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क्या महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस बीमारी के कारण प्रेगनेंट होने में परेशानी आती है? जानें एक्सपर्ट से

एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की दीवार के टिशूज बढ़कर बाहर की तरफ फैलने लगते हैं। डॉक्टर से जानें क्या ये स्थिति प्रेगनेंसी में बाधा बनती है?

Monika Agarwal
महिला स्‍वास्थ्‍यWritten by: Monika AgarwalPublished at: Mar 29, 2022Updated at: Mar 29, 2022
क्या महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस बीमारी के कारण प्रेगनेंट होने में परेशानी आती है? जानें एक्सपर्ट से

एंडोमेट्रियोसिस गर्भाशय से जुड़ी बीमारी है, जिसमें गर्भाशय की दीवार बनाने वाले टिशूज असामान्य रूप से बढ़ने लगते हैं और बाहर की तरफ फैलने लगते हैं। आमतौर पर एंडोमेट्रियोसिस के कारण महिलाओं को कंसीव करने में परेशानी आती है। NCBI की रिपोर्ट के मुताबिक इंफर्टिलिटी की शिकार लगभग एक चौथाई महिलाओं के प्रेगनेंट न हो पाने का कारण एंडोमेट्रियोसिस होता है। आमतौर पर यह समस्या उन महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है जिनका कोई भी फिक्स शेड्यूल नहीं होता और जो ज्यादा तनाव लेती हैं। मदरहुड हॉस्पिटल में सीनियर आब्सट्रिशियन एंड गायनोकोलॉजिस्ट डॉ मनीषा रंजन बताती हैं कि एंडोमेट्रियोसिस ऐसा डिसऑर्डर होता है जो तब देखने को मिलता है जब एंडोमेट्रियम जैसा टिश्यू यूटरस के बाहर या शरीर के अन्य भागों तक फैलने लगता है। यह स्थिति इम्यून सिस्टम या हार्मोन्स में आने वाले बदलाव के कारण देखने को मिलती है। इसके लक्षणों में पीरियड्स के समय दर्द होना, पेल्विक पेन होना और ओवुलेशन पेन शामिल है। आइए जानते हैं इस स्थिति का फर्टिलिटी पर क्या प्रभाव पड़ता है और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है।

एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण (Endometriosis Symptoms in Hindi)

  • पीरियड्स में ज्यादा दर्द होना।
  • पेड़ू में अक्सर दर्द रहना (पेल्विक पेन) 
  • सेक्शुअल कॉन्टैक्ट के दौरान या बाद में दर्द होना
  • ओवुलेशन के समय दर्द होना
  • लोअर बैक या जांघों में दर्द होना
  • फर्टिलिटी कम होना
  • जी मिचलाना
  • आलस ज्यादा आना
  • हैवी मेंस्ट्रुअल फ्लो

एंडोमेट्रियोसिस के स्टेज (Stages of Endometriosis)

स्टेज 1:  एंडोमेट्रियोसिस की शुरुआती स्टेज में ज्यादातर महिलाओं को कोई समस्या नहीं होती है या जो समस्या होती है वो इतनी सामान्य लगती है कि उसपर उनका ध्यान नहीं जाता। इसलिए ये सबसे कम खतरनाक स्टेज मानी जाती है।

स्टेज 2: यह थोड़ी माइल्ड स्टेज होती है। जाने इस स्टेज में धीरे-धीरे कुछ अन्य लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं, जैसे- पीरियड्स में देरी, पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द आदि। 

स्टेज 3: यह मॉडरेट स्टेज होती है। इस स्टेज में किसी एक या दोनों ओवरीज में सिस्ट देखने को मिलते हैं। इसलिए इस स्टेज में आमतौर पर व्यक्ति को इतनी परेशानी होने लगती है कि उसे चिकित्सक की जरूरत पड़े।

स्टेज 4: यह सबसे ज्यादा रिस्की स्टेज होती है और इसमें गर्भाशय के बाहर कई हिस्सों में टिशूज बढ़कर पहुंच जाते हैं। किसी एक या दोनों ओवरीज पर बड़े साइज के सिस्ट देखने को मिलते हैं।

endometriosis in hindi

प्रेग्नेंसी और बच्चे पर एंडोमेट्रियोसिस के प्रभाव (Effects of Endometriosis on Pregnancy And Baby)

अधिकतर महिलाओं की नॉर्मल प्रेग्नेंसी ही होती है और किसी खास स्क्रीनिंग की जरूरत नहीं होती है। आपके डॉक्टर आपका ब्लड प्रेशर जांच सकते हैं। इस स्थिति से ग्रस्त महिलाएं निम्न समस्याएं होने के अधिक रिस्क में होती हैं : 

  • प्रेग्नेंसी के अंत में ब्लीडिंग होना
  • प्लेसेंटा प्रेविया
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी
  • बच्चे का वजन कम मिलना
  • समय से पहले बच्चे का जन्म होना

एंडोमेट्रियोसिस के फर्टिलिटी पर प्रभाव (Effect of Endometriosis on Fertility)

हालांकि यह स्थिति महिलाओं की फर्टिलिटी को प्रभावित करती है लेकिन अधिकतर महिलाएं इस स्थिति के साथ भी गर्भवती हो सकती हैं। लगभग 65-69% महिलाएं जिन्हें यह स्थिति होती है, वह बिना किसी मेडिकल हस्तक्षेप के आराम से गर्भ धारण कर सकती हैं। इस स्थिति की गंभीरता और टिश्यू का स्थान भी फर्टिलिटी को प्रभावित करता है। बहुत गंभीर स्टेज में भी नेचुरल तरह से कंसीव करना संभव है, इसलिए ज्यादा चिंता करने की बात नहीं है।

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एंडोमेट्रियोसिस का इलाज (Treatment of Endometriosis)

हार्मोनल दवाइयां- ओरल कंट्रासेप्टिव जिनमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन हो, वह ओवुलेशन को रोकने और मेंस्ट्रुअल फ्लो को कम करने में मदद करती हैं।

पेन किलर- इसमें नॉन स्टेरॉइडल एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग्स का सेवन दर्द में कुछ राहत पाने के लिए किया जा सकता है।

लेपराटोमी- यह सबसे अधिक बड़ी सर्जरी होती है जिसमें हेल्दी टिश्यू को काफी कम नुकसान पहुंचता है।

प्रोजेस्टिन जैसी दवाइयां- गोनाड्रॉपिन रिलीजिंग हार्मोन जो ओवेरियन हार्मोन प्रोडक्शन को रोक सके।

बाउल सर्जरी- अगर आंतो की दीवार के अंदर एंडोमेट्रिक टिश्यू उगना शुरू हो जाता है तो इस केस में इस सर्जरी का प्रयोग किया जाता है।

लेपरोस्कोपी- एक पतली सी ट्यूब जिसमें लेंस और लाइट होती है, को पेट की कैविटी के अंदर डाला जाता है। ऐसा एब्डॉमिनल वॉल के अंदर एक छोटा सा छेद करके किया जाता है। यह एक सर्जिकल तरीका है। ऐसा करने से डॉक्टर एंडोमेट्रियल ग्रोथ को निकाल देते हैं।

इस स्थिति से बचाव करने के लिए आपको शराब का सेवन नहीं करना चाहिए और रोजाना एक्सरसाइज करते रहना चाहिए। अगर इलाज में किसी विकल्प की खोज कर रही हैं तो ट्रेडिशनल चाइनीज मसाज और न्यूट्रीशनल थेरेपी ट्राई कर सकती हैं। लेकिन किसी भी थेरेपी या इलाज को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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