Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vidya Tickoo , Consultant Endocrinologist & Diabetologist

मोटापा कम न होने का कारण लेप्टिन रेज‍िस्‍टेंस तो नहींं? जानें इसके लक्षण, कारण, इलाज

बार-बार भूख लगना और वजन कम न होना लेप्टिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। इसके कारण मोटापा और डाय‍ब‍िटीज जैसी समस्‍याएं भी हो सकती हैं। आइए समझते हैं लेप्टिन (Leptin) हार्मोन और इससे जुड़ी समस्‍या लेप्टिन रेजिस्टेंस क्‍या है?

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लेप्टिन एक हार्मोन है जो हमारे द‍िमाग को बताता है क‍ि पेट भर गया है और अब खाना बंद करना है। वहीं लेप्टिन रेजिस्टेंस इससे जुड़ी समस्‍या है ज‍िसमें शरीर को लेप्टिन हार्मोन का सिग्नल ठीक से समझ नहीं आ पाता है। लेप्टिन रेजिस्टेंस (Leptin Resistance) के कारण बार-बार भूख लगती है और व्‍यक्‍त‍ि भूख से ज्‍यादा खाना खा लेता है। इस वजह से मोटापा और डायब‍िटीज जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। लेप्टिन हार्मोन और लेप्टिन रेजिस्टेंस को समझने के ल‍िए हमने Dr. Vidya Tickoo, Consultant Endocrinologist & Diabetologist At Yashoda Hospitals, Hitech City, Hyderabad से बात की।

लेप्टिन हार्मोन क्‍या है?

लेप्टिन एक हार्मोन है जो फैट ट‍िशूज से न‍िकलता है और शरीर की एनर्जी को कंट्रोल करता है। यह द‍िमाग को शरीर के एनर्जी लेवल के बारे में सिग्नल देता है और यह भूख को भी कंट्रोल करता है। मोटापा होने पर शरीर में लेप्टिन का लेवल ज्‍यादा होने से भूख कंट्रोल नहीं होती और व्‍यक्‍त‍ि ज्‍यादा खाने लगता है।

लेप्टिन रेजिस्टेंस क्‍या है?

लेप्टिन एक हार्मोन है जो दिमाग को यह सिग्नल देता है कि पेट भर चुका है, अब खाना बंद करें, लेक‍िन लेप्टिन रेजिस्टेंस होने पर लेप्टिन हार्मोन का संतुलन खराब हो जाता है ज‍िससे शरीर को लगता है क‍ि भूख लगी है।

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लेप्टिन हार्मोन में गड़बड़ी से मोटापा बढ़ सकता है

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साल 2000 में Cell Research में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, अगर लेप्टिन हार्मोन में गड़बड़ी हो जाए, तो मोटापा बढ़ सकता है। इसके अलावा हार्मोनल असंतुलन, मेटाबॉल‍िक समस्‍याएं जैसे टाइप 2 डायब‍िटीज, नॉन-अल्‍कोहल‍िक फैटी ल‍िवर ड‍िजीज, थायराइड जैसी समस्‍याएं भी हो सकती हैं। लेप्टिन का असर केवल भूख तक सीम‍ित नहीं रहता, बल्‍क‍ि इम्‍यून‍िटी, हार्मोन, इंसुल‍िन और मेटाबॉल‍िज्‍म को भी प्रभाव‍ित करता है।

लेप्टिन रेजिस्टेंस की पहचान कैसे होती है?

