Sun Oct 11, 2026 | 11:50 PM IST

Medically Reviewed by Dr Deepak Kumar Arora , Orthopaedics & Joint Replacement

हाथ ऊपर उठाने में परेशानी का कारण? जानें कंधे की किन समस्याओं का हो सकता है संकेत

हाथ ऊपर उठाने में दिक्कत कंधे की चोट, फ्रोजन शोल्डर, नस दबने या मसल्स की समस्या के कारण हो सकती है। यहां ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जानिए, हाथ ऊपर न कर पाने के कारण और किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाएं।
हाथ ऊपर उठाने में परेशानी का कारण? जानें कंधे की किन समस्याओं का हो सकता है संकेतहाथ ऊपर उठाने में परेशानी का कारण? जानें कंधे की किन समस्याओं का हो सकता है संकेत

क्या आपका हाथ ऊपर उठाते समय अचानक दर्द करने लगता है या कंधा इतना जकड़ जाता है कि हाथ सिर तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है? अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसे सिर्फ थकान या कमजोरी मानकर नजरअंदाज न करें। Max Hospital Patparganj के ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉक्टर दीपक अरोड़ा के अनुसार, हाथ उठाने में परेशानी के पीछे हमेशा एक ही कारण नहीं होता। कुछ लोगों में कंधे की मसल्स या टेंडन की समस्या इसका कारण हो सकती है, जबकि कुछ मामलों में फ्रोजन शोल्डर, पुरानी चोट या गर्दन से जुड़ी नसों की समस्या भी हाथ के मूवमेंट को प्रभावित कर सकती है।

हाथ ऊपर उठाने में परेशानी का कारण?

डॉक्टर दीपक अरोड़ा के अनुसार, हाथ उठाने में परेशानी के पीछे कारण जानना जरूरी है, क्योंकि हर स्थिति का इलाज अलग होता है।

1. कंधे में दर्द और सूजन

डॉक्टर दीपक अरोड़ा बताते हैं कि कंधे की मसल्स या आसपास के टिश्यू में सूजन होने पर हाथ ऊपर उठाने में दर्द हो सकता है। बार-बार हाथ ऊपर करने वाली एक्टिविटी, गलत तरीके से एक्सरसाइज करना या अचानक ज्यादा वजन उठाने से कंधे पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में हाथ उठाते समय दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है।

2. रोटेटर कफ की समस्या

डॉक्टर दीपक अरोड़ा के अनुसार, रोटेटर कफ कंधे की कुछ मसल्स और टेंडन का ग्रुप है, जो हाथ को उठाने और घुमाने में मदद करता है। इसमें खिंचाव, सूजन या चोट होने पर हाथ ऊपर उठाना मुश्किल हो सकता है। कुछ लोगों में रात के समय भी दर्द बढ़ सकता है। यह समस्या खेल एक्टिविटीज, जिम में भारी वजन उठाने या उम्र बढ़ने के साथ होने वाले बदलावों के कारण हो सकती है।

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3. फ्रोजन शोल्डर

फ्रोजन शोल्डर में कंधे के जोड़ के आसपास जकड़न बढ़ जाती है। इसकी वजह से हाथ को ऊपर उठाने के साथ-साथ पीछे ले जाने या घुमाने में भी परेशानी हो सकती है। डॉक्टर दीपक अरोड़ा बताते हैं कि शुरुआत में दर्द हो सकता है और धीरे-धीरे कंधे की मूवमेंट सीमित होने लगती है।

साल 2025 में Clinics in Shoulder and Elbow में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार-

  • फ्रोजन शोल्डर की समस्या समय के साथ अपने आप ठीक हो सकती है, लेकिन इसमें कई महीने या साल भी लग सकते हैं। इसके इलाज का कोई एक निश्चित तरीका नहीं है, बल्कि मरीज की हालत और लक्षणों के हिसाब से इलाज तय किया जाता है।
  • शुरुआत में दर्द कम करने और कंधे का फंक्शन सुधारने के लिए सामान्य उपचार किए जाते हैं, जिसमें मरीज की सहनशीलता और फिजियोथेरेपी बहुत जरूरी होती है।
  • हालांकि, हर मरीज पर इसका असर अलग होता है। यदि इन सामान्य तरीकों से आराम न मिले, तो ज्यादा इंटेंसिव केयर या सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।
  • इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि हर मरीज की स्थिति को देखकर ही इलाज का सही तरीका चुना जाए।

