खाना पकाने और सेहत के लिए कौन सा कुकिंग ऑयल है बेस्ट? जानें डायटीशियन स्वाती बाथवाल से

खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले तेल का सीधा असर आपकी सेहत पर पड़ता है, इसलिए जानें कैसे भोजन बनाने के सही तेल का चयन करें।

Prins Bahadur Singh
Reviewed by: स्वाती बाथवालPublished at: Aug 12, 2021Updated at: Aug 12, 2021Written by: Prins Bahadur Singh
खाना पकाने और सेहत के लिए कौन सा कुकिंग ऑयल है बेस्ट? जानें डायटीशियन स्वाती बाथवाल से

आज के समय में खाना पकाने के लिए तमाम तरह के तेल मार्केट में मौजूद हैं और इस वजह से इनमें से किसी एक का चयन करना कंफ्यूजिंग होता है। खाना बनाने के लिए बाजार में वनस्पति तेल, जैतून का तेल, घी, मक्खन, एवोकैडो तेल, अखरोट के तेल समेत तमाम तरह के तेल मौजूद हैं। ऐसे में आपको यह जान लेना बहुत जरूरी हो जाता है कि इनमें से कौन सा तेल आपकी सेहत के लिए सबसे अच्छा होता है। भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले तेल और उसमें मौजूद फैट को लेकर तमाम तरह की बातें की जाती हैं। आज इस लेख में हम आपको डायटीशियन स्वाती बाथवाल द्वारा तेल या फैट से जुड़े कुछ मिथक और उनकी साइंस के बारे में बताने जा रहे हैं।

खाना पकाने के लिए कौन सा कुकिंग ऑयल बेस्ट है? (Which Cooking Oil Is Good For Cooking?)

वानस्पतिक तेल (Vegetable Oils)

खाना पकाने के लिए वानस्पतिक तेलों का इस्तेमाल सेहत के लिए फायदेमंद नहीं होता है। क्योंकि वानस्पतिक तेलों को कभी भी गर्म नहीं किया जाना चाहिए। सूरजमुखी, कैनोला, चावल की भूसी, सोयाबीन जैसे वानस्पतिक तेलों में पॉलीअनसेचुरेटेड फैट होता है जो हीट सेंसिटिव यानि गर्मी से संवेदनशील होता है। जब इन पॉलीअनसेचुरेटेड फैट को गर्म किया जाता है तो यह नाजुक वसा ट्रांस फैट नामक जहरीले यौगिक में बदल जाते हैं। ये तेल गर्मी के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं और इसलिए प्रोसेस्ड वेजिटेबल ऑयल और इनसे बनने वाले सभी उत्पादों में ट्रांस फैट पाया जाता है। इसी तरह से कैनोला ऑयल भी बहुत तेजी से खराब होता है। हमेशा इस बात को याद रखें कि प्राकृतिक खाद्य पदार्थों और तेलों में खराब फैट नहीं पाए जाते हैं बल्कि इन्हें प्रोसेस्ड करने से इनमें ट्रांस फैट जैसे सेहत के लिए हानिकारक फैट बन जाते हैं। हमें खाना पकाने के लिए ऐसे तेलों का इस्तेमाल करना चाहिए जो हीट सेंसिटिव न हों जैसे कोल्ड प्रेस्ड सरसों का तेल, मूंगफली या मूंगफली का तेल, नारियल का तेल, मक्खन या घी। इनका इस्तेमाल इसलिए किया जाना चाहिए क्योंकि इन्हें गर्म करने पर इसमें होने वाले नुक्सान का विरोध करने की क्षमता होती है और इस प्रक्रिया को ऑक्सीकरण कहा जाता है। संतृप्त वसा को गर्म करने पर उसमें ऑक्सीजन की क्षति नहीं होती है जबकि तून के तेल जैसे मोनोअनसैचुरेटेड फैट को गर्म करने पर उसमें ऑक्सीजन की क्षति हो जाती है। उदहारण के लिए अगर आप समोसा खाना चाहते हैं, तो शुद्ध घी में तला हुआ समोसा ही खाएं न कि वनस्पति तेलों में तला हुआ।

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छिपे हुए खराब फैट (Hidden Bad Fats)

