Thu Sep 24, 2026 | 07:48 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kamalesh A , Senior Consultant Physician - Internal Medicine

'टॉरेट सिंड्रोम' पर आधार‍ित है रानी मुखर्जी की फ‍िल्‍म हिचकी, डॉक्‍टर से जानें इस दुर्लभ कंडीशन के बारे में

टॉरेट सिंड्रोम एक नसों और दिमाग से जुड़ी विकास संबंधि‍त कंडीशन है जो आमतौर पर बचपन में होती है। रानी मुखर्जी की फ‍ि‍ल्‍म ह‍िचकी में इसे द‍िखाया गया था। जानें क्‍या है यह कंडीशन?
'टॉरेट सिंड्रोम' पर आधार‍ित है रानी मुखर्जी की फ‍िल्‍म हिचकी, डॉक्‍टर से जानें इस दुर्लभ कंडीशन के बारे में'टॉरेट सिंड्रोम' पर आधार‍ित है रानी मुखर्जी की फ‍िल्‍म हिचकी, डॉक्‍टर से जानें इस दुर्लभ कंडीशन के बारे में

कुछ साल पहले एक फ‍िल्‍म आई थी 'ह‍िचकी' ज‍िसमें एक्‍ट्रेस रानी मुखर्जी ने एक टीचर का क‍िरदार न‍िभाया है ज‍िसे टॉरेट स‍िंड्रोम था। इस दुर्लभ न्‍यूरोलॉज‍िकल कंडीशन में व्‍यक्‍त‍ि की तंत्र‍िका ठीक से काम नहीं करती हैं ज‍िसके कारण व्‍यक्‍त‍ि अजीब हरकतें करता है या आवाजें न‍िकालता है ज‍िस पर उसका वश नहीं होता। टॉरेट स‍िंड्रोम के मरीजों में कई तरह के लक्षण नजर आते हैं जैसे- अजीब आवाजें न‍िकालना, ह‍िचकी लेना, शब्‍दों में दोहराना, बार-बार सूंघना, पलकें झपकाना वगैरह। आइए जानते हैं इस दुर्लभ कंडीशन टॉरेट स‍िंड्रोम से जुड़ी जरूरी जानकारी। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Kamalesh, Senior Consultant Physician At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

टॉरेट स‍िंड्रोम में हरकत या आवाज पर कंट्रोल नहीं रहता

टॉरेट स‍िंड्रोम में व्यक्ति बार-बार कुछ ऐसी हरकतें या आवाजें न‍िकालता है, जिन्हें वह आसानी से कंट्रोल नहीं कर पाता है। टॉर‍ेट स‍िंड्रोम तंत्र‍िकाओं से जुड़ा एक दुर्लभ रोग है ज‍िसमें मांसपेश‍ियों में समय-समय पर ट‍िक्‍स होते हैं। ट‍िक्‍स का अर्थ है अचानक संकुचन या स‍िकुड़ना। इस वजह से अचानक मांसपेश‍ियों में संकुचन होता है और मरीज के आव-भाव और शब्‍द बदल जाते हैं। टॉर‍ेट स‍िंड्रोम के मरीजों में ADHD या OCD जैसी कंडीशन भी अक्‍सर देखी जाती हैं।

मोटर और वोकल ट‍िक्‍स के आधार पर पहचानें लक्षण

टिक का प्रकार लक्षण
मोटर टिक्स (शारीरिक हरकतें)


आंखें झपकाना, कंधे उचकाना

  सिर हिलाना
  दांत पीसना 
वोकल टिक्स (आवाज से जुड़ी टिक)

गला साफ करना

  सीटी बजाना, चिल्लाना
  एक ही आवाज बार-बार निकालना, हिचकी आना

इसके कंडीशन के इलाज के लिए एक से ज्यादा तरह की शारीरिक हरकतें (मोटर टिक्स) और कम से कम एक तरह की आवाज से जुड़ी टिक (वोकल टिक) एक साल से ज्यादा समय तक होना जरूरी होता है। सामान्य टिक्स में आंखें झपकाना, कंधे उचकाना और गला साफ करना शामिल हैं। कुछ मुश्‍क‍िल टिक्स में उछलना, चीजों को छूना और किसी शब्द को बार-बार बोलना शामिल हो सकता है।

अन्‍य लक्षण:

  • ह‍िचकी आना।
  • दांत पीसना।
  • स‍िर ह‍िलाना।
  • सीटी बजाना।
  • च‍िल्‍लाना।
  • एक ही आवाज बार-बार न‍िकालना।

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कारण

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  • टॉरेट सिंड्रोम द‍िमाग में मौजूद न्‍यूरो ट्रांसमीटर के ब‍िगड़ने के कारण हो सकता है।
  • यह आनुवंशिक भी हो सकता है।

रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताब‍िक, टॉरेट स‍िंड्रोम का सटीक कारण फ‍िलहाल पता नहीं है। वैज्ञानिक ने इसके कुछ संभाव‍ित कारण बताए हैं जैसे-

आपत्तिजनक शब्द न‍िकलना भी है इस कंडीशन का ह‍िस्‍सा

टॉरेट सिंड्रोम वाले करीब 10 प्रतिशत लोगों में गाली देने या आपत्तिजनक शब्द बोलने की आदत होती है। इसे कोप्रोलालिया (Coprolalia) कहा जाता है। इस पर उनका कंट्रोल नहीं होता।

क्या टॉरेट सिंड्रोम जन्म से होता है?

