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World Mental Health Day 2022: बढ़ रहा है बुजुर्गों में अकेलेपन-अवसाद, बचाने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स

World Mental Health Day 2022: हर साल 10 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।

Ashu Kumar Das
Written by: Ashu Kumar DasUpdated at: Oct 10, 2022 13:53 IST
World Mental Health Day 2022: बढ़ रहा है बुजुर्गों में अकेलेपन-अवसाद, बचाने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स

World Mental Health Day 2022: हर साल पूरी दुनिया में 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है। कोरोना महामारी के बाद देश और दुनिया के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आठ में एक शख्स मेंटल डिसऑर्डर (mental disorder) का शिकार है। भारत में ये स्थिति और भी ज्यादा गंभीर है। हमारे देश में आज भी लोग खाना-पान, सिर दर्द जैसे चीजों के बारे में बातचीत जरूर करते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात बहुत ही कम होती है। खासकर जब बात घर के बुजुर्गों की आती है तो मानसिक स्वास्थ्य की बातों को पूरी तरह से इग्नोर किया जाता है। 

संस्था हेल्प एज इंडिया द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक 82 प्रतिशत से ज्यादा बुजुर्ग अपने परिवार के साथ रहते हैं, लेकिन अक्सर अकेलापन महसूस करते हैं। 10 से 15 प्रतिशत बुजुर्गों को ऐसा लगता है कि उनकी बातों को परिवार द्वारा नजरअंदाज किया जाता है। अपनी बातों का महत्व खत्म होते देख बुजुर्ग मानसिक तौर पर ज्यादा परेशान होते हैं। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर हम आपको बताने जा रहे हैं बुजुर्गों को अवसाद, अकेलेपन से बचाने के 5 टिप्स।

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बुजुर्गों को डिप्रेशन से कैसे बचाएं? - How to protect elderly from depression 

बातचीत करें

हर समस्या का हल है बातचीत से निकाला जा सकता है। घर के बड़े-बुजुर्ग डिप्रेशन में न आए इसके लिए उनके दिन में कम से कम 15 से 20 मिनट बातचीत करें। बुजुर्गों से बातचीत करने के दौरान मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। यदि आप अपने माता-पिता से दूर रह रहे हैं, और वे अकेले हैं, तो उनसे ज्यादा से ज्यादा बात करें। पहले यदि आप हफ्ते में दो-तीन दिन बात करते थे, तो इस वक्त रोजाना उनसे वीडियो कॉल या सामान्य कॉल के जरिए बात करें। बातचीत करने से अकेलापन दूर करने में मदद मिलती है।

मन को शांत रखें

बुजुर्गों को चूंकि किसी एक चीज से सबसे ज्यादा जूझने की ताकत मिलती है, तो वो पूजा-पाठ है। अगर आप अपने पेरेंट्स को मंदिर लेकर नहीं जा सकते हैं तो घर पर ही आध्यात्मिक चीजें करें, ताकि मन को शांति मिले।

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बैठे नहीं, एक्सरसाइज करते रहें

नोएडा स्थित मेट्रो हॉस्पिटल मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर कामिनी शर्मा का कहना है कि बुजुर्गों में अवसाद का एक मुख्य कारण घर की चार दीवारी में हमेशा बैठे रहना भी है। बुजुर्गों के लिए थोड़ी बहुत चलत-फिरत ज़रूरी है। ऐसे में उन्हें घर में ही थोड़ा-बहुत टहलने के लिए कहें। उन्हें कहें कि पार्क में जाएं।

हेल्दी डाइट पर करें फोकस

डॉक्टर का कहना है कि बुजुर्ग अक्सर ज्यादा तेल और मसाले वाला खाना पसंद करते हैं। 50 से 55 साल की उम्र के बाद जीभ का स्वाद बदलने का हर किसी का मन चाहता है, लेकिन ज्यादा मसालेदार खाना खाने से पेट और पाचन क्रिया पर बुरा असर पड़ सकता है। घर के बुजुर्गों के आहार पौष्टिक रहे ये भी सुनिश्चित करें। भोजन में अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें। 

अपने तरीके से जीने दें

अधिकतर बुज़ुर्ग दिन अपने ही तरीके से बिताना पसंद करते हैं। सुबह उठने से लेकर दिन के काम निपटाने तक हर चीज बुजुर्गों के अपने तय वक्त के अनुसार ही करना पसंद होती है। जैसे- अखबार पढ़ना, खुली हवा में टहलना, लोगों से बातचीत करना या शाम का समय साथियों के साथ बिताना। इसलिए उन्हें कभी भी किसी चीज के लिए प्रेशर न करें। 

 
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