Papaya increase blood platelets: डेंगू, मच्छरों से होने वाली बीमारी है जिसमें शरीर के प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं क्योंकि वायरस आपके बोन मैरो में प्लेटलेट्स बनने की रफ्तार कम कर देता है। इतना ही नहीं, वायरस से लड़ने के लिए बनी एंटीबॉडीज हेल्दी प्लेटलेट्स को खतरा समझकर उन्हें नष्ट कर देती हैं इससे भी शरीर का प्लेटलेट कम होने लगता है। ऐसे में तेज बुखार के साथ जोड़ों के दर्द से शरीर लगातार कमजोर होने लगता है। इस स्थिति में हमेशा से लोग पपीते के पत्ते का उपयोग करने का सुझाव देते आए हैं लेकिन क्यों? क्या सच में पपीते के पत्ते का अर्क प्लेटलेट काउंट बढ़ा सकता है इस बारे में विस्तार से जानकारी के लिए हमने Ms. Edwina Raj, Head of Services - Clinical Nutrition & Dietetics, Aster CMI Hospital, Bangaluru से बात की।
प्लेटलेट बढ़ाने में कैसे मददगार है पपीते का पत्ता?
डाइट एक्सपर्ट एडविना राज बताती हैं कि डेंगू के दौरान पपीते के पत्तों से बनी चीजों का काफी प्रचार किया जाता है क्योंकि कुछ छोटे क्लिनिकल अध्ययनों में प्लेटलेट काउंट में बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन इसके बारे में अभी भी सीमित और कम गुणवत्ता वाले सबूत ही मौजूद हैं। साथ ही, सिस्टमैटिक रिव्यू से यह निष्कर्ष निकला है कि पपीते के पत्ते के अर्क को डेंगू के प्रमाणित इलाज या गंभीर जटिलताओं से बचने के भरोसेमंद तरीके के तौर पर सुझाने के लिए पर्याप्त मजबूत सबूत नहीं हैं।
क्या कहती है स्टडी?
Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित इस रिसर्च बताया गया है कि डेंगू जो प्लेटलेट काउंट में कमी का कारण बनती है, इस बीमारी में पपीते की पत्तियों के अर्क को प्लेटलेट काउंट बढ़ाने में असरदार पाया गया है। कैरिका पपाया, जिसे आमतौर पर पपीते के नाम से जाना जाता है, में फ्लेवोनोइड्स, विटामिन और एंजाइम सहित विभिन्न फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जो इसके चिकित्सीय प्रभावों में योगदान दे सकते हैं। पपीता अपने एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-थ्रोम्बोसाइटोपेनिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। पपीते के एक्टिव इंग्रीडिएंट्स एराकिडोनेट 12-लिपोक्सीजिनेज (ALOX 12) और प्लेटलेट-एक्टिवेटिंग फैक्टर रिसेप्टर (PTAFR) जीन की अभिव्यक्ति को बढ़ाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप मेगाकारियोसाइट उत्पादन को बढ़ाते हैं और उनका प्लेटलेट्स में परिवर्तन होता है।
इस स्टडी में आगे ये भी बताया गया है कि पपीते के पत्तों के अर्क में मौजूद फ्लेवोनोइड्स झिल्लियों को स्थिर करने की क्षमता में योगदान करते हैं, जिससे ब्लड वेसेल्स के इंटर्नल ब्लीडिंग को रोका जा सकता है और इम्यूनिटी बढ़ाकर इस बीमारी से लड़ा जा सकता है।
dengue
NIH की इस स्टडी में एक केस स्टडी की चर्चा है जिसमें 65 साल की एक महिला लगातार बुखार, पेट दर्द और थ्रोम्बोसाइटोपेनिया यानी प्लेटलेट काउंट में कमी से गुजर रही थी। इस महिला के इलाज में पपीते के पत्ते का पतला अर्क (diluted extract) शामिल करने के बाद, दो दिनों के भीतर उसका प्लेटलेट काउंट काफी बढ़कर 122.7 x 109/L हो गया और बाद की जांच में यह सामान्य स्तर पर आ गया। यह मामला बताता है कि डेंगू के मरीज़ों में पारंपरिक सपोर्टिव केयर के साथ पपीते (Carica papaya) के पत्ते का अर्क इस्तेमाल करने से प्लेटलेट काउंट बढ़ाने में फ़ायदा हो सकता है।
शुरुआत में प्लेटलेट का स्तर 74,000 था, लेकिन नाक से दोबारा खून बहने के बाद यह घटकर 30,650 हो गया। इसके बाद, मरीज़ के जीवनसाथी ने उन्हें ताज़े पपीते के पत्तों का अर्क दिन में तीन से चार बार पिलाया, जिससे 14वें दिन प्लेटलेट की संख्या बढ़कर 1,20,320 हो गई। प्लेटलेट के स्तर में गिरावट की समय पर पहचान और पपीते के पत्तों के अर्क (C. Papaya leaf extract) का सेवन शुरू करने से जान जाने का ख़तरा टालने में बड़ी मदद मिली।
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प्लेटलेट बढ़ाने के लिए पपीते के पत्ते का सही उपयोग कैसे करें?
प्लेटलेट बढ़ाने के लिए आपको करना ये है कि पपीते के पत्ते को उबाल लें और इसका अर्क तैयार करें और दिनभर में लगभग दो बार आधा कप अर्क पिएं। ध्यान रखें कि आपको पपीते के पत्ते को अच्छी तरह से उबालकर एक गाढ़ा अर्क तैयार करना है।
निष्कर्ष:
डाइट एक्सपर्ट एडविना राज बताती हैं कि घर पर बने पपीते के पत्तों के जूस के लिए कोई मेडिकल तौर पर तय मानक डोज, बनाने का तरीका या समय नहीं है। इसलिए मरीजो को यह नहीं मान लेना चाहिए कि ताजी पत्तियों को पीसकर और एक खास मात्रा में उनका जूस पीने से प्लेटलेट्स सुरक्षित रूप से बढ़ जाएंगे। खासकर बिना डॉक्टर की सलाह के गाढ़े मिश्रण या बिना रेगुलेशन वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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डाइट एक्सपर्ट एडविना सलाह देती हैं कि डेंगू के दौरान सही तरीका यह है कि इलाज करने वाले डॉक्टर की सलाह मानी जाए, शरीर में पानी और पोषण की सही मात्रा बनाए रखी जाए, सलाह मिलने पर ब्लड काउंट की जांच कराई जाए और चेतावनी वाले लक्षणों जैसे लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, ब्लीडिंग, बहुत ज्यादा कमजोरी, बेचैनी या सांस लेने में तकलीफ पर नजर रखी जाए। ऐसा इसलिए है क्योंकि सिर्फ प्लेटलेट की संख्या से यह पता नहीं चलता कि डेंगू कितना गंभीर है, और पपीते के पत्तों के जूस पर निर्भर रहने से जरूरी मेडिकल इलाज में देरी हो सकती है।
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FAQ
डेंगू फीवर कितने दिन रहता है?
डेंगू का बुखार 7 दिनों तक रहता है। कई बार ठीक होने में 14 दिन से ज्यादा समय लग सकता है क्योंकि इसमें मरीज को ज्यादा कमजोरी होती है।डेंगू में क्या खाना चाहिए?
डेंगू में रिकवरी के लिए आपको ज्यादा से ज्यादा तरह पदार्थ लेना चाहिए जैसे नारियल पानी, नींबू पानी और ओआरएस। इसके अलावा पपीते के पत्तों का रस, कीवी, सब्जियों और दाल का पानी ले सकते है।
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Aug 19, 2026 18:51 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Edwina Raj
