इमोशनल ट्रॉमा, जिसे गहरा सदमा भी कहा जाता है। कोई कष्टदायक घटना, डरावनी या भयावह दुर्घटना के कारण किसी को भी इमोशनल ट्रॉमा हो सकता है। कई लोगों के मन में इसका गहरा असर पड़ता है, तो कुछ लोग इससे उबर जाते हैं। आमतौर पर इससे उबरना आसान नहीं होता है और अक्सर लोगों को किसी करीबी के सपोर्ट की जरूरत होती है। बहरहाल, कई लोगों का मानना है कि इमोशनल ट्रॉमा का हमारे हार्ट हेल्थ पर भी गहरा असर पड़ता है और इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। सवाल है, क्या यह वाकई सच है? आइए, जानते हैं Dr. Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar से।
क्या इमोशनल ट्रॉमा दिल पर लंबे समय तक असर डालता है?
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Yale Medicine की मानें, तनाव या इमोशनल ट्रॉमा का हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है और हृदय स्वास्थ्य पर भी यह प्रभाव दिखता है। साल 2022 में Journal Of Clinical Medicine (JCM) के अनुसार इमोशनल ट्रॉमा का दिल पर गंभीर असर पड़ता है, जो कि लंबे समय तक टिका रहता है। वैसे भी मानसिक तनाव केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह सीधे हार्ट और नसों को नुकसान पहुंचाता है। असल में, लगातार तनाव या इमोशनल ट्रॉमा में रहने के कारण शरीर फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स को हमेशा सक्रिय रखता है। इससे शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है। जैसे-जैसे वक्त बीतता जाता है, हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में अंदरूनी सूजन और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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इमोशनल ट्रॉमा दिल पर क्या असर डालता है?
तुरंत दिखने वाले असर
इमोशनल ट्रॉमा यानी गहरा सदमा लगने के कारण तुरंत कुछ प्रभाव नजर आते हैं, जैसे-
- इमोशनल ट्रॉमा के कारण ताकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी (Broken Heart Syndrome) हो सकता है। इस समस्या में दिल की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में मरीज हार्ट अटैक जैसा महसूस कर सकता है।
- इमोशनल ट्रॉमा की वजह से अचानक ब्लड फ्लो बाधित होने लगता है, जिससे दिल की धमनियां अचानक सिकुड़ जाती हैं। इससे धमनियों में ऐंठन महसूस होती है।
- इमोशनल ट्रॉमा इतना घातक हो सकता है कि इसके कारण थक्के बनने का खतरा भी बढ़ जाता है। दरअसल, इमोशनल ट्रॉमा के कारण शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है, जो कि खून को अधिक गाढ़ा और चिपचिपा बना देता है। ऐसे में खून के खतरनाक थक्के बनने का जोखिम बढ़ जाता है।
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लंबे समय में दिखने वाले प्रभाव
हाई ब्लड प्रेशरः लंबे समय से इमोशनल ट्रॉमा या किसी तरह के तनाव में रहने के कारण ब्लड प्रेशर का स्तर बढ़ सकता है। American Heart Association की मानें, तो इमोशनल ट्रॉमा के कारण नर्वस सिस्टम लगातार सक्रिय रहता है। इससे नसों में अकड़न आ सकती है। नतीजतन, भविष्य में स्थायी रूप से ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है।
धमनियों में प्लाक जमनाः इमोशनल ट्रॉमा के कारण शरीर में अंदरूनी सूजन बढ़ जाती है। इससे धमनियों को नुकसान पहुंचता है। Stanford Medicine के अनुसार क्रोनिक स्ट्रेस में रहने की वजह से शरीर में फिजियोलॉजिकल बदलाव होते हैं, जो एथेरोस्क्लेरोसिस को बढ़ावा देते हैं। इसका मतलब है कि दिल की धमनियों में धीरे-धीरे प्लाक (वसा और गंदगी) जमने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यह स्थिति भी सही नहीं है और भविष्य में इसके गंभीर नुकसान झेलने पड़ते हैं।
पीटीएसडी से कनेक्शनः विशेषज्ञों की मानें, तो इमोशनल ट्रॉमा का पीटीएसडी से भी गहरा कनेक्शन है। पीटीएसडी यानी पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर। वास्तव में, गंभीर भावनात्मक उत्पीड़न, प्रताड़ना, मानसिक रूप से लगातार की जाने वाली मैनिपुलेशन, अत्यधिक उपेक्षा या खराब रिश्तों का अनुभव, दिमाग के स्ट्रेस रिस्पॉन्स सिस्टम को इस तरह सक्रिय कर देता है जैसे शरीर को हमेशा खतरे का अंदेशा होता रहता है। यह स्थिति सही नहीं है, जो कि आगे चलकर पीटीएसडी की संभावना को बढ़ा देता है।
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इमोशनल ट्रॉमा से कैसे डील करें?
- अपने शरीर को शांत रखने की कोशिश करें। इसके लिए डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें।
- योग, एक्सरसाइज से शरीर के तनाव को कम करें।
- एक्सपर्ट की मदद लें ताकि इमोशनल पेन को कम किया जा सके।
- इमोशनल ट्रॉमा से डील करने के लिए सपोर्ट ग्रुप से जुड़ें।
- इमोशनल ट्रॉमा होने पर खुद को दूसरों से अलग-थलग न करें।
- नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ की जांच करवाएं।
- डाइट में सुधार करें, तथा शराब का सेवन कम करें।
निष्कर्ष
इमोशनल ट्रॉमा का असर सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य पर ही नहीं पड़ता, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। जो लोग लंबे समय से इमोशनल ट्रॉमा में रहते हैं, उनका शरीर तनाव में बना रहता है, जिससे कोर्टिसोल स्तर बढ़ जाता है। इससे शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भविष्य में हाई बीपी और हार्ट से जुड़ी परेशानियां ट्रिगर हो सकती हैं। इससे बचने के लिए जरूरी है कि इमोशनल ट्रॉमा होने पर प्रोफेशनल की मदद लेने में देरी न करें।
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FAQ
क्या कार्डियक समस्याओं का पता लगाने के लिए कौन से मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं?
आमतौर पर इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG), इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram), ट्रोपोनिन ब्लड टेस्ट (हार्ट मसल डैमेज चेक करने के लिए) और Cardiac MRI की सलाह दी जा सकती है।माइंडफुलनेस मेडिटेशन दिल के स्वास्थ्य को तनाव से कैसे बचाते हैं?
माइंडफुलनेस मेडिटेशन से शरीर रेस्ट मोड एक्टिव हो जाता है, जिससे हार्ट हेल्थ भी बेहतर होती है।
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Jul 28, 2026 18:45 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta