Fri Sep 11, 2026 | 07:35 PM IST

Medically Reviewed by Dt Divya Gandhi , Therapeutic Diet (Diabetes & PCOD)

क्या नाइट शिफ्ट में बार-बार चाय या कॉफी पीना ब्लड शुगर बढ़ाता है? जानें एक्सपर्ट से

क्या आप भी नाइट शिफ्ट में बार-बार चाय या काॅफी का सेवन करते हैं? अगर हां, तो अपनी इस आदत को आज ही छोड़ दें। क्यों? जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।

हममें से कई लोग ऐसे हैं, जो नाइट शिफ्ट की जाॅब करते हैं। हालांकि, फिलहाल यह वर्क कल्चर पूरी तरह नाॅर्मल माना जाता है, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि नाइट शिफ्ट में स्वास्थ्य से जुड़े कई तरह के चुनौतियां होती हैं। इन्हें मैनेज करना आसान नहीं है। जैसे नाइट शिफ्ट में हैवी मील और अनहेल्दी स्नैकिंग करना सही नहीं है। इससे मेटाबाॅलिज्म प्रभावित होता है और मोटापा बढ़ता है। कई लोग रात के समय एक्टिव रहने के लिए बार-बार चाय पीते हैं। सवाल है, क्या नाइट शिफ्ट में बार-बार चाय या काॅफी पीने से ब्लड शुगर बढ़ता है? जानें, Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से।

क्या नाइट शिफ्ट में चाय-कॉफी पीने से ब्लड शुगर बढ़ता है?

night shift tea coffee impact on blood sugar 01 (18)

नाइट शिफ्ट में बार-बार चाय काॅफी पीना अक्सर लोगों की आदत बन जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि रात के समय जगे रहना आसान नहीं होता है। ऐसे में माइंड को एक्टिव रखना और पूरी रात काम करने के लिए लोग चाय-काॅफी पीते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य के लिए यह सही नहीं है। इस संबंध में दिव्या गांधी कहती हैं, "रात को बार-बार चाय काॅफी पीने से ब्लड शुगर पर बहुत बुरा असर पड़ता है। हालांकि, ऐसा शाॅर्ट टर्म के लिए होता है, लेकिन दीर्घकालिक असर भी देखने को मिलते हैं।"

इसे भी पढ़ें: हेल्दी दिखने वाले ये फूड्स बढ़ा सकते हैं ब्लड शुगर, डायबिटीज के मरीज रखें ध्यान

नाइट शिफ्ट में चाय-कॉफी पीने से ब्लड शुगर कैसे प्रभावित होता है?

  • शुगर बढ़नाः चाय या काॅफी में कैफीन होता है। जब आप खुद को एक्टिव रखने के लिए बार-बार चाय या काॅफी पीते हैं, तो इसकी वजह से शरीर में अस्थाई रूप से शुगर का स्तर बढ़ सकता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंसः जब आप नाइट शिफ्ट में अधिक मात्रा में चाय या काॅफी पी लेते हैं, तो इसकी वजह से इंसुलिन सेंसिटिविटी प्रभावित होती है। कहने का मतलब है कि अधिक मात्रा में चाय या काॅफी पीने की वजह से शरीर इंसुलिन के प्रति सही तरह से प्रतिक्रिया नहीं कर पाता है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ जाता है। ऐसा खासकर डायबिटीज के मरीजों के साथ होता है।
  • स्ट्रेस का बढ़नाः नाइट शिफ्ट में अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करने से स्ट्रेस हार्मोन के स्तर में भी बढ़ोतरी हो सकती है। दरअसल, कैफीन कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे तनाव पैदा करने वाले हार्मोन के स्राव को उत्तेजित करता है, जो लिवर को ब्लड फ्लो में जमा ग्लूकोज रिलीज करने के लिए उकसाता है।

इसे भी पढ़ें- क्या डायबिटीज में रागी का सेवन करना सही है? एक्सपर्ट से जानें

निष्कर्ष

कुल मिलाकर कहने की बात यह है कि नाइट शिफ्ट करने वालों को रात के समय अधिक चाय या काॅफी नहीं पीनी चाहिए। यह स्वास्थ्य के लिहाज से सही नहीं है। खासकर, डायबिटीज के रोगियों को ऐसा करने से बचना चाहिए। हालांकि, चाय या काॅफी पीने से अस्थायी रूप में ब्लड शुगर अचानक बढ़ जाता है, लेकिन इसके दीर्घकालिक नुकसान भी सेहत को हो सकते हैं।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या खाली पेट कॉफी पीने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है?

    हां, खाली पेट कैफीन का सेवन करने से तनाव हार्मोन एक्टिव हो जाते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।
  • क्या कैफीन इंसुलिन रेजिस्टेंस को प्रभावित करता है?

    कैफीन अस्थायी रूप से इंसुलिन सेंसिटिविटी को कम कर सकता है, जिससे शरीर शुगर को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता।
  • क्या ब्लैक कॉफी डायबिटीज के मरीजों के लिए सुरक्षित है?

    डायबिटीज के मरीज सीमित मात्रा में ब्लैक कॉफी का सेवन कर सकते हैं।

Read Next

रोजाना एक कप पिएं कचनार की चाय, शरीर को मिलेंगे ये 7 फायदे

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    May 14, 2026 16:26 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • May 14, 2026 16:26 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dt Divya Gandhi

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content