Obesity Medicine Association के मुताब‍िक, लेप्टिन रेजिस्टेंस की पहचान ब्‍लड में लेप्टिन के हाई लेवल से होती है। ध्यान रखें कि लेप्टिन का लेवल ही एकमात्र कारक नहीं है, लेप्टिन रेजिस्टेंस कुछ लक्षण शरीर में नजर आ सकते हैं जैसे-

  • लगातार कोश‍िश के बाद भी वजन कम न होना।
  • हंगर क्रेव‍िंग होना और भूख को कंट्रोल नहीं कर पाना।
  • समय पर खाना न म‍िलने पर च‍िड़च‍िड़ापन महसूस होता है।
  • लेप्टिन रेजिस्टेंस में व्‍यक्‍त‍ि को एनर्जेट‍िक महसूस नहीं होता है और थकान महसूस होती है।

लेप्टिन रेजिस्टेंस के कारण

  • शरीर में फैट ज्‍यादा होना
  • अनहेल्‍दी डाइट का सेवन
  • कुछ लोगों में LEP-R जीन में बदलाव (mutation)
  • लंबे समय तक रहने वाली सूजन
  • नींद की कमी
  • स्‍ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का लेवल ज्‍यादा होना

लेप्टिन रेजिस्टेंस की जांच कैसे करें?

  • फास्टिंग ब्लड टेस्ट से लेप्टिन हार्मोन की जांच की जाती है।
  • अगर इसका स्तर 30 ng/mL से ज्यादा हो, तो यह लेप्टिन रेजि‍स्टेंस का संकेत हो सकता है।

लेप्टिन रेजिस्टेंस से कैसे बचें?

  • अच्‍छी नींद लें, द‍िन में कम से कम सात से आठ घंटे की नींद लें। इससे घ्रेलिन और लेप्टिन हार्मोन के बीच संतुलन रहेगा और लेप्टिन रेजिस्टेंस से बचने में मदद म‍िलेगी।
  • प्रोटीन र‍िच ब्रेकफास्‍ट करें। इससे घ्रेलिन हार्मोन्‍स को घटाने में मदद म‍िलती है।
  • शुगर और प्रोसेस्‍ड कार्ब्स का ज्‍यादा सेवन करने से बचें। ये लेप्टिन रेजिस्टेंस के मुख्‍य कारण बन सकते हैं इसल‍िए इनसे परहेज करें।
  • इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग की मदद से हार्मोन्‍स को संतुलि‍त करने और मोटापे से बचने में मदद म‍िलती है और इस तरह लेप्टिन रेजिस्टेंस से बचा जा सकता है।
  • रेज‍िस्‍टेंस ट्र‍ेन‍िंग और एक्‍सरसाइज पर फोकस करें। इससे मेटाबॉल‍िज्‍म बेहतर होगा और लेप्टिन रेजिस्टेंस से बचने में मदद म‍िलेगी।
  • स्‍ट्रेस को कंट्रोल करें। योग और डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज की मदद ले सकते हैं।

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GLP-1 और लेप्टिन रेजिस्टेंस का क्‍या संबंध है?

  • Dr. Vidya Tickoo ने बताया क‍ि GLP-1 एक हार्मोन है जो खाने के बाद शरीर में बनता है और ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसके अलावा GLP-1 इंसुल‍िन बढ़ाने और भूख कंट्रोल करने में मदद करता है।
  • GLP-1 और लेप्टिन रेजिस्टेंस दोनों भूख और वजन को कंट्रोल करने से संंबंध‍ित हैं इसल‍िए दोनों का कनेक्‍शन है। दोनों द‍िमाग को संकेत भेजते हैं और भूख को कंट्रोल करते हैं। लेप्टिन रेजिस्टेंस की स्थ‍ित‍ि में द‍िमाग लेप्टिन का संकेत नहीं समझ पाता है ज‍िससे भूख बढ़ती है। GLP-1 हार्मोन इस स्‍थ‍िति‍ में भूख को कम करने में मदद कर सकता है।

क्‍या GLP-1 दवाएं लेप्टिन रेजिस्टेंस के इलाज में मदद कर सकती हैं?

