Thu Nov 5, 2026 | 11:21 PM IST

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प्रदूषण बढ़ने पर बुजुर्गों के दिल और फेफड़ों पर क्या असर पड़ता है? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

प्रदूषण बढ़ने से बुजुर्गों में सांस लेने में परेशानी, अस्थमा और हार्ट संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यहां डॉक्टर से जानिए, किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
प्रदूषण बढ़ने पर बुजुर्गों के दिल और फेफड़ों पर क्या असर पड़ता है? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाजप्रदूषण बढ़ने पर बुजुर्गों के दिल और फेफड़ों पर क्या असर पड़ता है? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

सर्दियों की शुरुआत होते ही देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण का लेवल बढ़ने लगता है। हवा में धूल, धुआं और छोटे-छोटे प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ने से लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है लेकिन खराब हवा का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर पड़ सकता है। खासकर 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को प्रदूषण के दौरान अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। KIMS हॉस्पिटल्स, महादेवपुरा बेंगलुरु के लीड और सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, कई बार प्रदूषण के कारण होने वाली थकान, सांस फूलना या सीने में भारीपन को लोग बढ़ती उम्र का सामान्य असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन कुछ लक्षण गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकते हैं।

प्रदूषण का बुजुर्गों के दिल और फेफड़ों पर क्या असर होता है?

प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं। इनमें PM2.5 के कण इतने छोटे होते हैं कि ये फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं और सूजन पैदा कर सकते हैं। इससे बुजुर्गों को खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न और गले में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

जिन लोगों को पहले से अस्थमा या सीओपीडी की समस्या है, उनमें प्रदूषण के कारण बीमारी के लक्षण बढ़ सकते हैं। कई बार सांस फूलने और लगातार खांसी की समस्या भी गंभीर रूप ले सकती है। उम्र बढ़ने के साथ फेफड़ों की क्षमता कम हो सकती है, इसलिए बुजुर्गों के लिए प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहना ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है।

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  • वायु प्रदूषण का असर केवल रेस्पिरेटरी सिस्टम पर नहीं, बल्कि हार्ट और रक्त वाहिकाओं यानी ब्लड वैसेल्स पर भी पड़ता है।
  • प्रदूषण के सूक्ष्म कण शरीर में पहुंचकर सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं। इससे ब्लड वैसेल्स के सामान्य कामकाज पर असर पड़ सकता है।
  • इसके अलावा, प्रदूषण के संपर्क में आने से ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में बदलाव हो सकता है।
  • जिन बुजुर्गों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज या डायबिटीज है, उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
  • इसलिए खराब एयर क्वालिटी के दौरान बुजुर्गों को अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, प्रदूषण के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य खांसी या थकान जैसे लग सकते हैं लेकिन बुजुर्गों में कुछ लक्षणों को गंभीरता से लेना जरूरी है-

  • नॉर्मल से ज्यादा सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी होना।
  • लगातार खांसी या सीने में जकड़न महसूस होना।
  • थोड़ी दूर चलने पर भी बहुत ज्यादा थकान होना।
  • सीने में दर्द, दबाव या भारीपन महसूस होना।
  • दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज या अनियमित होना।
  • चक्कर आना या अचानक कमजोरी महसूस होना।

अगर किसी बुजुर्ग को सीने में तेज दर्द, अचानक सांस लेने में परेशानी, बेहोशी या स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए। ऐसे लक्षणों को केवल प्रदूषण का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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साल 2022 में Pharmacology & Therapeutics जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, वायु प्रदूषण, विशेष रूप से हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (Particulate Matter), दिल की बीमारियों और मौतों का एक बहुत बड़ा कारण है। इन प्रदूषकों से ब्लड प्रेशर, ब्लड के थक्के जमने और दिल की धमनियों पर बुरा असर पड़ता है।

वैज्ञानिकों ने इन नुकसानों को रोकने के लिए कई दवाओं (Pharmacological agents) का अध्ययन किया है, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि प्रदूषण हमारे दिल को कैसे नुकसान पहुंचाता है। भविष्य में ये दवाएं प्रदूषण के प्रति संवेदनशील लोगों की जान बचाने और उनके दिल की सुरक्षा करने में मददगार साबित हो सकती हैं।

क्या सावधानियां बरतें?

प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज सलाह देते हैं कि बुजुर्गों को खराब एयर क्वालिटी के दौरान घर से बाहर निकलने और फिजिकल एक्टिविटीज को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें-

  • AQI बहुत खराब होने पर सुबह और शाम की आउटडोर वॉक से बचें।
  • बाहर निकलना जरूरी हो, तो अच्छी फिटिंग वाला N95 या समकक्ष मास्क पहनें।
  • घर में खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें, जब बाहर प्रदूषण का लेवल ज्यादा हो।
  • डॉक्टर की बताई दवाएं नियमित रूप से लें और इन्हेलर का इस्तेमाल समय से और सही तरीके से करें।
  • पर्याप्त पानी पिएं और बैलेंस डाइट लें।
  • सांस या दिल से जुड़ी परेशानी बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

निष्कर्ष

वायु प्रदूषण बुजुर्गों के फेफड़ों और दिल दोनों को प्रभावित कर सकता है। खासकर अस्थमा, सीओपीडी, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज से पीड़ित बुजुर्गों को खराब एयर क्वालिटी के दौरान ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द और असामान्य धड़कन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। प्रदूषण के लेवल के अनुसार अपने डेली रूटीन में बदलाव करें और जरूरी सावधानियां अपनाएं। किसी भी गंभीर लक्षण की स्थिति में तुरंत डॉक्टर की मदद लें।

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FAQ

  • क्या एयर प्यूरीफायर लगाने से घर के अंदर प्रदूषण पूरी तरह खत्म हो जाता है?

    नहीं, एयर प्यूरीफायर घर के अंदर मौजूद कुछ प्रदूषक कणों को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन यह सभी तरह के प्रदूषण को खत्म नहीं करता। 
  • क्या प्रदूषण के कारण ज्यादा खांसी आती है?

    हां, प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से कुछ लोगों को रात में खांसी या सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 05, 2026 23:02 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
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