Sat Sep 12, 2026 | 08:40 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chandni Jain Gupta , Dermatologist

प‍िंपल्‍स का कारण बन सकते हैं फेस वॉश में मौजूद ये 6 इंग्रीड‍िएंट्स, चेक करें ल‍िस्‍ट

चेहरा साफ करने के ल‍िए इस्‍तेमाल क‍िए जाना फेस वॉश भी प‍िंपल्‍स का कारण बन सकता है। इसमें मौजूद इंग्रीड‍िएंट्स कुछ लोगों में प‍िंपल्‍स का कारण बन सकते हैं। जानते हैं ऐसे 6 इंग्रीड‍िएंट्स के बारे में।

प‍िंपल्‍स एक कॉमन समस्‍या है जो अक्‍सर पोर्स में गंदगी भरने, सीबम की अध‍िक मात्रा या हार्मोनल बदलाव के कारण होती है। कुछ लोग फेस वॉश के इस्‍तेमाल के बाद भी प‍िंपल्‍स की श‍िकायत करते हैं। फेस वॉश को कई केम‍िकल्‍स और ब्‍यूटी इंग्रीड‍िएंट्स के साथ बनाया जाता है ज‍िनमें से कुछ एक्‍ने का कारण बन सकते हैं। इनके संपर्क में आते ही त्‍वचा में ड्राईनेस, रेडनेस, दाने, खुजली, प‍िंपल्‍स जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। अगर फेस वॉश में बहुत हार्श इंग्रीड‍िएंट्स का इस्‍तेमाल हुआ है, तो त्‍वचा का प्राकृत‍ित ऑयल कम हो सकता है ज‍िससे त्‍वचा ड्राई हो सकती है और एक्‍ने की संभावना बढ़ सकती है। आइए जानते हैं फेस वॉश खरीदते समय क‍िन इंग्रीड‍िएंट्स को ल‍िस्‍ट में चेक करना चाह‍िए और सावधानी बरतनी चाह‍िए? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Chandni Jain Gupta, Dermatologist, Cosmetologist And Hair Transplant Surgeon At Elantis Healthcare, New Delhi से बात की।

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1. अल्‍कोहल

Dermatologist Dr. Chandni Jain Gupta ने बताया क‍ि कुछ फेसवॉश में मौजूद डिनैचर्ड अल्कोहल, एसडी अल्कोहल से त्‍वचा का ऑयल कम हो सकता है ज‍िससे स्‍क‍िन सेंस‍िट‍िव हो सकती है और एक्‍ने, ब्रेकआउट्स की समस्‍या हो सकती है इसल‍िए हमेशा अल्‍कोहल फ्री फेसवॉश का ही इस्‍तेमाल करना चाह‍िए।

2. फ्रेगरेंस युक्‍त फेसवॉश

ज‍िन फेसवॉश में खुशबू म‍िलाई जाती है, वे त्‍वचा के ल‍िए अच्‍छे नहीं माने जाते हैं। अगर आपकी सेंस‍िट‍िव या एक्‍ने-प्रोन स्‍क‍िन है, तो ज्‍यादा फ्रेगरेंस वाले फेसवॉश का इस्‍तेमाल करने से रेडनेस, खुजली और ड्राईनेस हो सकती है। साल 2020 में Journal Of Dermatology & Cosmetology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी र‍िव्‍यू के मुताब‍िक, स्‍क‍िन प्रोडक्‍ट्स में मौजूद फ्रेगरेंस से त्वचा में जलन, खुजली, प‍िंपल्‍स और कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस जैसी समस्‍याएं भी हो सकती हैं।

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3. आइसोप्रोपिल पामिटेट

Dr. Chandni Jain Gupta ने बताया क‍ि आइसोप्रोपिल पामिटेट त्वचा को मुलायम बनाने के लिए फेसवॉश में इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपकी एक्‍ने-प्रोन स्‍क‍िन है, तो कुछ लोगों में इससे पोर्स ब्‍लॉक हो सकते हैं और एक्‍ने की समस्‍या हो सकती है। साल 2025 में Journal Of The American Academy Of Dermatology Reviews में प्रकाश‍िक एक स्‍टडी के मुताब‍िक, आइसोप्रोपिल पामिटेट एक कॉमेडोजेनिक इंग्रीड‍िएंट है जो पोर्स को बंद कर सकते हैं। जब पोर्स बंद हो जाते हैं, तो प‍िंपल्‍स की संभावना बढ़ सकती है।

