Tue Oct 6, 2026 | 08:48 AM IST

Medically Reviewed by Dr Vineeta Singh Tandon , Sr. Consultant – Internal Medicine

क्या एंटीबायोटिक लेते समय वैक्सीन लगवाना सुरक्षित है? डॉक्टर से जानें कब कर सकते हैं वैक्सीनेशन

कई लोग इंफेक्शन के कारण एंटीबायोटिक दवाओं पर होते हैं और इसी दौरान अगर उनका वैक्सीनेशन शैड्यूल आ जाए, तो ऐसे में कई बार लोगों को कन्फ्यूजन होती है कि क्या एंटीबायोटिक के साथ वैक्सीन लगाया जा सकता है या नहीं? इस बारे में डॉक्टर ने विस्तार से बताया है।
क्या एंटीबायोटिक लेते समय वैक्सीन लगवाना सुरक्षित है? डॉक्टर से जानें कब कर सकते हैं वैक्सीनेशनक्या एंटीबायोटिक लेते समय वैक्सीन लगवाना सुरक्षित है? डॉक्टर से जानें कब कर सकते हैं वैक्सीनेशन

जब किसी को इंफेक्शन होती है, तो उसका इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए किया जा सकता है। ऐसे में अगर वैक्सीन लगवाना पड़े, तो लोगों के दिमाग में यह सवाल उठता है कि क्या एंटीबायोटिक के साथ वैक्सीन लगवाना सुरक्षित है? कुछ लोग मान लेते हैं कि एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स करने के बाद ही वैक्सीन लगवाया जा सकता है। इसकी सच्चाई जानने के लिए हमने Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि अगर इंफेक्शन हल्का है और मरीज की तबीयत नॉर्मल है, तो ज्यादातर मामलों में एंटीबायोटिक लेते हुए भी वैक्सीन लगवाई जा सकती है। हालांकि, इसका फैसला संक्रमण की गंभीरता, मरीज की सेहत और लगाई जाने वाली वैक्सीन के प्रकार को देखकर किया जाता है।

क्या एंटीबायोटिक और वैक्सीन एक साथ ली जा सकती हैं?

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “एंटीबायोटिक लेते हुए वैक्सीन लगाया जा सकता है। दरअसल, एंटीबायोटिक और वैक्सीन दोनों का काम अलग-अलग होता है। एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले इंफेक्शन का इलाज करती हैं, जबकि वैक्सीन शरीर की इम्यून सिस्टम को किसी खास बीमारी से लड़ने के लिए तैयार करती है। यही वजह है कि एंटीबायोटिक लेने से वैक्सीन की का असर कम नहीं होता।l जैसे अगर किसी को हल्का गले में इंफेक्शन, कान में संक्रमण या बैक्टीरियल साइनस इंफेक्शन है और वह एंटीबायोटिक ले रहा है और उसे तेज बुखार या गंभीर कमजोरी नहीं है, तो ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर वैक्सीन लगवाई जा सकती है।”

क्या एंटीबायोटिक वैक्सीन का असर कम कर देती है?

Cell में प्रकाशित स्टडी में एंटीबायोटिक और वैक्सीनेशन के असर पर रिसर्च की गई। इस स्टडी में दो अलग-अलग फेज में स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। एक ग्रुप को वैक्सीनेशन से तीन दिन पहले से लेकर एक दिन तक तीन एंटीबायोटिक्स दिए गए, ताकि पेट के सभी बैक्टीरिया साफ हो सकें। इन सभी वयस्कों को इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगाया गया। इसके बाद वैक्सीन से बनने वाली एंटीबॉडीज का असर चेक किया गया।

स्टडी में बताया गया कि फेज में हाई इम्यूनिटी वाले लोगों में एंटीबायोटिक लेने के बाद वैक्सीन से बनने वाली एंटीबॉडी पर कोई खास नेगेटिव असर नहीं पड़ा। वहीं फेज 2 में कम इम्यूनिटी वाले लोगों में एंटीबॉडीज का स्तर काफी कम रह गया और एंटीबॉडी की क्वालिटी पर भी बुरा असर पड़ा।

इस स्टडी से यह साबित होता है कि हाई इम्यूनिटी वाले लोगों को एंटीबायोटिक दवाएं लेने के बाद वैक्सीन लगवाने से ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ता, जबकि कम इम्यूनिटी वाले लोग अगर एंटीबायोटिक दवाएं ले रहे हैं, तो वैक्सीन लगवाने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

इस बारे में Dr. Vineeta Singh Tandon ने बताया कि आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाएं शरीर के इम्यून सिस्टम को प्रभावित नहीं करती है कि वैक्सीन बेअसर हो जाए। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति ऐसी बीमारी से जूझ रहा है जो उसकी इम्यूनिटी कमजोर हो रही है, तो यह कंडीशन अलग हो सकती है। ऐसे मामलों में मरीज की मेडिकल हिस्ट्री चेक की जाती है और फिर वैक्सीनेशन का समय तय होता है।

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किन लोगों का वैक्सीन लगाना टाला जा सकता है?

