कुछ साल पहले एक फिल्म आई थी 'हिचकी' जिसमें एक्ट्रेस रानी मुखर्जी ने एक टीचर का किरदार निभाया है जिसे टॉरेट सिंड्रोम था। इस दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल कंडीशन में व्यक्ति की तंत्रिका ठीक से काम नहीं करती हैं जिसके कारण व्यक्ति अजीब हरकतें करता है या आवाजें निकालता है जिस पर उसका वश नहीं होता। टॉरेट सिंड्रोम के मरीजों में कई तरह के लक्षण नजर आते हैं जैसे- अजीब आवाजें निकालना, हिचकी लेना, शब्दों में दोहराना, बार-बार सूंघना, पलकें झपकाना वगैरह। आइए जानते हैं इस दुर्लभ कंडीशन टॉरेट सिंड्रोम से जुड़ी जरूरी जानकारी। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Kamalesh, Senior Consultant Physician At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।
टॉरेट सिंड्रोम में हरकत या आवाज पर कंट्रोल नहीं रहता
टॉरेट सिंड्रोम में व्यक्ति बार-बार कुछ ऐसी हरकतें या आवाजें निकालता है, जिन्हें वह आसानी से कंट्रोल नहीं कर पाता है। टॉरेट सिंड्रोम तंत्रिकाओं से जुड़ा एक दुर्लभ रोग है जिसमें मांसपेशियों में समय-समय पर टिक्स होते हैं। टिक्स का अर्थ है अचानक संकुचन या सिकुड़ना। इस वजह से अचानक मांसपेशियों में संकुचन होता है और मरीज के आव-भाव और शब्द बदल जाते हैं। टॉरेट सिंड्रोम के मरीजों में ADHD या OCD जैसी कंडीशन भी अक्सर देखी जाती हैं।
मोटर और वोकल टिक्स के आधार पर पहचानें लक्षण
| टिक का प्रकार | लक्षण |
| मोटर टिक्स (शारीरिक हरकतें) |
|
| सिर हिलाना | |
| दांत पीसना | |
| वोकल टिक्स (आवाज से जुड़ी टिक) | गला साफ करना |
| सीटी बजाना, चिल्लाना | |
| एक ही आवाज बार-बार निकालना, हिचकी आना |
इसके कंडीशन के इलाज के लिए एक से ज्यादा तरह की शारीरिक हरकतें (मोटर टिक्स) और कम से कम एक तरह की आवाज से जुड़ी टिक (वोकल टिक) एक साल से ज्यादा समय तक होना जरूरी होता है। सामान्य टिक्स में आंखें झपकाना, कंधे उचकाना और गला साफ करना शामिल हैं। कुछ मुश्किल टिक्स में उछलना, चीजों को छूना और किसी शब्द को बार-बार बोलना शामिल हो सकता है।
अन्य लक्षण:
- हिचकी आना।
- दांत पीसना।
- सिर हिलाना।
- सीटी बजाना।
- चिल्लाना।
- एक ही आवाज बार-बार निकालना।
यह भी पढ़ें- Taare Zameen Par मूवी में ईशान को डिस्लेक्सिया के कारण थी पढ़ने-लिखने में परेशानी, जानें क्या है ये बीमारी
कारण
what-is-tourette-syndrome
- टॉरेट सिंड्रोम दिमाग में मौजूद न्यूरो ट्रांसमीटर के बिगड़ने के कारण हो सकता है।
- यह आनुवंशिक भी हो सकता है।
रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताबिक, टॉरेट सिंड्रोम का सटीक कारण फिलहाल पता नहीं है। वैज्ञानिक ने इसके कुछ संभावित कारण बताए हैं जैसे-
- गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करना।
- गर्भावस्था में होने वाली जटिलताएं।
आपत्तिजनक शब्द निकलना भी है इस कंडीशन का हिस्सा
टॉरेट सिंड्रोम वाले करीब 10 प्रतिशत लोगों में गाली देने या आपत्तिजनक शब्द बोलने की आदत होती है। इसे कोप्रोलालिया (Coprolalia) कहा जाता है। इस पर उनका कंट्रोल नहीं होता।
क्या टॉरेट सिंड्रोम जन्म से होता है?
