हरी, पीली (गोल्डन) या काली किशमिश को लोग पानी में भिगोकर खाते हैं या फिर किसी मिठाई में डाल लेते हैं। कुछ लोग तीनों को ही मिला देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे आयरन की मात्रा बढ़ सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में तीनों तरह की किशमिश में एक जैसी आयरन की मात्रा होती है या फिर ये अलग-अलग होती है। अगर लोग आयरन के लिए किशमिश ले रहे हैं, तो कौन-सी लेनी चाहिए? इन सवालों को जानने के लिए हमने Meena Kumari, Chief Dietician - Dietetics, Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की। उन्होंने बताया कि किशमिश अंगूर का सूखा रूप होता है और इसमें नेचुरल चीनी, फाइबर, पोटैशियम और आयरन होता है। हालांकि, काली, हरी और गोल्डन किशमिश में अलग-अलग आयरन की मात्रा होती है।
हरी, पीली और काली किशमिश में आयरन की मात्रा
Meena Kumari कहती हैं कि हालांकि, अंगूर को सुखाकर किशमिश को बनाया जाता है, तो इसमें पानी की मात्रा लगभग खत्म हो जाती है। हालांकि, काली किशमिश में आयरन की मात्रा ज्यादा होती है, लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किशमिश शरीर में कितना अवशोषित होता है।
ICMR की Indian Food Composition Tables के अनुसार, काली, गोल्डन और हरी किशमिश में आयरन की मात्रा 100 ग्राम पर आधारित है।
किशमिश |
आयरन (प्रति 100 ग्राम) |
काली किशमिश |
6.81 mg |
पीली (गोल्डन) किशमिश |
4.26 mg |
हरी किशमिश |
आंकड़े उपलब्ध नहीं |
हरी, पीली और काली किशमिश में अंतर
Meena Kumari ने बताया कि पीली (गोल्डन), हरी और काली किशमिश में आयरन की मात्रा का अंतर है और सबसे जरूरी बात यह है कि किशमिश में मौजूद आयरन नॉन-हीम आयरन होता है, जिसका अवशोषण भोजन में मौजूद दूसरी चीजों से भी प्रभावित होता है। इसलिए अगर रोजाना किशमिश खा रहे हैं और किसी मेडिकल कंडीशन से परेशान हैं, तो न्यूट्रिशनिस्ट से जरूर सलाह लें।
तुलना का आधार |
काली किशमिश |
पीली (गोल्डन) किशमिश |
हरी किशमिश |
रंग |
गहरा काला या भूरा |
सुनहरा या हल्का पीला |
हल्का हरा |
स्वाद |
मीठा, थोड़ा गहरा स्वाद |
मीठा और हल्का अलग स्वाद |
मीठा, स्वाद किस्म के अनुसार बदल सकता है |
आयरन की मात्रा (प्रति 100 ग्राम) |
6.81 mg |
4.26 mg |
इसके आंकड़े उपलब्ध नहीं |
अन्य पोषक तत्व |
पोटैशियम और फाइबर |
पोटैशियम और फाइबर |
पोषक तत्व मौजूद होते हैं, लेकिन आंकड़े उपलब्ध नहीं |
किस तरह खा सकते हैं? |
भिगोकर, नाश्ते या स्नैक के रूप में |
ओट्स, दलिया, सलाद और मिठाई में |
स्नैक, मिठाई या नाश्ते में |
आयरन के लिहाज से तुलना |
सबसे ज्यादा आयरन |
काली किशमिश से कम आयरन |
आंकड़े उपलब्ध नहीं |
किशमिश में मौजूद आयरन को कैसे बेहतर तरीके से लें?
Meena Kumari सलाह देती हैं कि किशमिश के आयरन के अवशोषण के लिए विटामिन C वाले फूड्स साथ में लिए जा सकते हैं। इसमें आंवला, अमरूद, संतरा या नींबू शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, किशमिश के साथ चाय और कॉफी न लें। अगर किसी के शरीर में आयरन की कमी है, तो उसे आयरन से भरपूर खाने के साथ चाय-कॉफी लेने से बचना चाहिए। चाय या कॉफी खाना खाने के कुछ देर बाद ली जा सकती है, लेकिन खाने के साथ न लें।
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रोज कितनी किशमिश खानी चाहिए?
Meena Kumari के अनुसार, किशमिश में नेचुरल शुगर और कैलोरी होती है, इसलिए इसे बहुत ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए। आमतौर पर एक सेहतमंद वयस्क अपनी डाइट में लगभग 20 से 30 ग्राम किशमिश स्नैक्स या खाने में शामिल कर सकते हैं। डायबिटीज मरीजों को किशमिश खाते समय इसकी मात्रा और अपने कुल कार्बोहाइड्रेट का ध्यान रखना चाहिए।
क्या किशमिश खाने से आयरन की कमी दूर हो सकती है?
Meena Kumari कहती हैं, “सिर्फ किशमिश खाने से आयरन की कमी या एनीमिया दूर नहीं हो सकता है। किशमिश को आयरन का अतिरिक्त स्त्रोत माना जा सकता है। अगर किसी को आयरन की कमी है, तो उसे डाइट में दालें, चना, राजमा, हरी पत्तेदार सब्जियां और तिल शामिल करने चाहिए। इसके अलावा, डॉक्टर की सलाह लेकर आयरन सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं, लेकिन किसी भी सप्लीमेंट को खुद से शुरू न करें। अगर लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर आना या सांस फूलने जैसी समस्या हो रही है, तो इसका कारण आयरन की कमी हो सकती है। इसलिए सिर्फ किशमिश खाकर ही आयरन पूरा नहीं किया जा सकता।
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निष्कर्ष
हरी, पीली (गोल्डन) और काली किशमिश तीनों को डाइट में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, काली किशमिश में आयरन की मात्रा ज्यादा होती है, लेकिन स्वाद के तौर पर लोगों को गोल्डन किशमिश ज्यादा पसंद होती है। हालांकि, किशमिश को सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए और किसी भी तरह की मेडिकल कंडीशन होने पर डॉक्टर की सलाह पर ही रोजाना किशमिश खानी चाहिए।
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FAQ
गोल्डन किशमिश पर इस्तेमाल होने वाला सल्फर डाइऑक्साइड स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है?
किशमिश को सड़ने से बचाने और चमकीला पीला रंग देने के लिए सल्फर प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल होता है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सल्फर एलर्जी वाले मरीजों में इससे सांस फूलना, छींकें और पेट में मरोड़ हो सकती है। इसे खाने से पहले गुनगुने पानी में दो से तीन बार अच्छी तरह धोना जरूरी है।किशमिश का पानी सुबह खाली पेट पीने से शरीर पर क्या असर होता है?
रातभर भीगी किशमिश का पानी पीने से आंतों की पेरिस्टालिसिस गति तेज होती है, जिससे पुरानी कब्ज में तुरंत आराम मिलता है। इसके अलावा, पानी में घुले बायोफ्लेवोनोइड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर को डिटॉक्स करने और खून को साफ रखने में मददगार होते हैं।
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Nov 03, 2026 17:20 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dt Meena Kumari
