ट्रॉल ले जाते हैं।

लिपोप्रोटीन दो तरह का होता है, इसमें एलडीएल और एचडीलए शामिल हैं। इन दोनों का स्वास्थ्य पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। एलडीएल के उच्च स्तर रक्त वाहिकाओं की दीवारों में कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है। इसलिए एलडीएल (LDL) को बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। जबकि एचडीएल (HDL) कोलेस्ट्रॉल को रक्त वाहिकाओं की दीवारों से दूर ले जाने में मदद करता है। एचडीएल को गुड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। तो चलिए विस्तार से जानते हैं अगर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है, इसे प्राकृतिक तरीके से किस तरह से ठीक किया जा सकता है।

1. मोनोअनसैचुरेटेड फैट

मोनोअनसैचुरेटेड फैट, हेल्दी फैट में आता है। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में प्रभावी हो सकता है। मोनोअनैचुरेटेड फैट एचडीएच को बढ़ाने और एलडीएल को कम करने में कारगर होता है। यह फैट कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण को भी कम कर सकता है। जैतून का तेल, बादाम, काजू, कैनोला का तेल, एवोकाडो, नट बटर और जैतून मोनोअनसैचुरेटेड फैट के बेहतर सोर्स होते हैं।

2. पॉलीअनसेचुरेटेड फैट

पॉलीअनसेचुरेटेड फैट एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करते हैं, इससे हृदय रोग का जोखिम कम रहता है। इतना ही नहीं पॉलीअनसेचुरेटेड फैट चयापचय सिंड्रोम और टाइप 2 मधुमेह के जोखिम को भी कम कर सकता है। खासकर ओमेगा 3 फैटी एसिड कोलेस्ट्रॉल के लिए जरूरी होता है। सैल्मन, छोटी समुद्री मछली, टूना और झींगा में ओमेगा 3 अधिक होता है। इसके अलावा अलसी के बीज, मूंगफली भी ओमेगा 3 का अच्छा सोर्स होता है।

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3. ट्रांस फैट से बचें

ट्रांस फैट अनसेचुरेटेड फैट होता है, जिन्हें हाइड्रोजनीकरण नामक प्रक्रिया द्वारा संशोधित किया गया है। ट्रांस वसा कोलेस्ट्रॉल के स्तर या एलडीएल को बढ़ाते हैं और एचडीएल को कम करते हैं, जो हमारे हृदय स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए आपको ट्रांस फैट को पूरी तरह से अवॉयड करना चाहिए। यह संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक होता है।

4. फाइबर अधिक मात्रा में खाएं

घुलनशील फाइबर पौधों में विभिन्न यौगिकों का एक समूह है, जो पानी में घुल जाता है। आंतों में रहने वाले फायदेमंद बैक्टीरिया घुलनशील फाइबर को पचा सकते हैं। ये अपने पोषण के लिए इसकी जरूरत होती है। फाइबर हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है। यह एलडीएल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है। जई अनाज, बीन्स और दाल, ब्रसल स्प्राउट, फल, मटर आदि में फाइबर अधिक मात्रा में होता है।

5. एक्सरसाइज

एक्सरसाइज करना पूरे सेहत के लिए जरूरी होता है। यह न सिर्फ शारीरिक फिटनेस में सुधार करता है, मोटापे से निपटने में मदद करता है। एक्सरसाइज करने से हृदय स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल को भी कम करता है। साथ ही एक्सरसाइज करने से एचडीएल को बढ़ावा मिलता है।

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6. हेल्दी वेट बनाए रखे

अधिक वजन या मोटापा हाई कोलेस्ट्रॉल के स्तर के जोखिम को कम कर सकता है। अगर आपका वजन अधिक है, तो आप कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर कता है। वजन को कम करने से कुल कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल या खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है।

आप अपने एचडीएल और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए इन तरीकों को आजमा सकते हैं। लेकिन हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।

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