जीवन में सफलता प्राप्त करने में अपनी इंद्रियों (Senses) का कैसे करें सही इस्तेमाल? जानें मनोवैज्ञानिक से

सफलता पाने के लिए आप अपनी इंद्रियों का प्रयोग कर सकती हैं। आंख, कान, नाक, जीभ, स्पर्श बताती हैं कि आपके लिए क्या सही है। ये सेल्फ केयर करती हैं।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiUpdated at: Jul 29, 2021 11:14 IST
जीवन में सफलता प्राप्त करने में अपनी इंद्रियों (Senses) का कैसे करें सही इस्तेमाल? जानें मनोवैज्ञानिक से

सफलता पाने के लिए हम बेस्ट टीचर की तलाश में रहते हैं। हमसे कोई गलती हो गई, किसी को कुछ बुरा कह दिया, परीक्षा में फेल हो गए, नौकरी में प्रमोशन नहीं मिल रहा या किसी विकट परिस्थिति में सही निर्णय नहीं ले पाए तो खुद को नेगेटिव विचारों से घेर लेते हैं। फिर उस परिस्थिति से बाहर निकलने के लिए किसी टीचर की तलाश करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे शिक्षक हमारे शरीर में ही हैं। जी हां, हमारे नाक, कान, आंख, जीभ और त्वचा ही हमारे शिक्षक (five senses) हैं। इनके सहारे ही हम सेल्फ मोटिवेट होते हैं।

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टीएमएस माइंडफुल जीके 2 में क्लीनिकल साइकॉलोजिस्ट डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक सचिन तेंदुलकर से लेकर अक्षय कुमार तक सभी लोग गलतियां करते हैं, लेकिन उन गलतियों के आगे हार नहीं मानते। उन गलतियों से सीखते हैं। हमारे शरीर में हमारी पांच इंद्रियां हमारी परवरिश करती हैं। इंद्रियां हमें सही और गलत का आभास कराती हैं। उन इंद्रियों की सुनकर हम अपने फैसले ले सकते हैं और अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाकर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आज के इस लेख में डॉ. प्रज्ञा मलिक से जानेंगे कि हमारी इंद्रियां हमारी शिक्षक कैसे हैं और हम इनके सहारे कैसे सफलता पा सकते हैं।

इंद्रियां हमारी शिक्षक कैसे?

आप सभी के मन में यह सवाल होगा कि आखिर इंद्रिया हमारी शिक्षक कैसे हो सकती हैं। तो चिंता मत करिए डॉ. प्रज्ञा आपकी असमंजस को दूर कर रही हैं। डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि हमारे शरीर में आंख, कान, नाक, जीभ और स्पर्श से हम देखना, सुनना, स्वाद और स्पर्श महसूस करते हैं। आप जब भी किसी विकट परिस्थिति में हैं, तो इन पांचों इंद्रियों का प्रयोग करें। साथ ही आपको यह भी ध्यान देने होगा कि समुद्र की लहरें हर बार गिरती हैं तो हर बार उठती भी हैं। गिरकर नीचे ही नहीं रह जाती हैं। जीवन भी उसी तरह है परेशानियां आएंगी और चली जाएंगी। जरूरत होगी तो खुद को समझने की। 

डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि हमारी इंद्रियां (senses) ही हमारी स्ट्रेंथ हैं। हमारी शक्ति हैं। उन्होंने बताया कि हम जैसे सुनते हैं वैसा सोचते हैं। जैसा सोचते हैं वैसे विचारों पर मंथन करते हैं। जैसे विचारों पर मंथन करते हैं वैसे ही आउटकम बाहर आते हैं। इस प्रकार हमारी पांचों इंद्रियां हमारी शिक्षक बन जाती हैं। 

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सफलता पाने के लिए इंद्रियों का प्रयोग कैसे करें?

आपने यह समझ लिया है कि इंद्रियों का और आपकी सफलता का क्या रिश्ता है। तो आगे हम समझेंगे कि आखिर हम इन इंद्रियों का प्रयोग सफलता पाने के लिए कैसे करें। 

आंख, कान (देखना, सुनना)

देखना और सुनना एक दूसरे के गहरे दोस्त हैं। यह दोनों ही हमें बताते हैं कि हम क्या देख रहे हैं और हम क्या सुन रहे हैं। अब आपको क्या देखना-सुनना है, यह आपको तय करना है। अगर आप जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं तो अच्छा देखें और अच्छा सुनें। बिल्कुल गांधी जी के तीन बंदरों की तरह। बुरा न देखो, बुरा न बोलो, बुरा न सुनो।

अच्छा देखने सुनने के लिए आप मोटिवेशनल सामग्री पढ़ सकते हैं। मोटिवेशनल मूवीज देख सकते हैं। इससे होगा यह कि जब आप परेशानी में होंगे तो खुद की परिस्थितियों के अनुसार फैसले ले पाएंगे। अपनी क्षमता को समझ पाएंगे। खुद की निर्णय की क्षमता को बढ़ा पाएंगे। सबकुछ अच्छा देखने का यह मतलब भी नहीं है कि आप बुराई को नहीं देखेंगे। उसे भी देखें लेकिन उसे खुद पर हावी न होने दें। उससे आपके जीवन में रुकावट नहीं आनी चाहिए।

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जीभ (स्वाद)

कहावत है, जैसा अन्न वैसा मन। इसलिए स्वस्थ और सफल जीवन के लिए जरूरी है राइट च्वाइस ऑफ फूड। अब यह फूड च्वाइस आपके अपनी भूगोलिय परिस्थितियों पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए दक्षिण भारत का व्यक्ति सुबह  अगर नाश्ते में इडली सांभर और नारियल की चटनी खाता है तो उत्तर भारत का व्यक्ति चाय-पराठा खा सकता है। लेकिन आपके स्वास्थ्य के लिए कौन-सा कांबीनेशन बेहतर है, यह आप अपने आसपास मिलने वाले लोकल फूड से तय करेंगे। 

अब आप सोच रहे होंगे कि फूड आपकी सफलता से कैसे जुड़ा है। जी बिल्कुल जुड़ा है। हमारी खाने की आदतें हमें काम करने के लिए मोटिवेट करती हैं। सुबह-सुबह अगर आप चाय-पराठा का नाश्ता करेंगे तो दिन भर आपको नींद आएगा, आलस आएगा और आपके काम करने की क्षमता पर असर पड़ेगा। इससे आपके करियर का ग्राफ नीचे आएगा। इसलिए कहा जाता है कि सही अन्न से सही मन होता है। जब आप लो फील करते हैं तो चाय, कॉफी या दूध पीते हैं, तो इस तरह फूड हमारी सफलता का ऑक्सीजन बनता है। इस तरह स्वाद आपको सेल्फ मोटिवेड करता है।

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त्वचा (स्पर्श)

आप बहुत दुखी हैं, निराश हैं, गुस्से में हैं, किसी भी दुखदायी इमोशन में हैं तो ठंडे पानी से नहा लीजिए। सुबह की शुरूआत नहाकर करने से आपका मन फ्रेश हो जाता है। दिन भर तरोताजा महसूस करते हैं। नहाने से हमारी निराशाएं हमें दूर चली जाती हैं। तो एक ठंडे पानी का स्पर्श आपके लिए मूड फ्रेशनिंग बनकर सामने आया। आप दुखी हैं और किसी ने आपको टाइट हग (गले लगना) कर लिया तो आपको खुशी का एहसास होता है। इस तरह स्पर्श आपकी सफलता बन जाता है।  स्पर्श हमें बताता है कि हम सुरक्षित हैं। स्पर्श से हमारी होल्डिंग कैपेसिटी बढ़ती है। सेंस ऑफ सिक्योरिटी बढ़ती है। स्पर्श से हमारे भीतर आत्मविश्वास आता है। स्पर्श चिकित्सा से मानसिक शांति मिलती है।

नाक (सुगंध)

स्मेल हमें खतरे से बचाती है। कोई सूदनिंग सी स्मैल लेने के बाद हमारा माइंड रिलैक्स हो जाता है। स्मैल हमारी बाकी इंद्रियों के लिए टीचर बन जाती है। स्मैल बाकी सभी इंद्रियों को रिचार्ज करने का काम करती है। स्मेल हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

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परिणाम क्या होते हैं?

इंद्रियों को समझने के बाद उन्हें प्रयोग करने के तरीकों के बाद अब बात करते हैं कि इनके आउटकम क्या होते हैं- 

  • हमारी इंद्रियां हमारी काम करने की क्षमता बढाती हैं। 
  • इंद्रियां तनाव को बाहर निकालती हैं। 
  • इंद्रियों को सहारे हम लक्ष्य पर ध्यान लगा पाते हैं। 
  • हमारी परफोर्मेंस बढ़ती है।
  • निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। 
  • इंद्रियां इंसान को क्रिएटिव बनाती हैं। 

हमारी इंद्रियां जैसे आंख, कान, नाक, जीभ और स्पर्श ही हमारी सफलता का रास्ता हैं। इनकी सुनकर ही हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं। यह इंद्रियां ही हमें बताती हैं कि क्या अच्छा है और क्या बुरा है। इनकी सुनकर और महसूस करके आप खुद के शिक्षक बन सकते हैं। 

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