कई लोगों को ऐसा लगता है क‍ि GLP-1 आधारित दवाएं जैसे वेट लॉस इंजेक्‍शन लेप्टिन रेजिस्टेंस का इलाज कर सकती हैं। साल 2023 में American Diabetes Association में प्रकाश‍ित एक रिसर्च पेपर के मुताब‍िक, GLP-1 दवाएं लेप्टिन के उत्पादन को कम कर सकती हैं, लेक‍िन इनका इस्‍तेमाल लेप्टिन रेजिस्टेंस के इलाज के तौर पर नहीं क‍िया जाता है क्‍योंक‍ि GLP-1 और लेप्टिन रेजिस्टेंस के बीच के संबंध पर फ‍िलहाल सीमि‍त र‍िसर्च ही मौजूद है।

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लेप्टिन रेजिस्टेंस का इलाज

Dr. Vidya Tickoo ने बताया क‍ि लेप्टिन रेजिस्टेंस के गंभीर मामलों में डॉक्टर Semaglutide जैसी दवा को इंंजेक्‍शन के फॉर्म में लेने की सलाह देते हैं, लेक‍िन इसे डॉक्‍टर की सलाह के साथ ही लेना चाह‍िए। लेप्टिन रेजिस्टेंस का इलाज एक ही दवा से नहीं होता, बल्कि लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी होता है। लेप्टिन रेजिस्टेंस के इलाज के लिए डॉक्‍टर रोजाना लगभग 500 कैलोरी कम खाने की सलाह देते हैं। लेप्टिन रेजिस्टेंस के इलाज के ल‍िए हफ्ते में कम से कम 150 मिनट तक एरोबिक एक्सरसाइज (जैसे तेज चलना, साइकिल चलाना) करना मददगार साब‍ित हो सकता है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • तीन महीने से ज्यादा समय तक अगर फूड क्रेव‍िंग्‍स कंट्रोल न होंं।
  • बार-बार डाइट फेल होना।
  • PMOS या परिवार में ऐसी समस्या का इतिहास होना।

इन स्थितियों में जल्दी इलाज शुरू करना जरूरी है, ताकि आगे होने वाली समस्‍याओंं से बचा जा सके।

न‍िष्‍कर्ष:

लेप्टिन एक हार्मोन है जो दिमाग को यह सिग्नल देता है कि पेट भर चुका है, अब खाना बंद करें, लेक‍िन लेप्टिन रेजिस्टेंस होने पर लेप्टिन हार्मोन का संतुलन खराब हो जाता है ज‍िससे शरीर को लगता है क‍ि भूख लगी है। लेप्टिन रेजिस्टेंस के गंभीर मामलों में डॉक्टर Semaglutide जैसी दवाएं खाने की सलाह देते हैं, हालांक‍ि इसे डॉक्‍टर की सलाह के साथ ही लेना चाह‍िए। लेप्टिन रेजिस्टेंस में लाइफस्‍टाइल मैनेजमेंट भी जरूरी है इसल‍िए स्‍ट्रेस कम करना, नींद पूरी करना, वजन कंट्रोल करना और हेल्‍दी डाइट फॉलो करना असरदार साब‍ित हो सकता है।

FAQ

  • लेप्टिन हार्मोन कहांं बनता है?

    लेप्टिन हार्मोन शरीर की फैट कोशिकाओं यानी एडिपोज टिशूज में बनता है। शरीर में ज‍ितना ज्‍यादा फैट होगा, उतना ज्‍यादा लेप्टिन हार्मोन बनेगा।
  • लेप्टिन रेजिस्टेंस मह‍िलाओंं और पुरुष दोनों को होता है?

    हां यह समस्‍या दोनों को हो सकती है। हालांक‍ि मह‍िलाओं में यह समस्‍या ज्‍यादा देखी जाती है क्‍योंंक‍ि मह‍िलाओं में पीर‍ियड्स, मेनोपॉज या PCOS के कारण हार्मोनल बदलाव होते हैं।
  • लेप्टिन रेजिस्टेंस में क्‍या खाएं?

    एंटी-इंंफ्लेमेटरी फूड्स जैसे च‍िया सीड्स, हल्‍दी, अदरक, लहसुन, ओमेगा 3 फूड्स, नट्स वगैरह का सेवन कर सकते हैं।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 17, 2026 20:06 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Vidya Tickoo

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