Fri Sep 11, 2026 | 08:19 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

क्‍या हैं हाई-ऑक्सलेट फूड्स और ये सेहत के ल‍िए वाकई हान‍िकारक हैं? एक्‍सपर्ट से जानें

हाई-ऑक्सलेट फूड्स वे खाद्य पदार्थ हैं जिनमें ऑक्सलेट की मात्रा ज्‍यादा होती है और यह कुछ लोगों में किडनी स्टोन का कारण बन सकते हैं। जानें ये फूड्स कौन से हैं और किन्हें नुकसान पहुंचाते हैं?

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हम रोज जिन फल, सब्जि‍यों या अनाज को हेल्दी समझकर खाते हैं, उनमें से कई में ऑक्सलेट नाम का एक प्राकृतिक यौगिक पाया जाता है। यह वही तत्व है जो शरीर में कैल्शियम से जुड़कर कैल्शियम-ऑक्सलेट क्रिस्टल बना सकता है और आगे चलकर किडनी स्टोन के खतरे को बढ़ाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी हाई-ऑक्सलेट फूड्स से हमेशा नुकसान होता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी हेल्थ कैसी है, आप कितना ऑक्सलेट खाते हैं और आपका शरीर इसे कैसे प्रोसेस करता है? इस लेख में आप जानेंगे कि हाई-ऑक्सलेट फूड्स कौन से हैं, ये शरीर के ल‍िए क‍ितने हान‍िकारक हैं और किन लोगों को इनका सेवन सीमित करना चाहिए? इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

हाई-ऑक्सलेट फूड्स कौन से हैं?- What Are High Oxalate Foods

हाई-ऑक्सलेट फूड्स वे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनमें ऑक्सलेट नाम का प्राकृतिक यौगिक ज्‍यादा मात्रा में पाया जाता है। Nutritionist Neha Sinha ने बताया क‍ि यह शरीर में कैल्शियम से जुड़कर किडनी स्टोन बनाने का खतरा बढ़ा सकता है, इसलिए कुछ लोगों को इनका सेवन सीमित करना चाहिए।

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हाई-ऑक्सलेट फूड्स कौन से हैं?- What Are High Oxalate Foods

जिन खाद्य पदार्थों में 100 एमजी से ज्यादा ऑक्सलेट हो, उन्हें हाई-ऑक्सलेट फूड माना जाता है। इनमें शामिल हैं-

  • पालक
  • चुकंदर
  • मेथी के पत्ते
  • बादाम और काजू
  • सोयाबीन और सोया प्रोडक्ट्स
  • राजगि‍रा
  • रागी
  • डार्क चॉकलेट
  • शकरकंद
  • आलू के कुछ प्रकार
  • सीरियल्स जैसे ब्राउन राइस

ऐसा नहीं है कि ये फूड हेल्‍दी नहीं हैं, बल्कि इनमें ऑक्सलेट की मात्रा ज्यादा होती है और कुछ स्थितियों में इनका संतुलित सेवन करना जरूरी है।

हाई-ऑक्सलेट फूड्स सेहत के ल‍िए हानिकारक हो सकते हैं?- High Oxalate Foods Are Harmful Or Not

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1. किडनी स्टोन का खतरा- Kidney Stone Risk

जब शरीर में ऑक्सलेट की मात्रा ज्‍यादा होती है, तो यह कैल्शियम के साथ मिलकर क्रिस्टल बनाता है, जो आगे चलकर किडनी स्टोन बन सकता है। खासतौर पर उन लोगों में जो पानी कम पीते हैं, नमक ज्‍यादा खाते हैं या ज‍िनके पर‍िवार में क‍िडनी स्‍टोन की हिस्ट्री हो।

2. मिनरल्स के एब्‍जॉर्ब होने में बाधा- Hindrance In Absorption Of Minerals

ऑक्सलेट- कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स से बंध जाता है। इससे शरीर इन मिनरल्स को पूरी तरह से एब्‍जॉर्ब नहीं कर पाता है। पालक में आयरन बहुत होता है, लेकिन ऑक्सलेट की वजह से शरीर उसे कम मात्रा में एब्‍जॉर्ब कर पाता है।

3. पेट की समस्‍याएं- Stomach Problems

जिन लोगों को आईबीएस, कब्ज, पेट फूलने जैसी समस्याएं हैं, उनमें हाई-ऑक्सलेट फूड्स से ब्लोटिंग बढ़ सकती है क्योंकि उनका शरीर इन्हें ठीक से ब्रेक नहीं कर पाता है।

किसे हाई-ऑक्सलेट फूड्स कम करने चाहिए?- Who Should Avoid High Oxalate Foods

  • जिन्हें किडनी स्टोन की समस्या हो चुकी है।
  • जिनकी फैमिली हिस्ट्री में स्टोन का खतरा हो।
  • जिनको क्रॉनिक किडनी डिज़ीज (CKD) है।
  • जिनकी यूरिन में ऑक्सलेट लेवल ज्यादा पाया जाता है।
  • जिन्‍हें आईबीएस या पाचन संबंधी समस्याएं रहती हैं।

निष्कर्ष:

हाई-ऑक्सलेट फूड्स क‍िडनी स्टोन और मिनरल की कमी जैसी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। इसलिए इन्हें पूरी तरह छोड़ने की बजाय संतुलित मात्रा में, सही कुकिंग मेथड और पर्याप्त पानी के साथ लेना बेहतर है।

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image credit: foodmatters.com, kidneycop.com

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 27, 2025 18:42 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Nov 27, 2025 18:42 IST

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    Published By : Yashaswi Mathur
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