Fri Sep 11, 2026 | 07:39 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

क्‍या पाम ऑयल हार्ट हेल्‍थ के ल‍ि‍ए वाकई नुकसानदायक है? र‍िसर्च और एक्‍सपर्ट से जानें सच

पाम ऑयल को ताड़ का तेल भी कहा जाता है। इसे पाम एलएईस गुइनीन्‍स‍िस नाम के पेड़ के फल की लुगदी से न‍िकाला जाता है। इस तेल का रंग लाल होता है। इसमें बीटा कैरोटीन की ज्‍यादा होती है, जो क‍ि व‍िटाम‍िन ए का एक रूप है। कुछ लोग मानते हैं यह हार्ट के ल‍िए अच्‍छा नहीं होता। जानते हैं क्‍या यह वाकई नुकसानदायक है?

पाम ऑयल एक प्रकार का वनस्‍पत‍ि तेल है। यह सस्‍ता होता है, आसानी से म‍िल जाता है और लंबे समय तक खराब नहीं होता इसल‍िए इसका इस्‍तेमाल बहुत ज्‍यादा मात्रा में होता है। पाम ऑयल से कंपन‍ियां ब‍िस्‍क‍िट, चॉकलेट, ब्रेड, नूडल्‍स, स्नैक्स, चिप्स, आइसक्रीम और कई पैक्‍ड फूड्स बनाती हैं। यह साबुन, कॉस्‍मेटि‍क्‍स, ड‍िटर्जेंट और बायोडीजल बनाने मे भी इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। पाम ऑयल में सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्‍यादा होती है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट भी मौजूद होते हैं। पाम ऑयल में व‍िटाम‍िन ई और एंटीऑक्‍सीडेंट्स भी पाए जाते हैं जो शरीर की कोश‍िकाओं को नुकसान पहुंंचाते हैं। कुछ लोग ऐसा मानते हैं क‍ि पाम ऑयल का सेवन करने से हार्ट को नुकसान पहुंचता है। क्‍या वाकई ऐसा है? एक्‍सपर्ट और र‍िसर्च से समझते हैं क्‍या है सच?

पाम ऑयल और हार्ट हेल्‍थ पर WHO की राय

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WHO Report में बताया गया है क‍ि पाम ऑयल का सेवन करने से एलडीएच कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ सकता है। र‍िपोर्ट में यह भी बताया गया है क‍ि पाम ऑयल का सेहत पर असर केवल उसके फैटी एस‍िड प्रोफाइल पर न‍िर्भर नहीं करता, बल्‍क‍ि यह भी जानना जरूरी है क‍ि आपकी डाइट में कुल म‍िलाकर क‍ितनी मात्रा में फैट है और आपकी डाइट कैसी है? र‍िपोर्ट यह सुझाव देती है क‍ि सेहत के ल‍िए केवल एक तेल पर न‍िर्भर होने के बजाय संपूर्ण आहार पैटर्न को ध्‍यान में रखना चाह‍िए। संतुल‍ित आहार और कम ट्रांस फैट, हार्ट रोग के जोख‍िम को कम करने के ल‍िए खास माना जाता है। WHO की र‍िपोर्ट में पाम ऑयल के खतरों पर म‍िक्‍स र‍िव्‍यू द‍िया है। र‍िपोर्ट में यह कहा गया है क‍ि इससे कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ता है और इस बात को भी उजागर क‍िया है क‍ि इसका असर सीम‍ित है।

यह भी पढ़ें- पाम ऑयल क्या है? जानें सेहत के लिए क्यों माना जाता है इसे खतरनाक

हार्ट हेल्‍थ के ल‍िए पाम ऑयल को सीमि‍त मात्रा में इस्‍तेमाल करें

National Library Of Medicine की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, सैचुरेटेड फैट, शरीर के ल‍िप‍िड प्रोफाइल पर बुरा असर डालता है। इससे ब्‍लड में टोटल कोलेस्‍ट्रॉल और बैड कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ सकता है। स्‍टडी में यह भी बताया गया है क‍ि पाम ऑयल में मोनोअनसैचुरेटेड फैट होता है जो सेहत के ल‍िए अच्‍छा नहीं माना जाता है।

Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow ने बताया क‍ि पाम ऑयल को अगर हेल्‍दी डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएंगे, तो यह हार्ट की बीमारी का खतरा नहीं बढ़ने देगा। ऐसा नहीं है क‍ि अगर लोग पाम ऑयल की जग‍ह दूसरे ऑयल्‍स जैसे ऑल‍िव ऑयल का इस्‍तेमाल करेंगे, तो नुकसान नहीं होगा। द‍िल की बीमारी से बचने के ल‍िए सीम‍ित मात्रा में पाम ऑयल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं, लेक‍िन इसे रोज की डाइट का ह‍िस्‍सा नहीं बना सकते, वरना यह हार्ट हेल्‍थ को खराब कर सकता है।

न‍िष्‍कर्ष:

WHO र‍िपोर्ट और National Library Of Medicine की स्‍टडी के आधार पर पता चलता है क‍ि पाम ऑयल का ज्‍यादा सेवन करने से टोटल कोलेस्‍ट्रॉल और बैड कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा बढ़ सकती है। इसे पूरी से हार्ट के ल‍िए नुकसानदायक नहीं बताया गया है। Dietitian Smita Singh की मानें, तो इसे रोज की डाइट का ह‍िस्‍सा नहीं बना सकते, हालांक‍ि सीमि‍त सेवन से हार्ट को ज्‍यादा नुकसान होने की आशंका कम होती है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Yashaswi Mathur
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