बहुत सारे खाद्य पदार्थों में हिडेन बाद फैट मौजूद होते हैं जिनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं होती है। जैसे फ्रेंच फ्राइज, इसे बनाने के लिए रेस्तरां या होटल में एक बार गर्म किये हुए तेल का इस्तेमाल एक हफ्ते या उससे ज्यादा समय के लिए किया जाता है। इन तेलों को गर्म करने पर इनमें मौजूद फैट विषाक्त हो जाते हैं। यहीं नहीं वहां पर लागत को कम करने के लिए खराब क्वालिटी का तेल का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह अगर हम विनेगर के अलावा अन्य सलाद ड्रेसिंग को देखें तो इसमें वनस्पति तेल और शुगर मौजूद होते हैं। प्रोसेस्ड अनाज वाले नाश्ते भी ताजे दिखते हैं, क्योंकि वे वनस्पति तेल के साथ कोटेड होते हैं जो कि एक सुरक्षात्मक वार्निश के रूप में कार्य करता है और उत्पाद को वार्निश से दूर रखता है और इसे ताजा बनाये रखने का काम करता है। मार्जरीन जिसे नकली मक्खन भी कहा जाता है, प्लास्टिक से एक अणु दूर होता है। ये सभी ऐसे खतरनाक केमिकल्स से भरे होते हैं जो हड्डियों के विकास को नुकसान पहुंचाते हैं और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाने का काम करते हैं।

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खराब फैट के साइड इफेक्ट्स (Bad Fat Side Effects)

अगर आप खराब वसा का सेवन करते हैं तो इस वसा में घुलनशील विटामिन ए, डी, ई और के आदि का अवशोषण सही तरीके से नहीं हो पाते हैं। इसकी वजह से शरीर में पोषक तत्वों की गंभीर कमी होती है और मोताबोलिक (चयापचय) असंतुलन पैदा होता है। वानस्पतिक तेलों का सेवन करने से हार्टबर्न यानि पेट में जलन की स्थिति भी पैदा होती है। हमारा पेट भोजन की प्रतिक्रिया में एसिड छोड़ता है लेकिन वनस्पति तेलों की वजह से पेट का एसिड मेगा ट्रांस फैट बनाता है जो पेट की परत को नुकसान पहुंचाता है और हार्टबर्न का कारण बनता है। खराब तेलों का सेवन करने से न्यूरोट्रांसमीटर में दिक्कत होती है जिसकी वजह से डिप्रेशन, चिंता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इनका सेवन स्ट्रोक, माइग्रेन, उच्च कोलेस्ट्रॉल का कारण बनता है और अध्ययनों से पता चला है कि वनस्पति तेल का सेवन इमोशनल ईटिंग का कारण बन सकते हैं, जिससे हमें अधिक भोजन खाने की तलब होती है और इसकी वजह से वजन बढ़ना और मोटापे की समस्या हो सकती है।

स्वस्थ वसा (Good Fats)

डाइट में हेल्दी फैट को शामिल करना बहुत फायदेमंद होता है। जब आप हेल्दी फैट का सेवन करते हैं तो आपकी स्किन पर चमक आती है और शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण सही तरीके से हो पाता है जिसकी वजह से आपकी आंतें भी स्वस्थ होती हैं। इसके अलावा हेल्दी फैट का सेवन हार्ट, आंख के लिए फायदेमंद होता है और शरीर में हॉर्मोन का संतुलन बनाने का काम करता है। स्वस्थ वसा का सबसे अच्छा उदाहरण घी है जिसे सबसे सात्विक खाद्य पदार्थ माना जाता है, लेकिन यह सात्विक तभी तक हो सकता है जबतक इसमें किसी भी प्रकार की मिलावट न की गयी हो। घी हमारे शरीर को पोषण देने के साथ स्किन के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन ए, विटामिन डी, ओमेगा 3 और कई अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

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शरीर को फिट रखने और पर्याप्त पोषण देने के लिए गुड फैट का सेवन करना बहुत जरूरी होता है। खराब वसा या खराब तेलों का सेवन सेहत के लिए कई गंभीर समस्याएं पैदा करता है। इसके अलावा वानस्पतिक तेल जो हीट सेंसिटिव होते हैं उनका इस्तेमाल खाना पकाने में आपकी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए शरीर को स्वस्थ और फिट व बीमारियों से मुक्त रखने के लिए गुड और हेल्दी फैट का सेवन जरूर करें। 

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