Dr. Vineeta Singh Tandon के मुताबिक, “ज्यादातर मामलों में तो एंटीबायोटिक के साथ वैक्सीन लगाई जा सकती है, लेकिन अगर मरीज को 102°F या उससे ज्यादा बुखार है, गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन हुआ है, अस्पताल में भर्ती है, सांस लेने में तकलीफ या शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी है, तो पहले मरीज की हालत को स्थिर किया जाता है और फिर स्थिति ठीक होने पर ही मरीज को वैक्सीनेशन दिया जाता है।”

किन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है?

Cleveland Clinic के अनुसार, इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर लोग बार-बार इंफेक्शन का शिकार होते हैं। बीमारी जल्दी ठीक नहीं होती, ऐसे लोगों को खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। जो इन बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें एंटीबायोटिक लेने के बाद वैक्सीनेशन डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।

  1. कुछ लोगों की जन्म से ही इम्यून सिस्टम कमजोर होता है या उम्र बढ़ने के साथ कमजोर हो जाता है।
  2. HIV सेे पीड़ित मरीज
  3. कैंसर की बीमारी से जूझ रहे मरीज
  4. कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी ले रहे मरीज
  5. डायबिटीज में लंबे समय तक ब्लड शुगर कंट्रोल न कर पाने वाले लोग
  6. सिकल सेल बीमारी
  7. लिवर सिरोसिस और वायरल हेपेटाइटिस से पीड़ित मरीज
  8. जिन लोगों ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट कराया है

डॉक्टर को कौन सी जानकारी देना जरूरी?

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “जिन लोगों का वैक्सीनेशन होना है और वे एंटीबायोटिक दवाएं ले रहे हैं, तो डॉक्टर को जरूर बताए कि कौन सी एंटीबायोटिक ले रहे हैं, दवा किसी बीमारी के लिए ले रहे हैं, बुखार है या नहीं, कोई पुरानी बीमारी या पहले किसी वैक्सीन से एलर्जी होने की जानकारी देनी चाहिए। इससे डॉक्टर को सही फैसला लेने में मदद मिलती है।”

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निष्कर्ष
Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं कि अगर इंफेक्शन बहुत हल्का है, तो वैक्सीन लगवाया जा सकता है, लेकिन गंभीर संक्रमण में डॉक्टर कुछ दिनों के लिए वैक्सीनेशन टाल सकते हैं। इसलिए खुद से फैसला लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह जरूर लें। वैक्सीनेशन के बाद हल्का बुखार या थकान महसूस होना नॉर्मल है और ये लक्षण खुद ही एक या दो दिन में चले जाते हैं।

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FAQ

  • क्या सभी वैक्सीन के लिए नियम एक जैसे होते हैं?

    नहीं। सभी वैक्सीन एक जैसी नहीं होतीं। कुछ वैक्सीन जिनमें वायरस या बैक्टीरिया का कमजोर रूप इस्तेमाल किया जाता है। वहीं कई वैक्सीन बीमारी पैदा करने वाले जीवाणु या वायरस का केवल निष्क्रिय हिस्सा मौजूद होता है। इसी वजह से डॉक्टर मरीज की बीमारी, उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और लगाई जाने वाली वैक्सीन को ध्यान में रखकर फैसला लेते हैं।
  • क्या बच्चों को एंटीबायोटिक लेते समय नियमित टीके लगवाए जा सकते हैं?

    अगर बच्चे को केवल हल्का इंफेक्शन है और वह एक्टिव है, तो उसका रूटीन वैक्सीनेशन नहीं रोकना चाहिए। हालांकि, वैक्सीन लगवाने से पहले डॉक्टर को बच्चे की चल रही दवाओं के बारे में जरूर सूचित करें।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 23, 2026 19:56 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon