मछली खाने में न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि इसमें कई तरह के पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। एक्सपर्ट्स की मानें, तो यह हाई प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड्स, विटामिन डी, बी12 और मिनरल्स भी पाए जाते हैं। हमारे देश के जिन क्षेत्रों में मछली खाई जाती है, उनके यहां यह रेगुलर डाइट का हिस्सा होता है। कुछ घरों में तो रोज मछली खाई जाती है। ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि क्या बच्चों के लिए रोजाना मछली खाना सेफ होता है? कहीं इसका कोई साइड इफेक्ट तो नहीं है, जो बच्चे की ग्रोथ पर नेगेटिव असर डाल सकता है। इस बारे में जानने के लिए हमने Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से बात की है। जवाब जानने के लिए आप भी इस लेख को पूरा पढ़ें।
क्या बच्चों के लिए रोजाना मछली खाना सेफ होता है?- Can Kids Eat Fish Everyday
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इसमें कोई दो राय नहीं है कि मछली में मौजूद पोषक तत्व बच्चों के ब्रेन डेवेलपमेंट के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए उनके लिए मछली का सेवन करना काफी फायदेमंद माना जाता है। जहां तक सवाल इस बात का है कि बच्चों के लिए रोजाना मछली खाना सेफ है या नहीं? इस बारे में एक्सपर्ट का कहना है, "बच्चे रोज मछलियां खा सकते हैं, लेकिन सीमित मात्रा में। साथ ही, उन्हें लो-मर्करी (कम पारे वाली) मछलियों का चुनाव करना चाहिए। जिन मछलियों में अधिक मात्रा में मर्करी होता है, ऐसी मछलियां बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होती है। इससे उनकी सेहत को भारी नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों की मानें, तो एक सप्ताह में दो से तीन सर्विंग काफी होती है।" healthychildren.org यह पुष्टि करती है कि बच्चों को एक सप्ताह में एक या दो बार मछली खिलाना पर्याप्त होता है।
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बच्चों के लिए मछली खाने के फायदे
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हार्ट हेल्थ में सुधार
आमतौर पर बच्चों का हार्ट हेल्थ सही होता है। वे फिजिकली एक्टिव होते हैं और उनके पैरेंट्स उनके पोषण का भी ध्यान रखते हैं। खैर, जो बच्चे नियमित रूप से मछली खाते हैं, उनकी हार्ट हेल्थ सही रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो हाई ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है। इससे हार्ट स्ट्रोक और कार्डियक डिजीज का रिस्क कम होता है।
बेहतर ब्रेन फंक्शन
मछली में डीएचए होता है। यह बच्चों की ब्रेन डेवेलपमेंट के लिए बहुत जरूरी पोषक तत्व है। मौजूदा समय में हमने देखा है कि जो बच्चे नियमित रूप फिजिकली एक्टिव नहीं रहते हैं, आउटडोर गेम्स नहीं खेलते हैं और अच्छी डाइट फॉलो नहीं करते हैं। ऐसे में बच्चों में याददाश्त से जुड़ी समस्या हो जाती है। वहीं, जो बच्चे नियमित रूप से मछली खाते हैं, उनमें मेमोरी से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं। यहां तक कि अधिक उम्र में अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी समस्याओं का जोखिम भी कम होता है।
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मेंटल हेल्थ में सुधार
बच्चों की मेंटल हेल्थ सही रहना बहुत जरूरी है। उनकी मेंटल हेल्थ, फिजिकल हेल्थ को सपोर्ट करती है। मछली में तरह-तरह के पोषक तत्व होते हैं, जैसे आयोडीन, विटामिन बी12, बी, विटामिन डी, फास्फोरस, आयरन, जिंक, मैग्नीशियम और पोटैशियम आदि। इनमें से कुछ पोषक तत्व ऐसे हैं, जो डिप्रेशन और एंग्जाइटी को कम करने में भी मदद करते हैं।
हड्डियों को मजबूती
हड्डियों के लिए विटामिन डी बहुत जरूरी पोषक तत्व होता है। विशेषकर, बच्चों के लिए बहुत जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी की मदद से उनकी हड्डियों को मजबूती मिलती है। जब बच्चे अपनी बैलेंस्ड डाइट में मछलियों को शामिल करते हैं, जो इससे विटामिन डी को अवशोषित करने में मदद मिलती है।
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निष्कर्ष
कोई भी चीज रोजाना खाना सही नहीं होता है। अपनी डाइट में तरह-तरह की चीजों को शामिल करना अच्छा होता है। ऐसा ही बच्चों की डाइट के लिए भी कहा जा सकता है। बच्चों के लिए मछली खाना अच्छा है, लेकिन पैरेंट्स को चाहिए कि वे इसे उनकी बैलेंस्ड डाइट का पार्ट बनाएं। बच्चों को सिर्फ मछली खाने के लिए न दें। इससे उनके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। यह उनके विकास के लिए भी सही नहीं होगा।
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FAQ
बच्चों के लिए कौन सी मछलियां अच्छी मानी जाती हैं?
बच्चों के लिए Low Mercury) वाली मछलियां अच्छी होती हैं। इनमें रोहू, कतला, साल्मन, कॉप , शामिल हैं। इनमें ओमेगा-3 भरपूर होता है और मर्करी का स्तर भी कम होता है।मर्करी की अधिकता वाली मछलियों से बच्चों को क्या नुकसान हो सकते हैं?
जिन मछलियों में अधिक मर्करी होती हैं, बच्चों को उनका सेवन नहीं करना चाहिए। इसे उनका मानसिक प्रभावित होता है और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुच सकता है।क्या बच्चों को कच्ची मछली (जैसे सुशी) खिलाना सेफ है?
नहीं, बच्चों को कभी भी कच्ची या अधपकी मछली खाने के लिए नहीं देनी चाहिए। इससे उनमें साल्मोनेला या अन्य हानिकारक बैक्टीरिया के कारण फूड पॉइजनिंग का जोखिम बढ़ जाता है।
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Jan 23, 2026 11:03 IST
Modified By : Meera Tagore Jan 23, 2026 11:03 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dt Divya Gandhi