Mon Oct 5, 2026 | 10:39 PM IST

मॉल में घी-तेल की चोरी करते पकड़ी गई महिला, क्या आप जानते हैं बार-बार चोरी है एक मानसिक समस्या?

आज नोएडा के मॉल में चोरी करते हुए महिला को सिक्योरिटी गार्ड्स ने रंगे हाथों पकड़ लिया। ये महिला इससे पहले भी मॉल में कई बार घी और तेल की चोरी कर चुकी थी। स्टाइलिश दिखने वाली इस महिला को बार-बार चोरी करने की आदत क्यों है? क्या इसका कारण मानसिक बीमारी क्लेप्टोमेनिया तो नहीं है?  
मॉल में घी-तेल की चोरी करते पकड़ी गई महिला, क्या आप जानते हैं बार-बार चोरी है एक मानसिक समस्या?मॉल में घी-तेल की चोरी करते पकड़ी गई महिला, क्या आप जानते हैं बार-बार चोरी है एक मानसिक समस्या?

उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर 18 के डीएलएफ मॉल में एक महिला को देसी घी और रिफाइंड तेल की चोरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। इस बारे स्टोर के कर्मचारियों का कहना है कि महिला आर्थिक रूप से अच्छे परिवार की है और स्टाइलिश कपड़े पहनकर स्टोर में आई थी। कर्मचारियों के अनुसार, यह महिला एक महीने में चार बार इसी स्टोर से सामान चुरा चुकी थी। चोरी करने की ये हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी। जब आज यह महिला सामान चुराने के लिए आई, तो कर्मचारियों ने इस महिला पर पूरी नजर रखी और उसे चोरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। हालांकि, बाद में महिला के पति ने स्टोर में पहुंचकर सामान का बिल चुकाया। ऐसे कई मामले सुर्खियों में आते रहते हैं, जिसमें आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों के लोग स्टोर में चोरी करते हैं। बार-बार चोरी करने की इस आदत को मानसिक बीमारी से जोड़कर देखा जाता है। मेडिकल भाषा में बार-बार चोरी की इस आदत को क्लेप्टोमेनिया (Kleptomania) कहा जाता है।

क्लेप्टोमेनिया क्या है?

Mayo Clinic के अनुसार, क्लेप्टोमेनिया एक मेंटल हेल्थ से जुड़ी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार चोरी करने की इच्छा होती है और उसका इस आदत पर कोई कंट्रोल नहीं होता। आमतौर पर इस बीमारी में व्यक्ति जो चीजें चुराता है, वह उसके ज्यादा काम की नहीं होती और वह इसे खरीदने में सक्षम होता है। अगर इस बीमारी का समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह काफी गंभीर कंडीशन हो सकती है।

क्लेप्टोमेनिया के लक्षण

Cleveland Clinic के मुताबिक, अगर व्यक्ति बार-बार सामान चुराने की आदत को रोक नहीं पा रहा, तो वह क्लेप्टोमेनिया की बीमारी से ग्रस्त है। आमतौर पर उसमें ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  • बिना वजह चोरी करने की आदत
  • चोरी करने से पहले बहुत ज्यादा स्ट्रेस होना और चोरी करने के बाद आनंद महसूस होना
  • चोरी करने के बाद अधिकतर लोगों को शर्म या पछतावा महसूस होता है।
  • चोरी की गई चीजों को फेंक देना या दूसरों को दे देना
  • चोरी करने की कोई प्लानिंग नहीं होती, बस अचानक से चोरी करने का मन करना

यह भी पढ़ें- अचानक होने वाली एंग्जायटी को शांत करने में मदद कर सकती हैं ये 5 एक्सरसाइज

क्लेप्टोमेनिया के कारण

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके सटीक कारणों का नहीं पता है , लेकिन इसे मानसिक बीमारी माना जाता है।

  • क्लेप्टोमेनिया से पीड़ित लोगों के दिमाग की संरचना में अंतर देखा गया है।
  • न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन होना
  • डिप्रेशन, एंग्जायटी या ईटिंग डिसऑर्डर जैसी बीमारियों के होने से इसका रिस्क बढ़ना
  • जेनिटक कारण

क्लेप्टोमेनिया के मरीजों का ऐसे रखें ध्यान

Mayo Clinic के अनुसार, क्लेप्टोमेनिया के मरीजों से बहुत प्यार से बात करने की जरूरत होती है। उन्हें ताने देना या हाथ उठाना सही तरीका नहीं है। अगर आपके किसी परिचित को क्लेप्टोमेनिया की समस्या हो, तो इन बातों का ध्यान रखें।

  • पीड़ित व्यक्ति से आराम से, प्यार से बात करें।
  • उन्हें बिना डराए बार-बार चोरी करने की आदत से पुलिस केस, नौकरी छूटने या रिश्ते टूटने जैसी समस्याओं के बारे में समझाएं।
  • उसे खुद पर कंट्रोल करने के लिए समझाएं।
  • किसी अनुभवी साइकेट्रिस्ट या साइकोलॉजिस्ट के पास लेकर जाएं।

निष्कर्ष
नोएडा के मॉल में महिला की ये घटना दिखाती है कि लोगों को क्लेप्टोमेनिया जैसी मानसिक बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की जरूरत है। अगर आपके आस-पास भी कोई ऐसा व्यक्ति है, तो उसे प्यार से समझाएं।

FAQ

  • क्या क्लेप्टोमेनिया का इलाज संभव है?

    इसके इलाज कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT), काउंसलिंग और कुछ खास एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं की मदद से मरीज की इस आदत और सोच पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है।
  • क्या बच्चों और किशोरों में भी क्लेप्टोमेनिया के लक्षण हो सकते हैं?

    टीनएजर्स में फैमिली में स्ट्रेस, बुलिंग या ध्यान आकर्षित करने की चाहत से ट्रिगर हो सकता है। हालांकि, बच्चों में चोरी की हर घटना क्लेप्टोमेनिया नहीं होती। 

Read Next

→ बच्चे दिनभर मोबाइल-टीवी देखते हैं? पढ़ाई और भाषा में दिख रहा है बदलाव, नई स्टडी का दावा

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 05, 2026 21:10 IST

    Published By : Aneesh Rawat