Thu Sep 24, 2026 | 07:47 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

घर पर ब्लड शुगर कैसे चेक करें? डॉक्‍टर से जानें ग्लूकोमीटर इस्तेमाल करने का सही तरीका और सावधान‍ियां

अगर आप भी शुगर लेवल को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो उसे समय-समय पर चेक करना जरूरी है। आइए जानते हैं घर बैठे कैसे शुगर लेवल को आसानी से चेक क‍िया जा सकता है?
घर पर ब्लड शुगर कैसे चेक करें? डॉक्‍टर से जानें ग्लूकोमीटर इस्तेमाल करने का सही तरीका और सावधान‍ियांघर पर ब्लड शुगर कैसे चेक करें? डॉक्‍टर से जानें ग्लूकोमीटर इस्तेमाल करने का सही तरीका और सावधान‍ियां

नॉन-डायब‍िट‍िक और डायब‍िट‍िक मरीजों को अक्‍सर समय-समय पर ब्‍लड शुगर लेवल चेक करने की सलाह दी जाती है। लैब टेस्‍ट के अलावा घर बैठे भी ग्‍लूकोमीटर की मदद ले ब्‍लड शुगर लेवल चेक कर सकते हैं। बाजार में कई तरह के ग्‍लूकोमीटर म‍िलते हैं। एक को खरीद लें। शुगर लेवल की जांच के ल‍िए ग्‍लूकोमीटर के अलावा स्‍ट्र‍िप्‍स, नीडल और लैंसेट की जरूरत भी होती है। आइए जानते हैं घर पर ग्‍लूकोमीटर की मदद से ब्‍लड शुगर लेवल टेस्‍ट करने का सही तरीका और जरूरी सावधान‍ियां। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

घर बैठे ब्‍लड शुगर लेवल कैसे चेक करें?

how-to-check-blood-sugar-level-at-homehow-to-check-blood-sugar-level-at-home

  • ग्‍लूकोमीटर मशीन को ऑन करें।
  • अब स्‍ट्र‍िप को ग्‍लूकोमीटर मशीन में इंसर्ट करें।
  • स्‍ट्र‍िप में एक तीर बना होगा और वो ही साइड ग्‍लूकोमीटर के अंदर जाएगी।
  • जैसे ही स्‍ट्र‍िप ठीक ढंग से ग्‍लूकोमीटर में लग जाएगी, तो स्‍क्रीन पर एक स‍िंबल नजर आने लगेगा।
  • अब लैंसेट को ठीक बीच से रोटेट करके खोल लें।
  • अब नीडल को लैंसेट में इंसर्ट करें।
  • नीडल के ऊपर लगे कैप को हटा दें।
  • लैंसेट पर प्र‍िक करने की स्‍पीड की कई सेट‍िंग दी होती है। ज‍िन लोगों की उंगली ज्‍यादा मोटी होती है, वे ज्‍यादा स्‍पीड को चुन सकते हैं। शुरू में कम स्‍पीड पर ही उंगली को प्र‍िक करें।
  • अब लैंसेट में मौजूद बटन को दबाएं और उंगली को प्र‍िक करें।
  • अब ब्‍लड को स्‍ट्र‍िप पर टच करें।
  • इसके बाद स्‍क्रीन पर ब्‍लड शुगर लेवल द‍िखाई देने लगेगा।

जरूरी सावधान‍ियां

  • रीडिंग का समय नोट करें, जैसे खाली पेट, खाने से पहले या खाने के 2 घंटे बाद।
  • अगर रीडिंग आपकी सामान्य रीडिंग से बहुत ज्यादा या बहुत कम आए, तो दोबारा जांच करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
  • ग्लूकोमीटर की रीडिंग को HbA1c का विकल्प न मानें। HbA1c टेस्‍ट के लिए अलग ब्‍लड टेस्‍ट की जरूरत होती है।
  • अगर बार-बार रीडिंग असामान्य आ रही है, तो केवल घर की जांच के आधार पर दवा की खुराक में बदलाव न करें।
  • साथ ही, ध्‍यान रखें क‍ि लैब टेस्‍ट और ग्‍लूकोमीटर रीड‍िंग में अंतर हो सकता है इसल‍िए डॉक्‍टर से सलाह लें।

यह भी पढ़ें- डायबिटीज में मीठा छोड़ने के बाद भी शुगर क्यों बढ़ती है? इन 5 छिपे कारणों पर दें ध्यान

एक हाई रीड‍िंग देखकर पैन‍िक न हों

टेस्‍ट      सामान्‍य ब्‍लड शुगर रेंज 
फास्टिंग ब्लड शुगर       70 से 99 mg/dL के बीच होना चाह‍िए

