Fri Sep 11, 2026 | 08:25 PM IST

फंगल इंफेक्‍शन होने पर इस्‍तेमाल करें नीम की पत्ती, जानें 5 तरीके

Use of Neem Leaves: नीम की पत्ति‍यों की मदद से फंगल इंफेक्‍शन का इलाज कर सकते हैं। पत्ति‍यों को इस्‍तेमाल करने के 5 तरीके जान लें।    

मॉनसून के द‍िनों में फंगल इंफेक्‍शन की समस्‍या आम हो जाती है। गंदगी के कारण फंगल इंफेक्‍शन शरीर के कई ह‍िस्‍सों में हो सकता है। ज‍िन लोगों को ज्‍यादा पसीना आता है उन्‍हें अक्‍सर फंगल इंफेक्‍शन हो जाता है। फंगल इंफेक्‍शन दूर करने का उपाय ढूंढ रहे हैं, तो नीम की पत्ति‍यों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। नीम को कई तरह की आयुर्वेद‍िक औषधि‍यों को बनाने में इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। नीम में एंटीफंगल और एंटीबैक्‍टीर‍ियल गुण होते हैं। फंगल इंफेक्‍शन दूर करने के ल‍िए हम नीम की पत्ति‍यों को 5 तरीकों से इस्‍तेमाल करने का तरीका जानेंगे।  

neem leaves benefits

1. नीम का पेस्‍ट- Neem Leaves Paste 

फंगल इंफेक्‍शन होने पर नीम की पत्ति‍यों का पेस्‍ट तैयार करें। इस पेस्‍ट को फंगल इंफेक्‍शन (fungal infection) वाले ह‍िस्‍से में लगा लें। जब म‍िश्रण थोड़ा सूख जाए, तो पेस्‍ट को साफ पानी की मदद से साफ कर लें। उस जगह एंटीफंगल क्रीम लगाना न भूलें। आप नीम की पत्ति‍यों  के पेस्‍ट में चंदन और एलोवेरा भी म‍िला सकते हैं। चंदन और एलोवेरा भी फंगल इंफेक्‍शन को कम करने में मदद करते हैं।  

इसे भी पढ़ें- फंगल इंफेक्शन क्यों होता है और क्या हैं इसके लक्षण? डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें इलाज और बचाव के टिप्स

2. नीम से स्नान लें- Neem Leaves Bath 

हाथ या पैर में फंगल इंफेक्‍शन होने पर नीम की पत्ति‍यों के पानी से स्नान लें। स्नान लेने के ल‍िए पानी में नीम की पत्ति‍यों (neem leaves) को डालकर 5 म‍िनट उबालें। फ‍िर पानी ठंडा होने पर उससे स्नान लें। ज‍िन लोगों को अक्‍सर फंगल इंफेक्‍शन हो जाता है उनके ल‍िए ये तरीका फायदेमंद है। नीम से स्नान लेने से पसीने की बदबू से भी छुटकारा म‍िलता है। 

3. नीम का काढ़ा- Neem Leaves Kadha  

फंगल इंफेक्‍शन होने पर नीम का काढ़ा पी सकते हैं। नीम का काढ़ा (neem kadha) बनाने के ल‍िए पत्ति‍यों को साफ करके उबाल लें। फ‍िर उसमें अदरक और काली म‍िर्च डालें। 2 म‍िनट पकाने के बाद नींबू का रस और शहद म‍िलाकर उबालें। गैस बंद करके काढ़ा छानकर पी सकते हैं। नीम की पत्ति‍यों से बने काढ़े को पीने से प‍िंपल्‍स, संक्रमण और फुंसी आद‍ि समस्‍याओं से छुटकारा म‍िलता है।    

4. नीम का तेल- Neem Leaves Oil  

  • फंगल इंफेक्‍शन होने पर नीम की पत्ति‍यों से बना तेल इस्‍तेमाल करें।
  • नीम का तेल बनाने के ल‍िए पत्तियों को साफ कर लें।
  • पत्तियों को पीसने के बाद नार‍ियल तेल म‍िलाकर पेस्‍ट तैयार करें।
  • कढ़ाई में इस म‍िश्रण को डालकर गैस चला दें। 
  • नीम की पत्तियों को जलाए बगैर गरम करना है।
  • तेल को छानकर ठंडा होने दें। 
  • शुद्ध नीम की पत्ति‍यों का तेल तैयार है।
  • इसे फंगल इंफेक्‍शन वाले ह‍िस्‍से में लगा सकते हैं। दर्द और सूजन से आराम म‍िलेगा।    

5. नीम का रस- Neem Leaves Juice 

नीम की पत्ति‍यों के रस से फंगल इंफेक्‍शन की समस्‍या दूर कर सकते हैं। नीम की पत्ति‍यों को पहले पीस लें। जब पेस्‍ट तैयार हो, तो छन्‍नी की मदद से रस को अलग कर लें। नीम की पत्ति‍यों के रस के साथ हल्‍दी म‍िलाएं। हल्‍दी की मदद से भी संक्रमण का इलाज क‍िया जाता है। नीम और हल्‍दी का कॉम्‍ब‍िनेशन फंगल इंफेक्‍शन के ल‍िए फायदेमंद माना जाता है। नीम की पत्ति‍यों के रस में चुटकी भर हल्‍दी म‍िलाकर, संक्रमण वाले ह‍िस्‍से में लगाकर छोड़ दें। आधे घंटे बाद साफ पानी से त्‍वचा को धोकर सुखा लें। फ‍िर एंटीफंगल क्रीम लगा लें।   

नीम की पत्ति‍यों के 5 आसान प्रयोग से आप फंगल इंफेक्‍शन का इलाज कर सकते हैं। अगर इंफेक्‍शन तेजी से फैलता हुआ नजर आए, तो डॉक्‍टर की सलाह लेना न भूलें। 

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 02, 2022 11:51 IST

    Published By : Yashaswi Mathur

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