मलेरिया बुखार को न करें नजरअंदाज, जानें लक्षण और उपचार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 25, 2018
Quick Bites

  • गंभीर अवस्था में दिमागी (सेरीब्रल) मलेरिया होता है। 
  • इसमें रोगी बेहोश होता है और कोमा में भी जा सकता है। 
  • गर्भवती महिलाओं में मलेरिया का संक्रमण गर्भपात का कारण भी बन सकता है। 

बरसात के मौसम की अपनी खासियतें हैं। इस मौसम का भरपूर मजा लें, लेकिन सेहत के प्रति सजग होकर। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस मौसम में मलेरिया और वायरल फीवर के मामले कुछ ज्यादा ही बढ़ जाते हैं। आइए जानते हैं कि इनसे सेहत को कैसे सुरक्षित रखा जाए...  

मलेरिया  

मलेरिया मादा एनोफिलीज नामक मच्छर के काटने से फैलता है। मच्छर के काटने से  प्लाज्मोडियम नामक जीवाणु शरीर में चला जाता है और वह रोगी के शरीर में कई गुना वृद्धि (मल्टीप्लाई) करता है। यह जीवाणु लिवर और रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करकेरोगी को बीमार करता है। समय पर इलाज न होने की स्थिति में यह मर्ज जानलेवा हो सकता है। 

 

जानें लक्षणों को 

  • तेज बुखार जो ठंड और कंपकंपी के साथ आता है। 
  • सिर में तेज दर्द होना एवं मांसपेशियों में दर्द। 
  • कमर में दर्द होना। 
  • उल्टी आना और उल्टी की इच्छा हमेशा बनी रहना। 

 

गंभीर बीमारी में लक्षण 

  • पीलिया होना। 
  • पेशाब कम होना। 
  • बेहोश होना। 
  • दौरे आना। 
  • सांस लेने में तकलीफ होना। 

 

मर्ज की जटिलताएं 

  • गंभीर अवस्था में दिमागी (सेरीब्रल) मलेरिया होता है। इसमें रोगी बेहोश होता है और कोमा में भी जा सकता है। 
  • मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति किडनी, लिवर और लंग्स फेल्यर की स्थिति में भी जा सकते हैं। 
  • गर्भवती महिलाओं में मलेरिया का संक्रमण गर्भपात का कारण भी बन सकता है। 
  • सही उपचार न होने पर मलेरिया बार-बार हो सकता है जिसे रिलेप्स मलेरिया कहते हैं। रिलेप्स दो से छह माह में होता है। मलेरिया के जीवाणु लिवर में भी जीवित रह सकते हैं। 

 

डायग्नोसिस 

  • मलेरिया का निदान ब्लड टेस्ट के द्वारा किया जाता है।                                                    
  • रोगी के रक्त से स्लाइड बनाकर प्रशिक्षित डॉक्टर माइक्रोस्कोप के द्वारा प्लाज्मोडियम नामक पैरासाइट की जांच करते हैं। 
  • आजकल अत्याधुनिक तकनीक के द्वारा एंटीजेनरेपिड कार्ड टेस्ट से मलेरिया की डायग्नोसिस कुछ ही मिनटों में की जा सकती है। 

 

इलाज के बारे में 

समुचित इलाज न करने या लापरवाही बरतने पर मलेरिया जानलेवा हो सकता है। देश में हर साल हजारों लोग मलेरिया के संक्रमण से मर रहे हैं। इसलिए लक्षणों के प्रकट होते ही रोगी को शीघ्र ही डॉक्टर के पास ले जाकर जांच करवाएं। शीघ्र ही डायग्नोसिस औरइलाज से मलेरिया से होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है। मलेरिया में कई तरह की दवाओं का उपयोग होता है।

सबसे कारगर और डब्लूएचओ द्वारा मान्यता प्राप्त फस्र्ट लाइन दवा है- आर्टीमीसाइन कॉम्बिनेशन थेरेपी। यह दो दवाओं का मिश्रण है जो न केवल मलेरिया के रोगी को ठीक करती है बल्कि मलेरिया के रिलेप्स होने और इसे दूसरे व्यक्ति में फैलने से भी रोकती है। इसके अलावा क्लोरोक्वीन और सल्फा ड्रग आदि का भी इस्तेमाल होता है। बुखार उतारने के लिए पीड़ित व्यक्ति को पैरासिटामोल दें और शरीर में पानी की कमी को रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थ दें। 

 इसे भी पढ़ें:  कैसा हो मलेरिया में खान-पान

बेहतर है बचाव 

  • मच्छरों को पनपने से रोकें। इसके लिए अपने आसपास सफाई का ध्यान रखें। 
  • मच्छर ठहरे हुए पानी में पनपते हैं। इसलिए बारिश के पहले ही नालियों की सफाई करवाएं और गड्ढे आदि भरवाएं। 
  • अगर जल निकास संभव न हो तो कीटनाशक डालें। 
  • बारिश के दिनों में मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। जैसे पूरी बाजू का कुर्ता और पायजामा आदि। 
  • मच्छर भगाने वाली क्रीम और स्प्रे का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। 
  • इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जाना जरूरी है। यह कार्य सरकारी तंत्र के अलावा डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ अच्छी तरह से कर सकता है। 
  • मलेरिया से बचाव का कोई टीका (वैक्सीन) अभी तक उपलब्ध नहीं है, पर इस पर अनुसंधान जारी है। 
  • मलेरिया बहुल इलाकों में जाने वाले व्यक्तियों को सलाह दी जाती है कि वे कुछ सप्ताह या कुछ महीनों तक डॉक्टर की सलाह से मलेरिया से बचाव के लिए कुछ दवाएं ले सकते हैं। 

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