4. नसों की समस्या

कभी-कभी हाथ उठाने में परेशानी का संबंध सीधे कंधे से नहीं बल्कि गर्दन की नसों से हो सकता है। गर्दन की नस पर दबाव पड़ने से कंधे और हाथ में दर्द, झनझनाहट या कमजोरी महसूस हो सकती है। अगर हाथ में कमजोरी के साथ सुन्नपन भी है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

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5. चोट या कंधा खिसकने की दिक्कत

गिरने, खेल के दौरान चोट लगने या अचानक जोर पड़ने के बाद कंधे में चोट हो सकती है। कुछ मामलों में कंधा अपनी जगह से खिसक भी सकता है। ऐसी स्थिति में अचानक तेज दर्द, सूजन और हाथ चलाने में गंभीर परेशानी हो सकती है। कंधे को खुद से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और तुरंत बिना देरी के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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साल 2019 में Sports Medicine-Open में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार-

  • कंधे के खिसकने की समस्या का सही इलाज करने के लिए सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत होती है। सबसे पहले सही जांच और एक्स-रे करके स्थिति का पता लगाया जाता है और दर्द कम करके कंधे को वापस उसकी जगह पर सेट किया जाता है।
  • इसके बाद मरीज की उम्र और उसकी फिजिकल एक्टिविटी के आधार पर आगे का फैसला लिया जाता है।
  • कम उम्र और ज्यादा एक्टिव लोगों में कंधा दोबारा खिसकने का खतरा बहुत ज्यादा होता है, इसलिए ऐसे मरीजों के लिए सर्जरी बेहतर रिजल्ट दे सकती है, हालांकि इसमें जोखिम भी होते हैं।
  • दूसरी ओर, बुजुर्गों या कम एक्टिव युवाओं के लिए बिना सर्जरी यानी सामान्य इलाज ही सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है।

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

अगर हाथ ऊपर उठाने में परेशानी लगातार बनी हुई है, दर्द बढ़ रहा है या रोजाना के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो ऑर्थोपेडिक एक्सपर्ट से सलाह लें। चोट के बाद अचानक हाथ न उठ पाना, कंधे का आकार बदला हुआ दिखना, तेज सूजन या हाथ में सुन्नपन और कमजोरी जैसे लक्षणों में जल्द मेडिकल हेल्थ जरूरी है।

निष्कर्ष

हाथ ऊपर उठाने में दिक्कत कई कारणों से हो सकती है, जिनमें कंधे की सूजन, रोटेटर कफ की समस्या, फ्रोजन शोल्डर, नसों पर दबाव या चोट शामिल हैं। केवल दर्द कम करने के बजाय समस्या के असली कारण का पता लगाना जरूरी है। अगर परेशानी लगातार बनी रहती है या हाथ की नॉर्मल एक्टिविटी प्रभावित हो रही हैं, तो समय पर ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।

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FAQ

  • हाथ उठाते समय कंधे में आवाज क्यों आती है?

    कंधे को घुमाने या हाथ उठाने पर हल्की आवाज कई लोगों में सामान्य हो सकती है लेकिन अगर आवाज के साथ दर्द, सूजन, कमजोरी या मूवमेंट कम हो रहा है, तो जांच कराना बेहतर है।
  • हाथ अचानक ऊपर न उठे तो क्या करना चाहिए?

    अगर चोट, गिरने या अचानक जोर पड़ने के बाद हाथ ऊपर नहीं उठ पा रहा है, तो कंधे को जबरदस्ती हिलाने या खींचने से बचें और जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लें।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 24, 2026 14:34 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Deepak Kumar Arora