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प्रेगनेंसी के दौरान बीपी बढ़ने से हो सकती हैं ये 5 समस्‍याएं, डॉक्‍टर से जानें बचाव के उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान हाई बीपी से कई समस्‍याएं हो सकती है, जानें बचाव के उपाय 

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurPublished at: May 12, 2022Updated at: May 12, 2022
प्रेगनेंसी के दौरान बीपी बढ़ने से हो सकती हैं ये 5 समस्‍याएं, डॉक्‍टर से जानें बचाव के उपाय

17 मई का दिन हर साल हाइपरटेंशन डे के रूप में मनाया जाता है, इसी कड़ी में हम आपको बताने जा रहे हैं प्रेगनेंसी के दौरान हाइपरटेंशन से होने वाली परेशानी और बचाव के तरीके। प्रेगनेंसी के दौरान हाई बीपी की स्‍थ‍ि‍त‍ि अच्‍छी नहीं होती। हाई बीपी होने पर नॉर्मल ड‍िलीवरी की आशंका कम हो जाती है और बच्‍चे की ग्रोथ में भी रुकावट आ सकती है। आपको बता दें क‍ि हाई बीपी के कारण बच्‍चे को ऑक्‍सीजन और खाने की कमी हो सकती है ज‍िसकी वजह से प्रीटर्म ड‍िलीवरी भी हो सकती है और ये भी हो सकता है क‍ि आपका बच्‍चा लो बर्थ वेट के साथ पैदा हो, इस स्थि‍त‍ि से बचने के ल‍िए आपको बीपी कंट्रोल करने के ट‍िप्‍स और बीपी बढ़ने के र‍िस्‍क जान लेने चाह‍िए। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Asian Heart Institute, Mumbai के Senior Cardiologist, Dr Santosh Kumar Dora से बात की। 

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प्रेगनेंसी के दौरान बीपी बढ़ने के र‍िस्‍क (Risks with high BP during pregnancy)       

1. श‍िशु के व‍िकास में रुकावट (Slow growth in baby)

प्रेगनेंसी के दौरान मां का बीपी बढ़ना अच्‍छी स्थ‍ित‍ि नहीं मानी जाती। अगर आपका बीपी बढ़ा हुआ रहता है तो आपको कई तरह की शारीर‍िक समस्‍याएं जैसे घबराहट होना, चक्‍कर आना या शरीर में दर्द होना तो महसूस होगा ही साथ आपके होने वाले बच्‍चे की ग्रोथ भी रुक सकती है और जन्‍म के बाद उसे कई तरह की शारीर‍िक समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस स्‍थ‍ित‍ि से बचने के ल‍िए आप बीपी कंट्रोल करने के उपाय जरूर अपना लें।   

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2. प्रीटर्म बर्थ (Preterm birth)

अगर प्रेगनेंसी के पहले या 20वे हफ्ते से पहले आपका बीपी यानी ब्‍लड प्रेशर 140/90 एमएम एचजी हो तो उसे क्रॉन‍िक हाइपरटेंशन की स्‍टेज कहते हैं ज‍िसमें श‍िशु का जन्‍म समय से पहले भी हो सकता है और बाद में श‍िशु के व‍िकास में बाधा आ सकती है।  

3. स‍िजेर‍ियन ड‍िलीवरी (Cesarean delivery)

अगर आपका बीपी हाई है तो हो सकता है डॉक्‍टर आपको सामान्‍य ड‍िलीवरी की सलाह न दें तो इस स्‍थ‍ित‍ि में आपको स‍िजेर‍ियन यानी ऑपरेशन के जर‍िए ड‍िलीवरी करनी पड़ सकती है। स‍िजेर‍ियन ड‍िलीवरी की सलाह डॉक्‍टर नहीं देते पर हाई बीपी की स्‍थ‍िति‍ में मां का शरीर नॉर्मल ड‍िलीवरी के ल‍िए तैयार नहीं होता इसल‍िए ऑपरेशन क‍िया जा सकता है।  

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4. मस्‍त‍िष्‍क को नुकसान पहुंचाता है हाइपरटेंशन 

प्रेगनेंसी में अगर आपको हाई बीपी की समस्‍या है तो बच्‍चे के मस्‍त‍िष्‍क को नुकसान पहुंच सकता है। ये स्‍थि‍त‍ि मां और बच्‍चे दोनों के ल‍िए हान‍िकारक मानी जाती है। ड‍िलीवरी के बाद भी बीपी बढ़ सकता है ज‍िसे पोस्‍टपार्टम प्रीक्‍लैंप्‍सिया के नाम से जाना जाता है। वहीं अचानक अगर प्रेगनेंसी के 20वे हफ्ते के बाद बीपी बढ़े तो उसे प्रीक्‍लैंप्‍सिया के नाम से जाना जाता है। इस स्‍थि‍त‍ि से बच्‍चे के मस्‍त‍िष्‍क ही नहीं बल्‍क‍ि क‍िडनी और ल‍िवर पर भी बुरा असर पड़ सकता है। ये स्‍थ‍ित‍ि प्रेगनेंसी की तीसरी त‍िमाही में आ सकती है इसल‍िए आप सावधान रहें।

5. लो बर्थ वेट की समस्‍या (Low birth weight) 

हाई बीपी के कारण होने वाले बच्‍चे का वजन सामान्‍य से कम हो सकता है ज‍िसे हम लो बर्थ वेट बेबी कहते हैं। अगर मां को प्रेगनेंसी के 20वे हफ्ते के बाद हाई बीपी की समस्‍या होती है तो उसे जेस्‍टेशनल हाइपरटेंशन कहा जाता है। ऐसा जरूरी नहीं है क‍ि हर केस में श‍िशु को नुकसान ही हो, कई केस में बच्‍चे के वजन पर बीपी बढ़ने का कोई असर नहीं होता है तो वहीं कुछ केस में जन्‍म के बाद बच्‍चे का वजन कम हो सकता है।

प्रेगनेंसी में हाइपरटेंशन से कैसे बचें? (How to prevent high BP during pregnancy) 

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  • हेल्‍दी डाइट ले, अपनी डाइट में आपको ताजे फल और सब्‍ज‍ियों को शाम‍िल करना चाह‍िए।
  • रोजाना वॉक पर जाएं, हल्‍के व्‍यायाम करें और तनाव को कम करें।
  • रोजाना कम से कम 20 म‍िनट आपको मेड‍िटेशन जरूर करना चाह‍िए।
  • हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल फॉलो करें, नींद पूरी करके उठें।
  • आपको समय-समय पर जांच करवाती रहनी चाह‍िए ताक‍ि तबीयत की जानकारी समय पर म‍िल पाए।  

प्रेगनेंसी के दौरान आप स्‍ट्रेस फ्री रहें, हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल जीएं, हेल्‍दी डाइट और एक्‍सरसाइज लें तो हाई बीपी की समस्‍या से बच सकती हैं।  

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