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गर्मियों में वात, पित्त और कफ संतुलित करने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक उपाय

गर्मी के मौसम में वात, पित्त और कफ को संतुलन में रखना जरूरी होता है। जानें इसके लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Apr 27, 2022Updated at: Apr 27, 2022
गर्मियों में वात, पित्त और कफ संतुलित करने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक उपाय

How to Balance Vata Pitta Kapha: आयुर्वेद के अनुसार सभी लोगों को स्वस्थ रहने के लिए मौसम और अपनी प्रकृति के अनुसार ही अपनी जीवनशैली, खान-पान तय करना चाहिए। यह गर्मी का मौसम है, ऐसे में अपनी प्रकृति को संतुलन में रखने के लिए मौसम फल, सब्जियों का सेवन करना चाहिए। हमारा शरीर वात, पित्त और कफ से बना होता है। स्वस्थ रहने के लिए इन तीनों का संतुलन में होना जरूरी होता है। वात शरीर और दिमाग में गति को नियंत्रित करता है। पित्त चयापचय, मन और शरीर के परिवर्तनों को नियंत्रित करता है। कफ के तत्व पानी और पृथ्वी हैं। यह शरीर की संरचना, विकास और आंतरिक अंगों को नियंत्रित करता है। चलिए इस लेख में विस्तार से जानते हैं गर्मी में इन तीनों को संतुलित कैसे रखा जा सकता है। रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा से जानें-

1. वात को कैसे ठीक करें (How to Balance Vata Dosha)

वात प्रकृति के लोगों को गर्मी में सुबह के समय धूप जरूर सेंकना चाहिए। ऐसे लोग गर्मी का आनंद ले सकते हैं। लेकिन साथ में खुद को हाइड्रेट भी रखें। गर्मी में वात को संतुलन में रखने के लिए रूट वाली सब्जियों का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। वात प्रकृति के लोगों को गर्मियों में तरबूज, कच्ची सब्जियां, ब्रोकोली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, गोभी और फूलगोभी से बचना चाहिए। ये खाद्य पदार्थ पाचन तंत्र पर असर डाल सकते हैं, इससे पेट में गैस, सूजन और कब्ज की समस्या हो सकती है। वात दोष होने पर जोड़ों में दर्द होने लगता है, इसके लिए तिल के तेल से शरीर की मालिश करें। आयुर्वेद में तिल के तेल को काफी फायदेमंद माना गया है।

2. पित्त को कैसे शांत करें (How to Balance Pitta)

पित्त प्रकृति के लोगों के लिए गर्मी का मौसम नुकसान पहुंचा सकता है। पित्त दोष होने पर शरीर में गर्मी बढ़ती है, इससे त्वचा पर जलन, खुजली और दाने निकलना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पित्त को संतुलित करने का सबसे अच्छा उपाय है ठंडी तासीर के खाद्य पदार्थों का सेवन करना। साथ ही धूप, आग के सामने जाने से भी बचना चाहिए। पित्त प्रकृति के लोगों के लिए धनिया, सीताफल, कटा हुआ नारियल, एवोकाडो, खीरा, शतावरी, तरबूज, लाल दाल, मूंग और एलोवेरा का जूस काफी फायदेमंद होता है। ये खाद्य पदार्थ पित्त को संतुलित करने में सहायक होते हैं, व्यक्ति को तरोताजा रखने में मदद करते हैं। पित्त प्रकृति के लोगों को गर्म तासीर, मसालेदार भोजन से बचना चाहिए। गर्म हवा, धूप से बचें और ठंडी जगहों पर घूमने जाएं। पित्त प्रकृति के लोगों के लिए शीतली प्राणायाम करना फायदेमंद होता है।

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3. कफ को संतुलित करने के उपाय (How to Balance Kapha Dosha)

गर्मी का मौसम कफ प्रकृति के लोगों के लिए सबसे संतुलित मौसम है। इस मौसम में कफ वाले लोग ताजे फल और सब्जियां खा सकते हैं। इसमें सेब, चेरी, जामुन और अनार जैसे कसैले फलों को आहार में शामिल करें। इसके अलावा गर्मियों में कफ के लिए क्विनोआ, बासमती चावल और बीन्स जैसे अनाज भी बहुत अच्छे होते हैं। कफ उन अंगों को नियंत्रित करता है, जो कफ पैदा करते हैं। कफ वाले लोगों को गर्म भोजन, गर्म पानी पीने की सलाह दी जाती है। ठंडे और मीठे पेय खाद्य पदार्थ कफ व्यक्ति में भारीपन और सुस्ती पैदा कर सकते हैं। कफ वाले लोगों को नारियल, एवोकैडो, और पास्ता कम मात्रा में खाना चाहिए। इन्हें खाने से कफ असंतुलित हो सकता है, इससे अतिरिक्त बलगम, आलस आ सकता है। 

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गर्मी का मौसम कफ प्रकृति के अनुकूल होता है, लेकिन पित्त प्रकृति के लोगों को गर्मी के मौसम में अपना खास ध्यान देना चाहिए। स्वस्थ रखने और प्रकृति को संतुलन में रखने के लिए मौसमी फलों, सब्जियों का अधिक सेवन करें। वही अगर किसी भी प्रकृति के असंतुलन का लक्षण नजर आता है, तो तुरंत आयुर्वेदिक डॉक्टर से मिलें।

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