Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Tanima Singhal , Pregnancy Educator & Lactation Consultant

क्या शिशु को दूध पिलाने के लिए जगाना सही है? जानें कब जगाएं और कब नहीं

जन्म से कम से कम 6 महीने तक शिशु के लिए मां का दूध बहुत जरूरी होता है। यहां जानिए, क्या शिशु को दूध पिलाने के लिए जगाना सही है?

मां बनने की जर्नी हर एक महिला के लिए बेहद खास होती है और नवजात के जन्म के बाद मां पर बहुत सी जिम्मेदारियां आ जाती हैं। शिशु को समय-समय पर दूध पिलाना भी मां बनने का एक अहम हिस्सा है, जो नवजात के विकास के लिए बेहद जरूरी है। जन्म के बाद, शिशु का पहला भोजन मां का दूध होता है, जो न केवल पोषण देता है, बल्कि उसे कई प्रकार के रोगों से भी बचाता है। मां का दूध शिशु की जरूरतों के अनुसार तैयार होता है, जिसमें सभी पोषक तत्व, विटामिन और एंटीबॉडी शामिल होते हैं। शिशु को दूध पिलाने से मां और शिशु के बीच एक गहरा बंधन भी बनता है। माता-पिता अक्सर यह सोचते हैं कि क्या उन्हें अपने शिशु को दूध पिलाने के लिए जगाना चाहिए या उसे अपनी नींद जारी रखने देना चाहिए। इस लेख में, लखनऊ के मा-सी केयर क्लीनिक की आयुर्वेदिक डॉक्टर और स्तनपान सलाहकार डॉ. तनिमा सिंघल (Dr. Tanima Singhal, Pregnancy educator and Lactation Consultant at Maa-Si Care Clinic, Lucknow) से जानेंगे कि कब शिशु को जगाकर दूध पिलाना सही है और कब उसे सोने देना चाहिए।

1. शिशु का वजन और स्वास्थ्य

यदि आपके शिशु का वजन बढ़ रहा है और वह नियमित रूप से दूध पी रहा है, तो उसे जगाकर दूध पिलाने की जरूरत नहीं होती। स्वस्थ शिशु अपने आप भूख के संकेत देते हैं। यदि शिशु हर 2 से 3 घंटे में जागकर दूध पी रहा है और उसका वजन सही से बढ़ रहा है, तो उसे सोते समय न जगाना सही रहेगा। इससे शिशु को पर्याप्त नींद मिलेगी, जो उसके विकास के लिए आवश्यक है।

2. गीले डायपर

रोजाना शिशु कितने डायपर गीले कर रहा है, इससे भी आप जान सकते हैं कि शिशु को पर्याप्त पोषण मिल रहा है या नहीं। यदि शिशु के पास दिन में 6 से 8 गीले डायपर होते हैं, तो यह संकेत है कि वह पर्याप्त मात्रा में दूध पी रहा है। इससे पता चलता है कि उसकी प्रक्रिया सही ढंग से हो रही है। ऐसे में, यदि शिशु गहरी नींद में है और उसके डायपर गीले हैं, तो उसे जगाकर दूध पिलाने की आवश्यकता नहीं होती।

इसे भी पढ़ें: ब्रेस्टफीडिंग या एक्सप्रेस्ड मिल्क: बच्चे को दूध पिलाने का कौन-सा तरीका है ज्यादा सही? एक्सपर्ट से जानें

3. जागने के समय एक्टिव

जब शिशु जागता है, तो उसे एक्टिव होना चाहिए। यदि शिशु जागने पर खिलौनों से खेलता है या मुस्कुराता है, तो यह दर्शाता है कि उसका मानसिक और शारीरिक विकास सही दिशा में हो रहा है। ऐसे में, जब शिशु जागकर खेल रहा हो और उसका विकास सामान्य हो, तो उसे दूध पिलाने के लिए जगाने की जरूरत नहीं होती।

इसे भी पढ़ें: शिशु के शरीर पर काले-नीले निशान हैं मंगोल‍ियन स्‍पॉट के लक्षण, डॉक्‍टर से जानें क्‍या है यह

शिशु को कब जगाना चाहिए

हालांकि, कुछ परिस्थितियां ऐसी भी होती हैं जब शिशु को जागकर दूध पिलाना जरूरी होता है। अगर शिशु का वजन कम है या उसे विशेष देखभाल की जरूरत है, तो उसे हर 2 से 3 घंटे में दूध पिलाना उचित है। इसके अलावा, यदि शिशु का विकास धीमा हो रहा है या वह दूध पीने में असमर्थ है, तो उसे जगाना और दूध पिलाना जरूरी है।

रात के समय, विशेषकर पहले कुछ हफ्तों में, शिशु को हर 2 से 3 घंटे में दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। नवजात शिशु की नींद कभी-कभी गहरी होती है, लेकिन अगर वह भूखा हो, तो उसे जागकर दूध पिलाना जरूरी होता है। जैसे-जैसे शिशु बड़ा होता है और वजन बढ़ता है, रात में उसे दूध पिलाने की जरूरत कम होती जाती है।

हर शिशु की जरूरतें अलग होती हैं और उनके विकास के लिए सबसे सही निर्णय लेने के लिए माता-पिता को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह से आपको यह पता चलेगा कि कब शिशु को दूध पिलाने के लिए जगाना चाहिए और कब उसे सोने देना चाहिए।

निष्कर्ष

शिशु को दूध पिलाने के लिए कब जगाना चाहिए और कब नहीं, यह समझना बहुत जरूरी है। यदि शिशु का वजन बढ़ रहा है, गीले डायपर की संख्या ज्यादा है और वह जागने पर एक्टिव है, तो उसे जगाने की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन यदि शिशु का विकास धीमा है, तो उसे दूध पिलाने के लिए जागना उचित है। 

 

 

 

View this post on Instagram

A post shared by Dr Tanima Singhal- Lactation Consultant (@maasicare_tanima)

All Images Credit- Freepik

Read Next

गलती से बच्चे को दे दी एक्सपायरी दवा, तो क्या करें? बता रहे हैं डॉक्टर

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Akanksha Tiwari

Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 07, 2024 14:34 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Oct 07, 2024 14:34 IST

    Modified By : Vani Malik
  • Oct 07, 2024 14:35 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Tanima Singhal

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content