पोस्टप्रांडियल ब्लड शुगर

140 mg/dL से कम होना चाह‍िए
HbA1c टेस्ट         5.7 से कम होना चाह‍िए

कई बार मरीज ग्‍लूकोमीटर पर एक हाई रीड‍िंग देखकर पैनि‍क होने लगते हैं, जबक‍ि ब्‍लड शुगर लेवल को कई फैक्‍टर्स प्रभाव‍ित करते हैं जैसे क्‍या खाया? क‍ितनी मात्रा में खाया? कब खाया? स्‍ट्रेस लेवल क्‍या था? नींद कैसी थी? वगैरह। एक या दो रीड‍िंग हाई या लो आने पर डॉक्‍टर दवा की डोज बदलने की सलाह भी नहीं देते हैं।

गलत टाइम पर शुगर चेक न करें

अगर सही समय पर शुगर लेवल चेक नहीं करेंगे, तो रीड‍िंग गलत आ सकती है इसल‍िए इन बातों का ध्‍यान रखें-

  • पहला न‍िवाला खाने के दो घंटे बाद ब्‍लड शुगर लेवल चेक क‍िया जाता है।
  • फास्‍ट‍िंग ब्‍लड शुगर का मतलब है सुबह उठने के बाद खाली पेट पहली रीड‍िंग लेना। ये रीड‍िंग उठते ही लें, इसके बाद वॉक या एक्‍सरसाइज करें। फास्‍ट‍िंग ब्‍लड शुगर के 8 से 10 घंटे पहले कुछ खाया हुआ नहीं होना चाह‍िए। हालांक‍ि, पानी पी सकते हैं।

ब्‍लड शुगर चेक करने का सही समय क्‍या है?

  • सुबह उठते ही, कुछ भी खाने या पीने से पहले।
  • खाना खाने से पहले।
  • खाना खाने के 2 घंटे बाद।
  • सोने से पहले।

रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC or Centers For Disease Control And Prevention) के मुताब‍िक,

  • अगर आपको टाइप 1 डायबिटीज है,
  • टाइप 2 डायबिटीज में इंसुलिन लेते हैं या
  • आपका ब्लड शुगर अक्सर कम हो जाता है, तो डॉक्टर आपको इससे ज्यादा बार ब्लड शुगर जांचने की सलाह दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक्‍सरसाइज से पहले और बाद में भी ब्लड शुगर चेक करने को कहा जा सकता है।

शुगर टेस्‍ट के ल‍िए उंगली प्र‍िक करने का सही तरीका

  • जब भी ग्‍लूकोमीटर का इस्‍तेमाल करना हो, हाथों को दो से तीन म‍िनट रब करके अच्‍छी तरह वॉर्म करें।
  • इस तरह उंगली से ब्‍लड न‍िकालने में आसानी होगी।
  • हाथों से उंगल‍ी की मसाज करें। ब्‍लड को ट‍िप तक ले जाते हुए मसाज करें।
  • इसके बाद उंगली को प्र‍िक करें।
  • हाथों को नीचे की तरफ रखें और लेंसेट की गहराई के मुताब‍िक, उंगली को एडजस्‍ट करें।

यह भी पढ़ें- डायबिटीज का इलाज न कराने के क्या नुकसान हो सकते हैं? डॉक्टर से जानें

ग्‍लूकोमीटर से रीड‍िंग लेते समय इन गलत‍ियों से बचें

कई बार ग्‍लूकोमीटर की रीड‍िंग ज्‍यादा होती है, लेक‍िन ब्‍लड शुगर लेवल उतना होता नहीं है। ऐसा इसल‍िए होता है क्‍योंक‍ि अक्‍सर लोग ग्‍लूकोमीटर का इस्‍तेमाल करते समय कई गलत‍ियां कर बैठते हैं ज‍िससे ब्‍लड शुगर लेवल की रीड‍िंग गलत आती है। जानें ऐसी कुछ कॉमन गलत‍ियों के बारे में-

1. गंदे हाथों से ब्‍लड शुगर चेक करना

कई बार लोग गंदे हाथों से या खाने के बाद हाथ धोए बगैर ग्‍लूकोमीटर का इस्‍तेमाल करने लगते हैं, लेक‍िन हाथ गंदे होने के कारण रीड‍िंग भी गलत आ सकती है इसल‍िए ग्‍लूकोमीटर का इस्‍तेमाल करने से पहले हाथों को पानी और साबुन की मदद से अच्‍छी तरह से साफ करें।