टॉरेट सिंड्रोम के लक्षण आमतौर पर जन्म के समय दिखाई नहीं देते हैं। इसके लक्षण अक्सर बचपन में शुरू होते हैं।

क्या टॉरेट सिंड्रोम बाद में भी हो सकता है?

हां, इसके लक्षण बाद में भी दिखाई दे सकते हैं। आमतौर, पर इसकी शुरुआत बचपन या किशोरावस्था में होती है।

क्या टॉरेट सिंड्रोम ठीक हो सकता है?

कुछ लोगों में उम्र बढ़ने के साथ टिक को कंट्रोल करना आसान हो जाता है, लेक‍िन यह कंडीशन पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकती है।

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टॉरेट स‍िंड्रोम की कोई व‍िशेष जांच नहीं होती

टॉरेट स‍िंड्रोम का पता लगाने के ल‍िए कोई खास ट‍ेस्‍ट नहीं होता है। लक्षणों और पुराने इत‍िहास के मुताब‍िक इलाज क‍िया जाता है। Mayo Clinic के मुताब‍िक, मोटर और वोकल टिक, टॉरेट सिंड्रोम के अलावा दूसरी स्थितियों के कारण भी हो सकती हैं। अन्य संभावित कारणों का पता लगाने के लिए डॉक्टर कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं, जैसे- ब्‍लड टेस्‍ट, एमआरआई वगैरह।

सीबीआईटी थेरेपी की मदद ली जाती है

इलाज में सबसे पहले व्यवहार संबंधि‍त थेरेपी, खासकर सीबीआईटी (Comprehensive Behavioral Intervention For Tics) को अपनाया जाता है। इसमें व्यक्ति को टिक होने से पहले महसूस होने वाली इच्छा को पहचानना और उसके जवाब में दूसरी प्रतिक्रिया करना सिखाया जाता है।

दवाओं से इलाज

अगर टिक्स मध्यम से गंभीर हों और रोजमर्रा के कामों में ज्यादा परेशानी पैदा कर रहे हों, तो डॉक्टर कुछ दवाएं दे सकते हैं।

इलाज और थेरेपी के साथ सामान्‍य जीवन संभव है

इसके साथ ही, OCD या ADHD जैसी दूसरी समस्याओं का समय पर इलाज, बीमारी के बारे में सही जानकारी और परिवार का सहयोग भी जरूरी है। सही इलाज और देखभाल मिलने पर टॉरेट सिंड्रोम वाले ज्यादातर लोग सामान्य और एक्‍ट‍िव जीवन जी सकते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

टॉरेट स‍िंड्रोम एक दुर्लभ न्‍यूरोलॉज‍िकल कंडीशन है। व्यक्ति बार-बार कुछ ऐसी हरकतें या आवाजें न‍िकालता है, जिन्हें वह आसानी से कंट्रोल नहीं कर पाता है। ऐसे व्‍यक्‍त‍ि में ह‍िचकी, आंखें झपकाना, कंधे उचकाना, गला साफ करने जैसे लक्षण द‍िख सकते हैं। टॉरेट सिंड्रोम का सटीक कारण पता नहीं है। हालांक‍ि, यह आनुवंशिक भी हो सकता है और मुख्‍य रूप से द‍िमाग में मौजूद न्‍यूरो ट्रांसमीटर के ब‍िगड़ने के कारण होता है। इसका कोई खास टेस्‍ट नहीं होता, लक्षणों के आधार पर इलाज या थेरेपी तय की जाती है। ऐसे मरीजों का इलाज सीबीआईटी थेरेपी, ट‍िक्‍स को मैनेज करने के ल‍िए दवाएं, OCD या ADHD की दवाएं वगैरह दी जाती हैं। टॉरेट स‍िंड्रोम से पीड़ि‍त व्‍यक्‍त‍ि भी सामान्‍य जीवन जी सकता है।

image credit: mbis.org, shortpixel

FAQ

  • क्या टॉरेट सिंड्रोम में हरकतों को रोकना संभव होता है?

    कुछ समय के ल‍िए हरकतों को कंट्रोल क‍िया जा सकता है, लेक‍िन ऐसा करने में काफी परेशानी और बेचैनी महसूस होती है। 
  • क्या टॉरेट सिंड्रोम बच्‍चे की पढ़ाई को प्रभावित करता है?

    कुछ बच्‍चों में ट‍िक या इससे संबंध‍ित समस्‍या की वजह से बच्‍चे की पढ़ाई प्रभाव‍ित हो सकती है, लेक‍िन हर बच्‍चे के साथ ऐसी स्‍थ‍ित‍ि होना जरूरी नहीं है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 24, 2026 18:38 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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