डायबिटिक मरीजों को अक्सर हेल्दी फूड्स खाने की सलाह दी जाती है और दाल इनमें से ही एक है। दाल प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है। डायबिटिक मरीजों के लिए चना दाल, मसूर दाल, हरी और पीली मूंग दाल और फलियां जैसे राजमा, काले सेम, चने को डाइट में शामिल कर सकते हैं। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर ग्लूकोज को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है और उसका स्तर शरीर में असंतुलित हो जाता है। डायबिटीज मैनेजमेंट में डाइट एक अहम भूमिका निभाती है। हमारे ब्लड में मौजूद शुगर, हमें खाने से ही मिलती है। हम जो भी खाते हैं, उसका सीधा असर ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है। ऐसे में दालें, डायबिटिक मरीजों की डाइट के लिए सेहतमंद हो सकती हैं। आइए जानते हैं ऐसी 5 दालों के बारे में जो ब्लड शुगर मैनेजमेंट को सपोर्ट करती हैं। बेहतर जानकारी के लिए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।
| डायबिटिक मरीज कौन सी दाल खाएं? | |
| चना दाल | राजमा और काले सेम (Legume) |
| मसूर दाल | चना (Legume) |
| मूंग दाल |
साल 2021 में European Journal Of Nutrition में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, डायबिटिक मरीजों की डाइट में दाल को शामिल करने से ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। स्टडी में टाइप 2 डायबिटिक मरीजों को दाल का सेवन करने से फास्टिंग ब्लड शुगर, HbA1c और इंसुलिन रेजिस्टेंस में सुधार देखा गया।
1. चना दाल
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चना दाल का जीआई करीब 8 होता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर के साथ-साथ फॉलिक एसिड भी मौजूद होता है जो शरीर के अंदर नए ब्लड सेल्स को बनाने का काम करता है और नसों को मजबूत बनाता है। किसी व्यक्ति को खून की कमी है, डायबिटीज के साथ-साथ कमजोरी है, नसें कमजोर हो गई हैं, तो वे चना दाल खा सकते हैं। ये उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
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2. मसूर दाल
मसूर दाल का जीआई करीब 25 होता है। इसमें प्रोटीन के साथ-साथ आयरन और बी विटामिन्स पाए जाते हैं। इसे पकाते समय कम से कम तेल का इस्तेमाल करना चाहिए।
3. मूंग दाल
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मूंद दाल मुख्य रूप से दो तरह की होती है- एक पीली और एक हरी मूंग दाल। पीली दाल में छिलका उतार लिया जाता है और हरी दाल को छिलके के साथ ही खाते हैं। मूंद दाल के छिलके में फाइबर होता है इसलिए डायबिटिक मरीजों के लिए हरी मूंग दाल ज्यादा असरदार और फायदेमंद मानी जाती है। हरी मूंग दाल का जीआई करीब 38 होता है। अगर आप हार्ट के मरीज हैं, गर्भवती हैं या शरीर में कमजोरी रहती है, तो मूंग दाल का सेवन फायदेमंद हो सकता है।
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4. राजमा और काले सेम
दाल के साथ-साथ, कुछ फलियां (Legumes) भी डायबिटिक मरीजों के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं जैसे राजमा और काले सेम (Black Beans)। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 18 के आस-पास होता है जो कि लो माना जाता है। इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो आंखों, त्वचा और सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। इनका सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। इसे हफ्ते में 2 से 3 बार खा सकते हैं।
5. चने
चना भी फलियों (Legumes) की श्रेणी में आता है। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं। इनका जीआई लो होता है। यह लगभग 28 से 33 के बीच होता है। चने में फाइबर होने के कारण ये धीरे-धीरे पचते हैं। इससे शुगर स्पाइक से बचाव होता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने के लिए भी चने का सेवन फायदेमंद माना जाता है। काबुली चने और काले चने, दोनों ही डायबिटिक मरीजों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। हालांकि, काला चना या देसी चना को पहली प्राथमिकता दें।
दाल के सेवन के साथ पोर्शन कंट्रोल करें
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- दाल का सेवन तभी फायदेमंद होगा जब पोर्शन कंट्रोल पर गौर किया जाए।
- आपके एक समय के मील के करीब 50 प्रतिशत हिस्से में ताजी पकी सब्जियां और सलाद होना चाहिए।
- 25 प्रतिशत में दाल को शामिल करें।
- 25 प्रतिशत में मोटे अनाज को शामिल करें जैसे मिलेट्स यानी जौ या बाजरे की रोटी।
- ऐसा मील लें जिसमें कार्ब्स, हेल्दी फैट्स, प्रोटीन, फाइबर की भरपूर मात्रा हो।
निष्कर्ष:
डायबिटिक मरीज चना दाल, मसूर दाल, हरी और पीली मूंग दाल और फलियां जैसे राजमा, काले सेम, चने को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। इन दालों और फलियों का जीआई भी कम होता है इसलिए ये धीरे-धीरे पचती हैं और डायबिटीज कंट्रोल में अहम भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, एक मील में दाल को केवल 25 प्रतिशत हिस्से में ही शामिल करें। अन्य हिस्से में मिलेट्स, ताजी सब्जियां, कार्ब्स, हेल्दी फैट्स, प्रोटीन और फाइबर रिच फूड्स को प्राथमिकता दें।
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FAQ
क्या रोजाना दाल का सेवन कर सकते हैं?
रोजाना दाल को हेल्दी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। हालांकि, दाल के अलावा प्रोटीन के अलग-अलग स्रोत जैसे पनीर, टोफू, सोया वगैरह को भी डाइट का हिस्सा बनाएं। दाल की वैरायटी को भी बदलते रहें।क्या दाल खाने से पाचन समस्याएं हो सकती हैं?
कुछ लोगों को दाल का सेवन करने के बाद ब्लोटिंग या गैस की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए दाल को अच्छी तरह भिगोएं और पकाकर खाएं। साथ ही, मात्रा को अचानक बढ़ाने से बचें।
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Sep 21, 2026 17:44 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Smita Singh