टॉरेट सिंड्रोम के लक्षण आमतौर पर जन्म के समय दिखाई नहीं देते हैं। इसके लक्षण अक्सर बचपन में शुरू होते हैं।
क्या टॉरेट सिंड्रोम बाद में भी हो सकता है?
हां, इसके लक्षण बाद में भी दिखाई दे सकते हैं। आमतौर, पर इसकी शुरुआत बचपन या किशोरावस्था में होती है।
क्या टॉरेट सिंड्रोम ठीक हो सकता है?
कुछ लोगों में उम्र बढ़ने के साथ टिक को कंट्रोल करना आसान हो जाता है, लेकिन यह कंडीशन पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकती है।
यह भी पढ़ें- ‘पा’ में अमिताभ बच्चन के किरदार में दिखा 'प्रोजेरिया', जानें बचपन में बूढ़ा करने वाली इस बीमारी के बारे में
टॉरेट सिंड्रोम की कोई विशेष जांच नहीं होती
टॉरेट सिंड्रोम का पता लगाने के लिए कोई खास टेस्ट नहीं होता है। लक्षणों और पुराने इतिहास के मुताबिक इलाज किया जाता है। Mayo Clinic के मुताबिक, मोटर और वोकल टिक, टॉरेट सिंड्रोम के अलावा दूसरी स्थितियों के कारण भी हो सकती हैं। अन्य संभावित कारणों का पता लगाने के लिए डॉक्टर कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं, जैसे- ब्लड टेस्ट, एमआरआई वगैरह।
सीबीआईटी थेरेपी की मदद ली जाती है
इलाज में सबसे पहले व्यवहार संबंधित थेरेपी, खासकर सीबीआईटी (Comprehensive Behavioral Intervention For Tics) को अपनाया जाता है। इसमें व्यक्ति को टिक होने से पहले महसूस होने वाली इच्छा को पहचानना और उसके जवाब में दूसरी प्रतिक्रिया करना सिखाया जाता है।
दवाओं से इलाज
अगर टिक्स मध्यम से गंभीर हों और रोजमर्रा के कामों में ज्यादा परेशानी पैदा कर रहे हों, तो डॉक्टर कुछ दवाएं दे सकते हैं।
इलाज और थेरेपी के साथ सामान्य जीवन संभव है
इसके साथ ही, OCD या ADHD जैसी दूसरी समस्याओं का समय पर इलाज, बीमारी के बारे में सही जानकारी और परिवार का सहयोग भी जरूरी है। सही इलाज और देखभाल मिलने पर टॉरेट सिंड्रोम वाले ज्यादातर लोग सामान्य और एक्टिव जीवन जी सकते हैं।
निष्कर्ष:
टॉरेट सिंड्रोम एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है। व्यक्ति बार-बार कुछ ऐसी हरकतें या आवाजें निकालता है, जिन्हें वह आसानी से कंट्रोल नहीं कर पाता है। ऐसे व्यक्ति में हिचकी, आंखें झपकाना, कंधे उचकाना, गला साफ करने जैसे लक्षण दिख सकते हैं। टॉरेट सिंड्रोम का सटीक कारण पता नहीं है। हालांकि, यह आनुवंशिक भी हो सकता है और मुख्य रूप से दिमाग में मौजूद न्यूरो ट्रांसमीटर के बिगड़ने के कारण होता है। इसका कोई खास टेस्ट नहीं होता, लक्षणों के आधार पर इलाज या थेरेपी तय की जाती है। ऐसे मरीजों का इलाज सीबीआईटी थेरेपी, टिक्स को मैनेज करने के लिए दवाएं, OCD या ADHD की दवाएं वगैरह दी जाती हैं। टॉरेट सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति भी सामान्य जीवन जी सकता है।
image credit: mbis.org, shortpixel
FAQ
क्या टॉरेट सिंड्रोम में हरकतों को रोकना संभव होता है?
कुछ समय के लिए हरकतों को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन ऐसा करने में काफी परेशानी और बेचैनी महसूस होती है।क्या टॉरेट सिंड्रोम बच्चे की पढ़ाई को प्रभावित करता है?
कुछ बच्चों में टिक या इससे संबंधित समस्या की वजह से बच्चे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है, लेकिन हर बच्चे के साथ ऐसी स्थिति होना जरूरी नहीं है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Sep 24, 2026 18:38 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Kamalesh A