2. गीले हा‍थों से शुगर चेक करना

ज‍िस तरह गंदे हाथों से ग्‍लूकोमीटर का इस्‍तेमाल नहीं करना चाह‍िए, उसी तरह गीले हाथों से भी शुगर रीड‍ि‍ंग नहीं लेना चाह‍िए। अगर आपके हाथ गीले हैं, तो पहले हाथों को सुखा लें और फि‍र ग्‍लूकोमीटर का इस्‍तेमाल करें। अगर गीली उंगली से ब्‍लड टेस्‍ट करेंगे, तो पानी ब्‍लड के साथ म‍िलकर गलत रीड‍िंग दे सकता है।

3. उंगली को तेज दबाना

अक्‍सर लोग उंगली को प्र‍िक करने के ल‍ि‍ए तेज दबाते हैं, लेक‍िन यह सही तरीका नहीं है। ब्‍लड नेचुरली आना चाह‍िए, उंगली को तेज दबाने से बचना चाह‍िए।

4. उंगली के बीच में प्रि‍क करना

कुछ लोग उंगली के ठीक बीच में प्रि‍क करते हैं। इसके बजाय, उंगली के साइड में प्र‍िक करना चाह‍िए। इससे दर्द थोड़ा कम होगा और शुगर टेस्‍ट थोड़ा आरामदायक रहेगा।

5. खराब ग्‍लूकोमीटर स्‍ट्र‍िप्‍स का इस्‍तेमाल

ग्‍लूकाेमीटर स्‍ट्र‍िप्‍स में नमी जल्‍दी जमा होती है। इससे रीड‍िंग खराब आ सकती है। इन स्‍ट्र‍िप्‍स को क‍िचन, बॉथरूम या कार में न रखें। स्‍ट्र‍िप्‍स को एयर टाइट कंटेनर में ही रखें। इन्‍हें बाहर रखने से बचें। साथ ही, एक्‍सपायरी डेट चेक करें। स्‍ट्र‍िप के दो साइड होते हैं- पहला जो ग्‍लूकोमीटर में जाता है और एक ज‍िस पर ब्‍लड न‍िकलता है। स्‍ट्र‍िप को उठाते समय उसे कोने से नहीं पकड़ना चाह‍िए, इसे बीच से पकड़ें।

न‍िष्‍कर्ष:

शुगर लेवल की जांच के ल‍िए ग्‍लूकोमीटर के अलावा स्‍ट्र‍िप्‍स, नीडल और लैंसेट की जरूरत होती है। ग्‍लूकोमीटर में स्‍ट्र‍िप और लैंसेट में नीडल लगाने के बाद, उंगली पर नीडल को प्र‍िक करके शुगर टेस्‍ट आसानी से कर सकते हैं। हालांक‍ि, कई बार जब लोग घर पर शुगर टेस्‍ट करते हैं, तो वह ज्‍यादा या कम आता है। इसके पीछे कई गलति‍यां हो सकती हैं जैसे- गंदे हाथों से ब्‍लड शुगर चेक करना, गीले हा‍थों से शुगर चेक करना, उंगली को तेज दबाना, उंगली के बीच में प्रि‍क करना, खराब ग्‍लूकोमीटर स्‍ट्र‍िप्‍स का इस्‍तेमाल करना वगैरह। जब भी ग्‍लूकोमीटर का इस्‍तेमाल करना हो, हाथों को दो से तीन म‍िनट रब करके अच्‍छी तरह वॉर्म करें। इस तरह उंगली से ब्‍लड न‍िकालने में आसानी होगी। सुबह उठते ही, कुछ भी खाने या पीने से पहले, खाना खाने से पहले, खाना खाने के 2 घंटे बाद और सोने से पहले ब्‍लड शुगर लेवल की जांच कर सकते हैं।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या ग्‍लूकोमीटर की टेस्ट स्ट्रिप दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं?

    नहीं, टेस्ट स्ट्रिप को दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हर बार जांच के लिए नई स्ट्रिप का इस्तेमाल करना चाह‍िए।
  • अगर ब्लड शुगर बहुत कम आए तो क्या करें?

    ग्‍लूकोमीटर में शुगर लेवल बहुत कम आने पर पैन‍िक न हों। लक्षणों पर गौर करें। अगर कंपकंपी, पसीना, कमजोरी, चक्कर महसूस हो, तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

Read Next

केवल सीने में दर्द नहीं, हार्ट अटैक से पहले शरीर दे सकता है ये 5 संकेत, न करें लापरवाही

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Sep 24, 2026 18:33 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content