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ब्लड की पीएच वैल्यू कितनी होनी चाहिए? जानें इसके कम-ज्यादा होने से सेहत पर पड़ने वाले प्रभाव

शरीर में मौजूद ब्लड की पीएच वैल्यू असंतुलित होने पर कई तरह की समस्याएं और बीमारियां हो सकती हैं, जानें ब्लड का पीएच मान कितना होना चाहिए?

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: May 09, 2022Updated at: May 09, 2022
ब्लड की पीएच वैल्यू कितनी होनी चाहिए? जानें इसके कम-ज्यादा होने से सेहत पर पड़ने वाले प्रभाव

शरीर को हेल्दी और बीमारियों से मुक्त रखने के लिए शरीर के अंदरूनी अंगों का हेल्दी रहना बहुत जरूरी है। इसके अलावा शरीर के भीतर हॉर्मोन, ब्लड का स्तर और अन्य सभी चीजों का संतुलित होना जरूरी है। शरीर के अंदर कई तरह के अम्ल यानी एसिड भी मौजूद होते हैं। शरीर के भीतर मौजूद अम्ल में लेवल में असंतुलन होने पर आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ठीक इसी तरह से शरीर को बीमारियों से मुक्त और हेल्दी बनाये रखने के लिए पीएच मान (ph Value in Hindi) का संतुलित रहना बहुत जरूरी है। अगर आपने विज्ञान पढ़ा है तो रसायन विज्ञान में आपने अलग-अलग केमिकल्स और कई अन्य चीजों के पीएच मान के बारे में जरूर पढ़ा होगा। कई लोगों को पानी के पीएच वैल्यू के बारे में जानकारी भी होगी। जिस तरह से पानी की पीएच वैल्यू 7 होनी चाहिए ठीक उसी तरह से शरीर और शरीर के भीतर मौजूद ब्लड की पीएच वैल्यू का भी संतुलित होना जरूरी है। आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं क्या होता है पीएच वैल्यू और ब्लड का पीएच वैल्यू कितना होना चाहिए?

क्या होता है पीएच मान? (What is ph Value in Hindi?)

इस दुनिया में मौजूद सभी रासायनिक तत्वों से बनी चीजों का एक पीएच मान होता है। बाबू ईश्वर शरण हॉस्पिटल के सीनियर फिजिशियन डॉ समीर कहते हैं कि अगर किसी भी चीज की पीएच वैल्यू सामान्य से अधिक या कम होता है तो उसमें अम्लीयता या क्षारीयता कम या ज्यादा हो सकती है। पीएच वैल्यू का मतलब होता है पॉवर ऑफ हाइड्रोजन। इसे आप आसान भाषा में हाइड्रोजन की शक्ति भी कह सकते हैं। इसका मतलब यह है कि अगर किसी भी चीज का पीएच मान 1 यह 2 है तो वह ज्यादा अम्लीय (Acidic) है और यही पीएच वैल्यू 13 या 14 है तो इसका मतलब वह अधिक क्षारीय (Alkaline) है। इसके अलावा किसी भी चीज का पीएच मान अगर से 7 है तो उसे न्यूट्रल यानी सामान्य माना जाता है। अगर हम अपने शरीर के स्किन के पीएच वैल्यू की बात करें तो अगर स्किन की पीएच वैल्यू 5 से कम है तो इसे एसिडिक स्किन माना जायेगा वहीं अगर यही पीएच वैल्यू 13 है तो आपकी स्किन में क्षारीय गुण मौजूद हैं। एस पी एल सोरेनसन नामक वैज्ञानिक ने एक प्रयोगशाला में रिसर्च के दौरान पीएच वैल्यू की खोज की थी। आसान भाषा में कहें तो जैसे किसी भी ध्वनि की तीव्रता मापने के लिए डेसिबल का इस्तेमाल होता है, दूरी की माप करने के लिए मीटर या किलोमीटर का इस्तेमाल होता है ठीक उसी तरह से किसी भी रासायनिक पदार्थ की अम्लीयता और क्षारीयता की माप करने के लिए पीएच वैल्यू का प्रयोग किया जाता है।

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ब्लड की पीएच वैल्यू कितनी होनी चाहिए? (Human Blood ph Range in Hindi)

शरीर में मौजूद ब्लड की पीएच वैल्यू असंतुलित होने पर आपका ब्लड कम अधिक अम्लीय या क्षारीय हो सकता है। ब्लड का पीएच मान 7.35 से लेकर 7.45 होना चाहिए। इससे कम या ज्यादा होने पर इसे असंतुलित माना जाता है। अलग-अलग ब्लड ग्रुप के आधार पर इसका पीएच मान भी अलग-अलग हो सकता है। किसी भी तरह की बीमारी या समस्या होने पर ब्लड का पीएच मान बदल सकता है। जब हमारे ब्लड का पीएच मान सामान्य रहता है तो इससे हमारे शरीर के आंतिरक अंग भी सही ढंग से काम करते हैं।

ब्लड का पीएच मान असंतुलित होने पर होने वाली परेशानियां (Human Blood ph Range Effects)

जब शरीर में बीमारियां होने पर खून की जांच की जाती है तो उसका आधार पीएच वैल्यू ही होता है। ब्लड का सामान्य पीएच मान 7.35 होना चाहिए लेकिन जब आपको किसी तरह की बीमारी या सेहत से जुड़ी कोई समस्या होती है तो इसकी वैल्यू कम या ज्यादा हो सकती है। ब्लड की पीएच वैल्यू कम होने पर आपको कई तरह की समस्याएं भी हो सकती हैं। डायबिटीज, किडनी से जुड़ी बीमारी, दमा और इन्फेक्शन आदि होने पर ब्लड की पीएच वैल्यू बदल जाती है। इसके अलावा बुखार, मलेरिया या डेंगू की समस्या में भी ब्लड का पीएच मान असंतुलित हो जाता है। ब्लड की पीएच वैल्यू असंतुलित होने पर आपको उल्टी और दस्त की समस्या, फेफड़ों को नुकसान, गुर्दे से जुड़ी बीमारी और यूरिन इन्फेक्शन से जुड़ी समस्या हो सकती है। 

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