Fri Sep 11, 2026 | 09:09 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

रोजाना म‍िनरल वॉटर पीना सेहत के ल‍िए सुरक्षि‍त है? एक्‍सपर्ट से जानें

क्‍या आप भी रोजाना म‍िनरल वॉटर पीना चाहते हैं? म‍िनरल वॉटर में बेशक कैल्‍श‍ियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्‍व पाए जाते हैं, लेक‍िन इसे रोज पीने से सेहत को फायदा होगा या नुकसान? एक्‍सपर्ट से जानें सही जवाब।

कई लोग म‍िनरल वॉटर पीने के शौकीन होते हैं। मेरे पापा की बुआ जब भी अपने शहर से हमारे घर आती थीं, उनके साथ म‍िनरल वॉटर की बोतलोंं से भरा पूरा बॉक्‍स साथ आता था। वह केवल म‍िनरल वॉटर ही पीती थींं। कई लोग जो फील्‍ड पर पूरा द‍िन काम करते हैं और बोतल को साथ नहीं रख सकते हैं उन्‍हें भी अच्‍छी सेहत के ल‍िए द‍िनभर म‍िनरल वॉटर का सेवन करना पड़ता है। ऐसे में लोगों के मन में अक्‍सर यह सवाल आता है क‍ि क्‍या म‍िनरल वॉटर का सेवन रोजाना करना सुरक्ष‍ित है? अकादमिक प्रकाशक स्प्रिंगर नेचर (Springer Nature) की एक स्‍टडी के मुताबि‍क, म‍िनरल वॉटर से म‍िलने वाले खन‍िज सेहत के ल‍िए फायदेमंद होते हैं। ज‍िन लोगों के शरीर में कैल्‍श‍ियम या मैग्नीशियम की कमी होती है, उनके ल‍िए म‍िनरल वॉटर का सेवन फायदेमंद होता है। यह हाई बीपी की समस्‍या को कंट्रोल करने में मदद करता है। इस लेख में जानेंगे क‍ि क्‍या वाकई रोजाना म‍िनरल वॉटर का सेवन करना सही है? इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

अच्‍छी सेहत के ल‍िए केवल म‍िनरल वॉटर पर न‍िर्भर न रहें

is-it-safe-to-drink-mineral-water-daily

एक्‍सपर्ट्स मानते हैं क‍ि रोजाना म‍िनरल वॉटर का सेवन सुरक्ष‍ित होता है। Dietitian Smita Singh ने बताया क‍ि रोजाना म‍िनरल वॉटर पीने से सेहत को नुकसान नहीं होता, लेक‍िन म‍िनरल वॉटर के साथ हेल्‍दी डाइट लें और घर पर मौजूद पीने का साफ और शुद्ध पानी भी प‍िएं। केवल म‍िनरल वॉटर पर न‍िर्भर न होंं। लंंबे समय तक सेहत को बेहतर रखना है, तो हाइड्रेशन और संतुल‍ित आहार का सेवन जरूरी है, न क‍ि केवल म‍िनरल वॉटर का सेवन करने से सेहत अच्‍छी रहेगी।

यह भी पढ़ें- Fact Check: क्या RO का पानी सेहत के लिए हानिकारक होता है? जानें सच्चाई

लो सोड‍ियम म‍िनरल वॉटर चुनें

mineral-water-benefits

रोजाना म‍िनरल वॉटर का सेवन सुरक्ष‍ित होता है, लेक‍िन ऐसा म‍िनरल वॉटर चुनें जो लो सोड‍ियम वाला हो। अगर म‍िनरल वॉटर में सोड‍ियम की मात्रा ज्‍यादा होगी, तो हाई बीपी की समस्‍या हो सकती है। ऐसे पानी को न चुनें ज‍िसमें कोई फ्लेवर म‍िलाया गया हो।

यह भी पढ़ें- घर पर ही तैयार करें मिनरल वॉटर और पाएं सेहत से जुड़े कुछ खास फायदे

पीने वाले पानी का टीडीएस 75 से 150 पीपीएम होना चाह‍िए

आरओ (RO) के पानी को अक्‍सर लोग सेहत के ल‍िए फायदेमंंद मानते हैं। Dietitian Smita Singh ने बताया क‍ि आरओ के पानी से कैल्‍श‍ियम, मैग्नीशियम, सोड‍ियम और अन्‍य सॉल्‍ट न‍िकल जाते है। यही कारण है क‍ि आरओ के पानी का टीडीएस बहुत कम यानी अक्‍सर 20 से 50 पीपीएम के बीच होता है। लंंबे समय तक बहुत कम टीडीएस वाला पानी पीने से शरीर में म‍िनरल्‍स की कमी हो सकती है। इसल‍िए पहने वाले पानी का टीडीएस 75 से 150 पीपीएम होना चाह‍िए। पीने के ल‍िए आरओ और म‍िनरल वाला पानी बेस्‍ट होता है।

न‍िष्‍कर्ष:

म‍िनरल वॉटर का सेवन रोजाना कर सकते हैं, लेक‍िन केवल उस पर न‍िर्भर होना सही नहीं है। म‍िनरल वॉटर के साथ सामान्‍य पीने वाले पानी का भी सेवन करें और हेल्‍दी डाइट लें। ऐसा पानी प‍िएं ज‍िसका टीडीएस 75 से 150 पीपीएम के बीच होना चाह‍िए।

उम्‍मीद करते हैं क‍ि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इस लेख को शेयर करना न भूलें।

FAQ

  • म‍िनरल वॉटर पीने के क्‍या फायदे हैं?

    शरीर में इलेक्‍ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने के ल‍िए म‍िनरल वॉटर का सेवन फायदेमंद माना जाता है। म‍िनरल वॉटर में कैल्‍श‍ियम, मैग्नीशियम जैसे जरूरी म‍िनरल्‍स मौजूद होते हैं ज‍िससे हड्डि‍यां मजबूत बनती हैं।
  • पानी का टीडीएस क्‍या होता है?

    टीडीएस की मदद से पानी की क्वाल‍िटी, स्‍वाद और म‍िनरल कंटेंट का अंदाजा लगाया जाता है। टीडीएस के तहत पानी में मौजूद सभी म‍िनरल, लवण और धातुओं की कुल मात्रा को जाना जा सकता है।
  • पीने के पानी का टीडीएस क‍ितना होना चाह‍िए?

    पीने के पानी का टीडीएस 75 से 150 पीपीएम के बीच होना चाह‍िए। इस रेंज पर स्‍वाद और म‍िनरल का बैलेंस सेहत के ल‍िए अच्‍छा माना जाता है। 

Read Next

कितनी अदरक सेहत के लिए बहुत ज्यादा है? एक्सपर्ट से जानें एक दिन में कितनी अदरक खाएं?

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jan 22, 2026 13:26 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jan 22, 2026 13:26 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jan 22, 2026 13:26 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content