4. एसेंश‍ियल ऑयल

एसेंश‍ियल ऑयल को पौधों से न‍िकाला जाता है। ये कॉन्सन्ट्रेटेड ऑयल्‍स होते हैं। कई फेस वॉश में ये पाए जाते हैं। इनका इस्‍तेमाल त्‍वचा के ल‍िए सुरक्ष‍ित होता है, लेक‍िन ऑयली स्‍क‍िन या सेंस‍िट‍िव स्‍क‍िन टाइप वाले कुछ लोगों को एसेंश‍ियल ऑयल की अध‍िक मात्रा से एलर्जी हो सकती है ज‍िससे प‍िंपल्‍स की समस्‍या हो सकती है। खासतौर पर अगर आपकी स्‍क‍िन सेंस‍िट‍िव है, तो स‍िट्रस एसेंश‍ियल ऑयल के इस्‍तेमाल से बचें।

5. सोडियम लॉरेल सल्फेट

कई फेस वॉश में फोम बनाने के ल‍िए सर्फेक्टेंट पाया जाता है ज‍िसे सोडियम लॉरेल सल्फेट (SLS) कहते हैं। इसका इस्‍तेमाल फेस वॉश में तेल, पसीना, गंदगी और मेकअप को हटाने के ल‍िए क‍िया जाता है। यह तब हान‍िकारक बन जाते हैं जब इनका ज्‍यादा इस्‍तेमाल क‍िया जाए या फेस वॉश में मजबूत सर्फेक्टेंट मौजूद हो। इसकी ज्‍यादा मात्रा से त्‍वचा में ड्राईनेस बढ़ सकती है और प‍िंपल्‍स की संभावना ज्‍यादा हो सकती है।

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6. मिरिस्टिक एसिड

कई फेस वॉश में मिरिस्टिक एसिड (Myristic Acid) पाया जाता है। यह ज्‍यादातर फोम‍िंग फेस वॉश में पाया जाता है। फेस वॉश में इसकी सुरक्ष‍ित मात्रा इस्‍तेमाल की जाती है, लेक‍िन अगर ज्‍यादा मात्रा में फेस वॉश का इस्‍तेमाल क‍िया या बार-बार फेस वॉश क‍िया, तो यह त्‍वचा में ड्राईनेस पैदा कर सकता है ज‍िससे प‍िंपल्‍स होने का खतरा बढ़ सकता है।

कैसा फेसवॉश चुनें?

  • ज‍िसके लेबल पर नॉन-कॉमेडोजेनिक ल‍िखा हो।
  • जो फ्रेगरेंस और पैराबेन फ्री हो।
  • जो माइल्‍ड हो और ज‍िसमें हार्श इंग्रीड‍िएंट्स मौजूद न हों।

American Academy Of Dermatology के मुताब‍िक, फेस वॉश में अल्‍कोहल नहीं होना चाह‍िए। साथ ही, क्लींजर लगाने के लिए वॉश क्लॉथ, स्पंज या उंगलियों के अलावा किसी और चीज का इस्तेमाल करने से आपकी त्वचा में जलन हो सकती है। इस सावधानी का खास ख्‍याल रखें।

न‍िष्‍कर्ष:

अगर आप फेस वॉश खरीद रहे हैं, तो उसमें अल्‍कोहल, फ्रेगरेंस, आइसोप्रोपाइल पामिटेट, एसेंश‍ियल ऑयल, सोडियम लॉरेल सल्फेट, मिरिस्टिक एसिड जैसे इंग्रीड‍िएंट्स को चेक करें। इससे कुछ लोगों में प‍िंपल्‍स की संभावना बढ़ सकती है। अगर फेस वॉश के इस्‍तेमाल के बाद प‍िंपल्‍स बढ़ जाते हैं, तो डॉक्‍टर से सलाह लेना न भूलें। ऐसा फेसवॉश चुनें जो फ्रेगरेंस, पैराबेन और अल्‍कोहल फ्री हो।

FAQ

  • द‍िन में क‍ितनी बार फेस वॉश का इस्‍तेमाल करें?

    आमतौर पर द‍िन में दो बार चेहरा साफ करना पर्याप्‍त होता है। पसीना आने पर दो से अध‍िक बार भी फेस वॉश कर सकते हैं। हालांक‍ि, अध‍िक बार फेस वॉश से चेहरे में ड्राईनेस हो सकती है।
  • क्‍या फेस वॉश लगाने के बाद चेहरा ख‍िंचना सामान्‍य है?

    नहीं यह सामान्‍य नहीं है। अगर फेस वॉश से चेहरा धोने के बाद क्रीम अप्‍लाई नहीं करेंगे, तो त्‍वचा में खि‍ंचाव महसूस हो सकता है। हार्श इंग्रीड‍िएंट्स के कारण भी ख‍िंचाव हो सकता है। ऐसे में डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 11, 2026 18:50 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Chandni Jain Gupta

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