Way To Eat Coriander To Calm The Heat Of Bile In Hindi: कई लोगों की पित्त प्रकृति होती है और कई बार लोगों के शरीर में पित्त बढ़ जाता है। इसके कारण लोगों के शरीर में गर्मी बढ़ने, खट्टी डकार आने, चिड़चिड़ापन होने, आंखों, पैरों, त्वचा में जलन होने, रेडनेस होने या रैशेज होने की समस्या हो सकती है। ऐसे में पित्त को कम करने और शरीर की गर्मी को कम करने के लिए धनिया पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। धनिया पत्तों में अच्छी मात्रा में विटामिन ए, सी, के, पोटैशियम, कैल्शियम और आयरन जैसे पोषक तत्व और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए भी कई तरीकों से फायदेमंद माना जाता है। ऐसे में ये पित्त की गर्मी को शांत करने के धनिया पत्ते का सेवन किया जा सकता है। ऐसे में आइए आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ और आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा (Ayurvedic Dr. Chanchal Sharma, Director and Gynecologist, Asha Ayurveda) से जानें पित्त की गर्मी को शांत करने के लिए धनिया कैसे खाएं? और इसके क्या फायदे हैं?
पित्त की गर्मी को शांत करने के लिए धनिया कैसे फायदेमंद है? - How Is Coriander Beneficial In Calming The Heat Of Bile?
आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, औषधीय गुणों से भरपूर हरे धनिए में बहुत से पोषक तत्व होते हैं, धनिया की तासीर ठंडी होती है। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर में ब्लड से जुड़ी बीमारियों से बचाव करने और पित्त की गर्मी को शांत करने में मदद मिलती है।
शरीर को डिटॉक्स करे
धनिया पत्तों में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर को नेचुरल रूप से डिटॉक्स करने और शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद मिलती है। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने और स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।
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शरीर की गर्मी को शांत करे
आयुर्वेद के अनुसार, धनिया की तासीर ठंडी होती है। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर की गर्मी को कम करने में मदद मिलती है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार करने, जलन और बैचेनी को कम करने में मदद मिलती है और इससे शरीर में ठंडक महसूस होती है।
पाचन के लिए फायदेमंद
धनिया की तासीर ठंडी होती है। ऐसे में इसका सेवन करने से पाचन अग्नि को बैलेंस करने, एसिडिटी, गैस और पेट की जलन को कम करने में मदद मिलती है। बता दें, ये समस्याएं पित्त के असंतुलित होने के कारण होती हैं।
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पित्त की गर्मी को कम करने के लिए धनिया कैसे खाएं? - How To Eat Coriander To Reduce Bile Heat?
आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, हरे धनिए में अच्छी मात्रा में विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं। ऐसे में इसका सेवन सब्जी में डालकर या धनिए की चटनी का सेवन किया जा सकता है। इससे स्वास्थ्य में सुधार करने और शरीर की गर्मी को शांत करने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
औषधीय गुणों से भरपूर धनिया पत्ते में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर को डिटॉक्स करने, शरीर की गर्मी को शांत करने, पित्त की गर्मी को कम करने, पाचन अग्नि को बैलेंस करने, पेट की जलन को कम करने और पाचन से जुड़ी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, इसका सेवन सीमित मात्रा में करें और इससे किसी भी तरह की एलर्जी को इसका सेवन करने से बचें। इसके अलावा, पित्त के कारण अधिक समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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FAQ
शरीर में पित्त बढ़ने के क्या लक्षण होते हैं?
शरीर में पित्त बढ़ने के कारण लोगों को शरीर के अंदर गर्मी बढ़ने, आंखों, त्वचा और तलवों में जलन होने, ज्यादा पसीना आने, अधिक एसिडिटी होने, खट्टी डकार होने, चिड़चिड़ापन होने, जल्दी गुस्सा आने, त्वचा पर रेडनेस होने, मुंहासे होने, भूख प्यास बढ़ने, नाक से खून आने, नाखूनों के पीला पड़ने और आंखों के लाल होने की समस्या हो सकती है।शरीर में पित्त को तुरंत कैसे कम करें?
शरीर में पित्ते को बैलेंस करने के लिए नारियल पानी, छाछ और पुदीने का शरबत जैसी ठंडी ड्रिंक, खीरा खाएं, अंकुरित मूंग दाल, एलोवेरा जेल लगाएं, सौंफ खाएं, स्ट्रेस कम करें, तरबूज, हरी पत्तेदार सब्जियों, लौकी, अंजीर और एवोकाडो जैसे फूड्स को डाइट में शामिल करें। इससे शरीर में पित्त के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।धनिया के पत्ते खाने के क्या फायदे हैं?
धनिया के पत्तों में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, स्किन को हेल्दी रखने, आंखों के स्वास्थ्य में सुधार करने, स्ट्रेस कम करे, पाचन में सुधार करने, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने और इसके स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।
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Jan 07, 2026 17:48 IST
Modified By : Priyanka Sharma Jan 07, 2026 17:48 IST
Modified By : Priyanka SharmaJan 07, 2026 17:48 IST
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Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Chanchal Sharma