स्क्रीनिंग और मैमोग्राफी का महत्व

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 18, 2014
Quick Bites

  • मैमोग्राफी से अत्यंत छोटे ट्यूमर या गांठ का पता शुरुआती अवस्था में ही चल जाता है।
  • मैमोग्राफी से महिलाओं में किसी भी प्रकार की स्तन की बीमारी की पहचान की जा सकती है।
  • महिलाओं को अगर उनके स्तन में किसी प्रकार का बदलाव दिखाई देता है।
  • जो महिलाएं मोटी होती हैं या जो महिलाएं चिकनाई युक्त आहार का सेवन करती हैं। 

जीवनशैली में आए बदलाव के कारण महिलाएं तेजी से स्तन कैंसर की चपेट में आ रही हैं। स्तन में किसी प्रकार की गांठ महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और मैमोग्राफी करवाएं। स्तन संबंधी हर परेशानी कैंसर नहीं होती है। ऐसी परेशानियां मासिक में बदलाव या फिर हार्मोनल डिसबैलेंस से भी हो सकती हैं। अत: डरे नहीं इसकी जांच के लिए किसी विशेषज्ञ से मिलें।

risk of breast cancerशहरों में गांव से ज्यादा स्तन कैंसर के मामले पाए गए हैं। इसका कारण शहरी महिलाओं में करियर के प्रति जागरूकता के कारण अधिक उम्र में विवाह व अधिक उम्र में बच्चे पैदा करना है। स्तनपान न कराना भी इसका एक अहम कारण है। स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए मैमोग्राफी तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इससे महिलाओं के स्तनों में होने वाले ट्यूमर का पता लगाया जाता है। पहले स्तन कैंसर की समस्या केवल उम्रदराज महिलाओं में होती थी लेकिन आजकल कम उम्र की महिलाओं में भी स्तन कैंसर की आशंका तेजी से बढ़ रही है। 30 से 40 वर्ष की महिलाओं में इसका प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है। अक्सर महिलाएं स्तन कैंसर के खिलाफ जागरुक नहीं रहती हैं और वे इनके लक्षणों को जान नहीं पातीं हैं और जब तक स्तन कैंसर का पता चलता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। यही कारण है कि आज की तारीख में बहुत बड़ी संख्या में युवतियां इस कैंसर का शिकार हो रही हैं।

क्या है मैमोग्राफी तकनीक

मैमोग्राफी एक विशेष तरह का टेस्ट है, जिसमें एक्स-रे के जरिए स्तन की पूरी जांच की जाती है।इस जांच में स्तन कैंसर ही नहीं, छोटी-से छोटी गांठ या ट्यूमर तक का पता शुरुआती अवस्था में ही हो जाता है। मैमोग्राफी वास्तव में साफ्ट टिशू एक्सरे है जो स्तन में पाई जाने वाली कोशिकाओं ऊतकों और दुग्ध नलिकाओं की साफ तस्वीर दिखा कर बता सकता है कि उनमें कोई गांठ है या नहीं है। कई बार महिलाओं को स्तन कैंसर होने का पता काफी बाद में चलता है और इस स्थितिमें उनका इलाज हो पाना काफी मुश्किल हो जाता है। जिन महिलाओं में इसकी पहचान शुरुआत में हो जाती है, उनका इलाज करना काफी आसान हो जाता है। इसके लिए आजकल चिकित्सक युवतियों को नियमित रूप से मैमोग्राफी करवाने की सलाह दे रहे हैं।

मैमोग्राफी की जरूरत क्यों

  • मैमोग्राफी से अत्यंत छोटे ट्यूमर या गांठ का पता शुरुआती अवस्था में ही चल जाता है।
  • मैमोग्राफी से महिलाओं में किसी भी प्रकार की स्तन की बीमारी की पहचान की जा सकती है।
  • महिलाओं को अगर उनके स्तन में किसी प्रकार का बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर के पास जरूर जाएं और जांच करवाएं।
  • जिन महिलाओं की देर से शादी होती है या वे 30 साल के बाद पहली बार गर्भ धारण करती और बच्चे को स्तनपान नहीं कराती हैं उन्हें मैमोग्राफी जरूर करानी चाहिए।
  • 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मैमोग्राफी बहुत जरूरी है क्योंकि उनमें स्तन कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है।
  • जो महिलाएं मोटी होती हैं या जो महिलाएं चिकनाई युक्त आहार का सेवन करती हैं, उन्हें खासतौर पर मैमोग्राफी करानी चाहिए।
Loading...
Is it Helpful Article?YES7 Votes 5832 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK