Sat Nov 7, 2026 | 10:21 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shireen Furtado , Sr. Consultant – Medical & Cosmetic Dermatology

क्या वायु प्रदूषण एक्जिमा और सोरायसिस को और बिगाड़ सकता है? डॉक्टर से जानें

वायु प्रदूषण फेफड़ों के साथ-साथ त्वचा को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है, जिससे एक्जिमा और सोरायसिस जैसी स्थितियां बिगड़ सकती हैं। प्रदूषक त्वचा के प्रोटेक्टिव बैरियर को कमजोर करते हैं, इसलिए हल्के स्किनकेयर और प्रदूषण से बचाव जरूरी है।
क्या वायु प्रदूषण एक्जिमा और सोरायसिस को और बिगाड़ सकता है? डॉक्टर से जानेंक्या वायु प्रदूषण एक्जिमा और सोरायसिस को और बिगाड़ सकता है? डॉक्टर से जानें

सर्दियों की शुरुआत से पहले ही दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है। जिसके कारण फेफड़ों और पूरे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, सिर्फ इतना ही नहीं यह प्रदूषण त्वचा को भी प्रभावित कर सकता है। इसके कारण लोगों को स्किन से जुड़ी समस्याएं होती हैं, लेकिन क्या इसके कारण एक्जिमा और सोरायसिस जैसी त्वचा से जुड़ी बीमारियों की स्थिति और भी बिगड़ सकती है। ऐसे में आइए इस बारे में Dr. Shireen Furtado, Sr. Consultant - Medical & Cosmetic Dermatology , Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानें।

क्या प्रदूषण एक्जिमा और सोरायसिस को बढ़ा सकता है?

डॉ. शिरीन के अनुसार, वायु प्रदूषण त्वचा के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है और एक्जिमा और सोरायसिस जैसी मौजूदा स्थितियों को और खराब कर सकता है। प्रदूषक कण यानी particulate matter (पीएम 2.5 और पीएम 10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और अन्य वायुजनित रसायन त्वचा के संपर्क में आकर उसकी नेचुरल प्रोटेक्टिव बैरियर को कमजोर कर सकते हैं। इससे त्वचा की सेंसिटिविटी, सूखापन, सूजन और जलन बढ़ सकती है।

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प्रदूषण एक्जिमा और सोरायसिस को कैसे प्रभावित करता है?

डॉ. शिरीन आगे कहती हैं, एक्जिमा से पीड़ित लोगों में, त्वचा की प्रोटेक्टिव लेयर पहले से ही कमजोर होती है, जिससे यह बाहरी जलन पैदा करने वाले तत्वों के प्रति ज्यादा सेंसिटिव हो जाती है। प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से खुजली, लालिमा या रेडनेस, सूखापन और त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण और भी बढ़ सकते हैं। प्रदूषक ऑक्सीडेटिव तनाव में भी योगदान दे सकते हैं, जो स्किन सेल्स को नुकसान पहुंचा सकता है और सूजन संबंधी प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर कर सकता है। सेंसिटिव स्किन वाले या एटोपिक डर्मेटाइटिस की हिस्ट्री रखने वाले लोग खासतौर पर इसके प्रति सेंसिटिव हो सकते हैं।

इसी प्रकार, सोरायसिस से पीड़ित व्यक्तियों को पर्यावरणीय प्रदूषकों के संपर्क में आने पर सूजन और जलन की समस्या बढ़ सकती है। हालांकि, वायु प्रदूषण सोरायसिस का प्रत्यक्ष कारण नहीं है, लेकिन पर्यावरणीय कारक (फैक्टर्स) उन लोगों में इसके लक्षणों को बढ़ा सकते हैं, जो पहले से ही इस स्थिति के प्रति सेंसिटिव हैं।

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क्या कहती है स्टडी?

साल 2023 में Journal of Exposure Science & Environamental Epidemiology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, ऑटोइम्यून त्वचा संबंधी बीमारियां जेनेटिक कारणों और पर्यावरण की वजह से होती हैं। जब त्वचा की प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर हो जाती है, तो सोरायसिस और एक्जिमा जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इन बीमारियों के होने और वायु प्रदूषण के बुरे प्रभावों के पीछे मुख्य वजह शरीर में होने वाला ऑक्सीडेटिव तनाव (नुकसानदायक तत्वों का बढ़ना) है।

वायु प्रदूषण सोरायसिस और एक्जिमा के खतरे को बहुत ज्यादा बढ़ा देता है, और इस अध्ययन में यह भी देखा गया है कि वायु प्रदूषण की वजह से इन त्वचा से जुड़ी बीमारियों के होने का खतरा उतना ही होता है, जितना सिगरेट पीने से होता है।

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त्वचा पर प्रदूषण के असर को कम करने के लिए क्या करें?

डॉ. शिरीन का कहना है, प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए व्यक्ति को जेंटल स्किनकेयर रूटीन फॉलो करना चाहिए।

  • माइल्ड, सुगंध रहित क्लींजर का इस्तेमाल करना और नियमित रूप से मॉइस्चराइजर लगाना त्वचा की प्रोटेक्टिव लेयर या स्किन बैरियर को बनाए रखने में मदद कर सकता है।
  • नहाने के तुरंत बाद मॉइस्चराइज करने से नमी त्वचा में बनी रहती है।
  • अत्यधिक एक्सफोलिएशन और हार्ष स्किनकेयर प्रोडक्ट्स से बचना भी सही है, खासकर ज्यादा प्रदूषण के समय।
  • जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कम हो, तो लंबे समय तक बाहर रहने से बचना चाहिए, खासकर यातायात से भरी सड़कों के पास। इससे प्रदूषकों के संपर्क को कम करने में मदद मिल सकती है।

डॉ. शिरीन कहती हैं, लगातार खुजली, रेडनेस या त्वचा के घावों के बिगड़ने जैसी समस्याएं महसूस करने वाले लोगों को खुद से दवा लेने के बजाय डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। स्किन की प्रोटेक्टिव लेयर की निरंतर सुरक्षा और सही मेडिकल इलाज प्रदूषण से जुड़ी स्किन की समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

निष्कर्ष

बढ़ता वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों ही नहीं, बल्कि त्वचा के लिए भी बेहद नुकसानदायक है। पीएम 2.5, पीएम 10 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषक कण त्वचा की नेचुरल प्रोटेक्टिव लेयर को कमजोर कर देते हैं, जिससे एक्जिमा और सोरायसिस जैसी पुरानी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। इससे बचने के लिए माइल्ड क्लींजर और मॉइस्चराइजर का उपयोग करें, अत्यधिक प्रदूषण में बाहर जाने से बचें और समस्या बढ़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • सोरायसिस के क्या लक्षण हैं?

    सोरायसिस की स्थिति में गहरे धब्बे होने, त्वचा के लाल होने, खुजली, जलन, चुभन, त्वचा के फटने, खून निकलने और त्वचा का पपड़ीदार होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • एक्जिमा की समस्या कब बिगड़ती है?

    शुष्क मौसम, सर्दियों, अधिक पसीना आने, गर्मी, केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने, एलर्जी, स्ट्रेस, एंग्जायटी और त्वचा को रगड़ने जैसे कारणों से एक्जिमा की समस्या बढ़ सकती है।

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 07, 2026 21:27 IST

    Published By : Priyanka Sharma
    Reviewed By : Dr Shireen Furtado