जालंधर बंध योग करने की विधि और 8 फायदे

जालंधर बंध योग करने से सेहत को कई फायदे होते हैं। योगाचार्य से जानते हैं इस योग को करने की विधि और इसके दौरान बरतने वाली सावधानी।

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Jul 07, 2021Updated at: Jul 07, 2021
जालंधर बंध योग करने की विधि और 8 फायदे

जालंधर बंध योग (jalandhara bandha yoga) को इंग्लिश में चिन लॉक (chin lock) भी कहा जाता है। ये दो शब्दों से मिलकर बना है जाल और धर, जाल का मतलब है नेट यानी नाड़ी का नेट और धर का अर्थ है तरल का रुका यानी नाड़ियों में जो तरल बह रहा है उसकी रुकावट। वहीं बंध का मतलब है किसी चीज को बंध करना या टाइट करके रखना। इस योग को करने से सेहत को बहुत फायदे (jalandhara bandha yoga benefits) होते हैं। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि जालंधर बंध योग के क्या फायदे हैं। साथ ही इसे करने की विधि (steps of Jalandhar bandh) और इसके दौरान बरतने वाली सावधानियां भी जानेंगे। इसके लिए हमने आरोग्य योगशाला, नोएडा के योगाचार्य अभिषेक भारती (Yogacharya Abhishek Bharti) से भी इनपुट्स मांगे। इस लेख में इस्तेमाल की गई फोटो आरोग्य योगशाला की योगाचार्य माला द्वारा पेश की गई हैं। पढ़ते हैं आगे...

 

जालंधर बंध योग करने का की विधि (steps of Jalandhar bandh)

1 - सबसे पहले व्यक्ति जमीन पर योग मेट बिछाएं और उस पर व्रजासन या सुखासन की अवस्था में बैठ जाएं।

2 - अब कमर को सीधा कर घुटनों पर हथेलियों को रखें। 

3 - अब अपने कंधों को ऊपर उठाएं और आंखों को बंद रखें। 

4 - अब धीरे-धीरे सांस लें और थोड़ी देर सांस को रोककर अपनी कमर को सीध में रखें और शरीर को आगे की तरफ झुकाएं। 

5 - अब सिर और गर्दन को झुका कर ठोड्डी को छाती तक छुवाएं। 

6  - इस दौरान अधिक बल लगाने की कोशिश ना करें। 

7 - जब तक आप सांस रोकेंगे तब तक इस अवस्था में रहें। 

8 - उसके बाद धीरे-धीरे सांस को छोड़कर पुरानी अवस्था में आएं। 

9 - इसके बाद कुछ सेकेंड तक आराम करें। फिर से इसी प्रक्रिया को दोहराएं।

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जालंधर बंध योग करने के दौरान बैठने वाली सावधानी

1 - अगर आप हाई ब्लड प्रेशर या दिल के रोगी हैं तो इस आसन को ना करें।

2 - कोई व्यक्ति चक्करों की समस्या से ग्रस्त है तो वह भी इस मुद्रा को ना करें।

3 - जो लोग पीठ का दर्द, दिल की तेज धड़कन आदि से परेशान हैं वे भी इस योग को ना करें।

4 - जो लोग सर्वाइकल की समस्या के शिकार हैं वे भी इस योग को ना करें।

5 - जो लोग सांस संबंधित परेशानी का सामना कर रहे हैं वे भी इस योग को ना करें।

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जालंधर बंध योग करने से होने वाले फायदे

1 - कूल्हे की मांसपेशियां को मजबूती मिलती है। बता दें कि यह योग न केवल मन को शांत रख सकता है बल्कि कूल्हे की मांसपेशियों में लचीलापन भी लाता है।

2 - जो लोग इस योग को करते हैं उनके रक्त संचार में सुधार होता है। साथ ही शरीर की कोशिकाओं में पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचता है।

3 - इस योग को करने वाले हृदय रोग से बचाव कर सकते हैं।

4 - जो लोग गले की समस्याओं से परेशान है, वह इस मुद्रा में बैठने से अपनी समस्या को दूर कर सकते हैं। यह मुद्रा गले में बलगम, टॉन्सिल्स आदि समस्याओं से राहत पहुंचा सकती है।

5 - इस मुद्रा से रीढ़ की हड्डी को मजबूती मिलती है। साथ ही यह शरीर में रक्त संचार को तेज कर सकता है।

6 - इस योग को करने से गले की मांसपेशियां उत्तेजित होना शुरू हो जाती हैं। साथ ही थायराइड फंक्शन के कार्य में सुधार आ सकता है।

7 - इस मुद्रा से व्यक्ति तनाव से दूर रहता है। साथ ही मानसिक समस्याएं जैसे चिंता, क्रोध आदि से भी छुटकारा पा सकता है।

8 - जो लोग थायराइड की समस्या से ग्रस्त हैं वे अपनी समस्या को कंट्रोल करने के लिए जालंधर बंध योग कर सकते हैं। 

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि जालंधर बंध योग सेहत के लिए बेहद उपयोगी है। लेकिन शुरुआत में इस योग को करने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है। ऐसे में वे अपनी एक्सपर्ट की सलाह पर या उनकी देखरेख में इस योग को करें। इसके अलावा इस योग को करने से पहले जरूरी सावधानियां पर नजर डालें।

ये लेख आरोग्य योगशाला, नोएडा के योगाचार्य अभिषेक भारती (Yogacharya Abhishek Bharti) द्वारा दिए गए इनपुट्स पर बनाया गया है। 

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