इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी आईवीएफ उन कपल्स के लिए उम्मीद की एक किरण है, जिन्हें नेचुरल तरीके से कंसीव करने में परेशानी होती है। हालांकि, आईवीएफ की सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें महिला की उम्र एक अहम भूमिका निभाती है। KIMS अस्पताल, इलेक्ट्रॉनिक सिटी, बेंगलुरु के प्रसूति, स्त्री रोग विभाग की निदेशक और कंसल्टेंट, डॉ. लावण्या किरण के अनुसार, अक्सर माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ केवल अंडों की संख्या कम होती है, लेकिन वास्तव में उम्र का असर अंडों की क्वालिटी, भ्रूण के विकास और कंसीव करने की संभावना पर भी पड़ सकता है। 30 और 40 साल की उम्र में IVF कराने के रिजल्ट में अंतर देखने को मिल सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि उम्र बढ़ने पर फर्टिलिटी में क्या बदलाव आते हैं और IVF की प्रोसेस किस तरह प्रभावित हो सकती है।
30 की उम्र में IVF और 40 की उम्र में IVF: क्या बदल जाता है?
डॉ. लावण्या किरण के अनुसार, महिला की उम्र बढ़ने के साथ अंडे की गुणवत्ता (Egg quality) में भी बदलाव आ सकता है। आमतौर पर 30 साल की उम्र में अंडों में क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताओं की संभावना 40 साल की तुलना में कम होती है। वहीं, 40 साल की उम्र के आस-पास अंडों में क्रोमोसोम संबंधी गड़बड़ियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसका असर फर्टिलाइजेशन और हेल्दी एम्ब्रियो बनने की संभावना पर पड़ सकता है।
| तुलनात्मक कारक | 30 की उम्र में IVF | 40 की उम्र में IVF |
| सामान्य क्रोमोसोम वाले एम्ब्रियो की संभावना | इस उम्र में सामान्य क्रोमोसोम वाले हेल्दी एम्ब्रियो मिलने की संभावना औसतन ज्यादा होती है। | उम्र बढ़ने के साथ क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताओं की संभावना बढ़ती है, जिससे नॉर्मल एम्ब्रियो मिलने की संभावना कम हो सकती है। |
| IVF साइकिल की जरूरत | आमतौर पर कम साइकिल में या एक बार में ही सफलता मिलने की संभावना ज्यादा रहती है। | एक से ज्यादा IVF साइकिल या अतिरिक्त प्रयासों की जरूरत पड़ सकती है। |
| मिसकैरिज का जोखिम | भ्रूण यानी एम्ब्रियो में आनुवंशिक या क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताएं कम होने के कारण शुरुआती मिसकैरिज का जोखिम कम होता है। | क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताओं के कारण कंसीव न हो पाने या शुरुआती मिसकैरिज का जोखिम बढ़ जाता है। |
| प्रेग्नेंसी से जुड़ी समस्याएं | हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी समस्याओं का जोखिम तुलनात्मक रूप से कम होता है। | उम्र बढ़ने के साथ हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और अन्य जटिलताओं का जोखिम बढ़ जाता है। |
| ओवेरियन रिजर्व और अंडे की क्वालिटी | ओवरी में ओवेरियन रिजर्व और अंडों की क्वालिटी आमतौर पर बेहतर होती है। | ओवेरियन रिजर्व और अंडों की क्वालिटी में नेचुरल रूप से गिरावट आ सकती है। |
| सफलता की संभावना | पर्सनल हेल्थ और अन्य कारकों के अनुकूल होने पर सफलता दर सामान्यतौर पर ज्यादा होती है। | हालांकि सफलता संभव है और कई महिलाओं को इस उम्र में भी सफलता मिलती है, लेकिन जोखिमों का आकलन ज्यादा सावधानी से करना पड़ता है। |
साल 2013 में Journal of Assisted Reproduction and Genetics में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, 43 और 44 की उम्र की महिलाओं में IVF या ICSI से गर्भधारण और जीवित बच्चे के जन्म की संभावना 8.3% और 5.3% तक होती है। 45 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र की महिलाओं में अपने अंडों से गर्भधारण संभव नहीं पाया गया।
चूंकि अधिकांश सफलता पहले 3 साइकिल में ही मिल जाती है, इसलिए जिन महिलाओं के पिछले दो प्रयास असफल रहे हैं, वे डोनर एग (Oocyte Donation) का सहारा लेने से पहले एक और प्रयास कर सकती हैं। संक्षेप में, 44 वर्ष की उम्र तक IVF की सफलता पाना संभव है, लेकिन 45 वर्ष के बाद अपने अंडों से फायदा नहीं मिलता।
How Age Impacts IVF Success
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क्या 40 की उम्र में IVF कराने के लिए देर हो चुकी है?
डॉ. लावण्या किरण बताती हैं कि ऐसा जरूरी नहीं है। 40 साल की उम्र में भी आईवीएफ के जरिए कंसीव करना संभव है, लेकिन सफलता की संभावना महिला की उम्र, अंडों की क्वालिटी, अंडाशय रिजर्व (Ovarian reserve) और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसलिए केवल उम्र के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं है कि IVF सफल होगा या नहीं।
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निष्कर्ष
30 और 40 साल की उम्र में IVF का अंतर केवल अंडों की संख्या तक सीमित नहीं है। उम्र का असर अंडों की क्वालिटी, भ्रूण के क्रोमोसोम, मिसकैरिज की संभावना और प्रेग्नेंसी से जुड़े जोखिमों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, हर महिला की फर्टिलिटी अलग होती है और 40 साल की उम्र में भी IVF से सफलता मिल सकती है।
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FAQ
IVF कराने से पहले कौन-कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?
IVF से पहले महिला की हार्मोनल जांच, AMH टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और जरूरत के अनुसार यूट्रस की जांच की जा सकती है। पुरुष के लिए सीमेन एनालिसिस किया जाता है।क्या IVF में पहली बार में ही प्रेग्नेंसी हो सकती है?
हां, कुछ महिलाओं में पहली IVF साइकिल में ही गर्भधारण हो जाता है। हालांकि, हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है और कुछ मामलों में एक से ज्यादा साइकिल की जरूरत पड़ सकती है।IVF में कितने दिन तक इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं?
अंडाशय को उत्तेजित (Stimulating) करने के लिए आमतौर पर करीब 8-14 दिनों तक हार्मोनल इंजेक्शन दिए जा सकते हैं।
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Oct 15, 2026 11:31 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Lavanya Kiran
