एडीएचडी सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों की कैसे करें देखभाल, जानें एक्सपर्ट की राय

भारत में पिछले कुछ समय में लाखों बच्चे एडीएचडी सिंड्रोम का शिकार हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारत के 12% से ज्यादा बच्चे एडीएचडी सिंड्रोम का शिकार पाए गए हैं। ये एक ऐसा सिंड्रोम है जिसमें बच्चों को ध्यान लगाने में परेशानी होती है और स्वभाव में उत्

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavUpdated at: Feb 24, 2019 00:00 IST
एडीएचडी सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों की कैसे करें देखभाल, जानें एक्सपर्ट की राय

भारत में पिछले कुछ समय में लाखों बच्चे एडीएचडी सिंड्रोम का शिकार हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारत के 12% से ज्यादा बच्चे एडीएचडी सिंड्रोम का शिकार पाए गए हैं। ये एक ऐसा सिंड्रोम है जिसमें बच्चों को ध्यान लगाने में परेशानी होती है और स्वभाव में उत्तेजना आ जाती है। एडीएचडी यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का शिकार ज्यादातर वो बच्चे होते हैं, जिनके घरों में झगड़े होते हैं या जो तनाव में रहते हैं। इस सिंड्रोम के कारण बच्चों की पढ़ने-लिखने और नई चीजें सीखने की क्षमता प्रभावित होती है। कई बार बड़े भी इस सिंड्रोम का शिकार होते हैं मगर ज्यादातर बच्चों में ही ये पाया जाता है।

एडीएचडी सिंड्रोम 3 प्रकार से हो सकता है

ध्यान न देना- इसके कारण बच्चे किसी भी काम में अपना ध्यान नहीं लगा पाते हैं, जिसके कारण उनकी पढ़ाई-लिखाई प्रभावित होती है।

जरूरत से अधिक सक्रियता- ऐसे बच्चे हाइपरएक्टिव होते हैं यानी छोटी-छोटी बात पर नाराज होना, रोने लगना, जिद करना आदि लक्षण नजर आते हैं।

असंतोष- ऐसे बच्चे किसी चीज से संतुष्ट नहीं होते हैं और हर समय रोते रहते हैं। उन्हें किसी भी तरह से बहलाना मुश्किल हो जाता है।

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स्कूल जाने और पढ़ने में परेशानी होती है

एडीएचडी वाले बच्चे बेहद सक्रिय और कुछ अन्य व्यवहारगत समस्याएं प्रदर्शित कर सकते हैं। उनकी देखभाल करना और उन्हें कुछ सिखाना मुश्किल हो जाता है। वे स्कूल में भी जल्दी फिट नहीं हो पाते हैं और कोई न कोई शरारत करते रहते हैं। यदि इस कंडीशन को शुरू में ही काबू न किया जाए तो यह जीवन में बाद में समस्याएं पैदा कर सकती हैं।

एडीएचडी सिंड्रोम का नहीं है कोई इलाज

एडीएचडी का कोई इलाज नहीं है, परंतु उपचार से लक्षणों को कम करने और ऐसे बच्चों की कार्यप्रणाली में सुधार के उपाय किए जा सकते हैं। कुछ उपचार विकल्पों में दवाएं, मनोचिकित्सा, शिक्षा या प्रशिक्षण या इनका मिश्रण शामिल है।

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एडीएचडी सिंड्रोम वाले बच्चों का कैसे रखें ध्यान

रूटीन सेट करें: स्पष्ट सीमाएं निर्धारित करें, ताकि हर कोई जान ले कि किस तरह का व्यवहार अपेक्षित है।

पुरस्कार और इनाम: अच्छे काम पर प्रशंसा या पुरस्कार देने से सकारात्मक व्यवहार को मजबूत किया जा सकता है. अच्छे व्यवहार को बढ़ाने के लिए आप अंक या स्टार सिस्टम का उपयोग करने की कोशिश कर सकते हैं।

चेतावनी के संकेतों पर ध्यान दें: यदि ऐसा दिखे कि बच्चा आपा खो रहा है, तो उस पर ध्यान दें और उसे किसी अन्य गतिविधि में व्यस्त कर दें।

मित्रों को आमंत्रित करें: इससे बच्चे को मिलने-जुलने में आसानी होगी. लेकिन यह सुनिश्चित करें कि बच्चा स्वयं पर नियंत्रण न खोए।

नींद में सुधार करें: अपने बच्चे को अच्छी नींद सोने दें. सोने के समय उसे किसी रोमांचक गतिविधि में न उलझने दें।

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