टाइप 2 डायबिटीज को सही रखने के 5 आयुर्वेदिक तरीके, हमेशा रहेंगे स्‍वस्‍थ

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 20, 2018
Quick Bites

  • डायबिटीज में ग्लूकोज स्तर समान्य से अधिक हो जाता है
  • इस स्थिति को ही डायबिटीज कहा जाता है। 
  • इंसुलिन एक हार्मोन है जो पाचक ग्रन्थि द्वारा बनता है 

यदि आपको डायबिटीज या मधुमेह की समस्या है और आप ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक तरीकों की तलाश में हैं, तो आप सही जगह पर आ गए हैं। मधुमेह में नियम और संयम से रहना जरूरी होता है, जिसमें सुबह कसरत, योग, प्रतिदिन 5 बार भोजन जो कि मधुमेह के अनुकूल हो। 

 

डायबिटीज क्या है

जब हमारे शरीर की पैन्क्रियाज यानी अग्न्याशय में इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाता है तब खून में ग्लूकोज स्तर समान्य से अधिक हो जाता है, इस स्थिति को ही डायबिटीज कहा जाता है।  इंसुलिन एक हार्मोन है जो पाचक ग्रन्थि द्वारा बनता है और जिसकी जरुरत भोजन को एनर्जी बदलने में होती है। इस हार्मोन के बिना हमारा शरीर शुगर की मात्रा को नियंत्रित नहीं कर पाता है, इस स्थिति में हमारे शरीर को भोजन से ऊर्जा लेने में काफी कठिनाई होती है। जब ग्लूकोज  का बढ़ा हुआ लेवल हमारे रक्त में लगातार बना रहता है तो यह शरीर के कई अंगो को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है, जिसमे आँखे, मस्तिष्क, हृदय, धमनियां और गुर्दे प्रमुख हैं।  

आयुर्वेद है मददगार 

वैसे तो डायबिटीज का प्रबंधन बहुत कठिन है, लेकिन निश्चित रूप से असंभव भी नहीं है। जीवनशैली में कुछ बदलाव आपको शुगर लेवल को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। वास्तव में, आयुर्वेद मधुमेह को प्रबंधित करने और रक्त शर्करा के स्तर पर नियंत्रित रखने का दावा करता है। आइए इस लेख में हम आपको बता रहे हैं टाइप 2 डायबिटीज को नियंत्रित रखने का तरीका। 

डायबिटीज का आयुर्वेदिक उपचार 

  • एक गिलास पानी में 10 तुलसी के पत्ते, 10 नीम के पत्ते और 10 बेल्टप्रास का अर्क निकाल कर मिला लीजिए और उसे खाली पेट पी लें। 
  • जमुन के बीज मधुमेह के लिए आयुर्वेदिक औषधि है। खाली पेट पर हर सुबह एक गिलास पानी और एक चम्मच जामुन बीज पाउडर लें।
  • कफ को कम करने के लिए, आपको कफ-शांति आहार का सेवन करना चाहिए, विशेष रूप से मिठाई, कार्बोहाइड्रेट और डेयरी उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए, और अधिक मात्रा में ताजा सब्जियां और कड़वी जड़ी बूटियों का सेवन करना चाहिए। 
  • रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने का एक और तरीका हल्दी है। अपने दैनिक आहार में हल्दी जोड़ें।
  • 14-28 मिलीलीटर तक बेल के पत्ते का रस। 5 से 10 ग्राम के शहद के साथ दिन में तीन बार लिया जा सकता है। यह मधुमेह मेलिटस के लिए एक फायदेमंद उपाय है।
  • मधुमेह के उपचार के लिए निश्चित रूप से मेथी दाना फायदेमंद हो सकता है। आप मेथी दाना हर सुबह पानी में भिगो कर उसका पानी पीएं। मेथी पाउडर का सेवन कर सकते हैं। 
  • अदरक चाय पाचन को उत्तेजित करने में मदद करता है जो आपके सिस्टम में अतिरिक्त कफ को कम करने में फायदेमंद है।

यदि आप मधुमेह हैं, तो प्रमाणित आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से मिलना बुद्धिमानी है जो आपको इस स्थिति से निपटने में मदद कर सकता है।

डायबिटीज में कैसा हो आहार 

हम आपको बता रहे हैं डायबिटीज की समस्‍या होने पर आपका आहार कैसा होना चाहिए।

ब्राउन राइस

डायबिटीज के रोगी को अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन नुकसान देता है। सफेद चावलों में कार्बोहाइड्रेट ज्‍यादा मात्रा में होता है। इसलिए मधुमेह से ग्रस्‍त व्‍यक्ति को अपने भोजन में ब्राउन राइस के साथ ही गेहूं के आटे की रोटियां खानी चाहिए।

दाल

दोपहर के भोजन में अलग-अलग तरह की दालों का सेवन डायबिटिक को फायदा पहुंचाता है। दालों में प्रोटीन और फाइबर उचित मात्रा में होता है। प्रोटीन से शरीर का मजबूती मिलती है और आपको थकान नहीं होती।

सब्जियों का सेवन

डायबिटीज के रोगी को भोजन में सब्जियों का ज्‍यादा से ज्‍यादा सेवन करना चाहिए। खासकर करेला, मेथी-पालक का साग और लौकी की सब्‍जी ब्‍लड शुगर को बढ़ने से रोकती है। नीम का जूस भी मधुमेह की समस्‍या में राहत देता है।

बादाम

अगर आप बादाम का सेवन या बादाम के तेल में पका हुआ खाना खाते हैं तो यह भी डायबिटीज के रोगी के लिए अच्‍छा रहता है। बादाम हृदय रोग के खतरों को कम करने के साथ ही इन्‍सुलिन की मात्रा को सही रखता है और ब्‍लड शुगर को नियंत्रित करता है।

ओटमील

कई अध्‍ययनों से साफ हो चुका है कि साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर आहार का सेवन करने से डायबिटीज का खतरा 35 से 42 फीसदी तक कम हो जाता है। साबुत अनाज के सेवन से ब्‍लड शुगर नियंत्रित रहती है।

इसे भी पढ़ें: डायबिटीज के कारण खो सकती है आपकी याददाश्त, जानिए कैसे होता है असर 

मछली

मछली ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर होती है। मछली का सेवन हृदय रोग के साथ ही डायबिटीज में भी फायदेमंद होता है। हफ्ते में दो बार मछली खाने से शरीर में गुड कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है।

फैट रहित दही

फैट रहित दही में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है। तेजी के साथ बढ़ने वाली ब्‍लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए दही का सेवन लाभकारी होता है। अध्‍ययनों से भी यह साफ हो चुका है कि खाने में कैल्शियम की ज्‍यादा मात्रा लेने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम होता है।

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