पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस में महिलाओं को हार्मोन्स के असंतुलित होने, वजन बढ़ने, मुंहासे होने, इंसुलिन रेजिस्टेंस और पीरियड्स के अनियमित होने जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में इस स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सही डाइट और पोषक तत्वों से युक्त फूड्स लेने की सलाह दी जाती है। ओमेगा-3 फैटी एसिड इन्हीं जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। Dr. Gayathri Karthik Nagesh, Program Director - Department of Obstetrics & Gynaecology, Aster CMI Hospital, Bangalore और जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन दोनों ही एक्सपर्ट कहती हैं कि पीसीओएस में ओमेगा 3 लेने से इंफ्लेमेशन कम करने और हार्मोन्स को बैलेंस करने में मदद मिलती है। लेकिन इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के साथ ही किया जाना चाहिए।
PCOS में ओमेगा-3 लेने के क्या फायदे हैं?
डॉ. गायत्री कार्तिक नागेश के अनुसार, "ओमेगा-3 फैटी एसिड लेना पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) की समस्या से परेशान महिलाओं के लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे पीसीओएस के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं जैसे शरीर की सूजन (inflammation), वजन और इंसुलिन को कम करने में मदद मिलती है, साथ ही इससे पीरियड्स को नियमित करने में मदद मिल सकती है।"
डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, पीसीओएस की समस्या में ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर फैटी फिश, ड्राई फ्रूट्स और सीड्स को डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है। इससे शरीर की सूजन को कम करने और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत देने में मदद मिल सकती है। ज्यादा परेशानी होने पर डॉक्टर सप्लीमेंट्स की सलाह भी दे सकते हैं।
2018 में Reproductive Biology And Endocrinology में प्रकाशित इस रिव्यू और मेटा-एनालिसिस से यह पता चलता है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड PCOS को कंट्रोल करने में मददगार हो सकता है। इसे लेने की सलाह खासतौर पर उन महिलाओं को दी जा सकती है, जिन्हें PCOS के साथ-साथ इंसुलिन की समस्या और खून में कोलेस्ट्रॉल या फैट की मात्रा बढ़ने की शिकायत होती है।
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सूजन कम करे
PCOS में महिलाओं के शरीर में अक्सर सूजन बढ़ जाती है। सूजन की समस्या हार्मोन्स के असंतुलित होने के कारण होती है और इसके कारण पीसीओएस के लक्षण बिगड़ सकते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड में एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण होते हैं। ऐसे में इससे युक्त फूड्स को डाइट में शामिल करने से सूजन को कम करने में मदद मिलती है।

इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर करे
PCOS की स्थिति में एक बड़ी समस्या इंसुलिन रेसिस्टेंस है, जिसमें शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इससे ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ जाता है और वजन बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे में ओमेगा-3 फैटी एसिड को लेने से शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करने में मदद मिलती है, जिससे ब्लड शुगर के स्तर को सही तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलती है। यह पीसीओएस को मैनेज करने में सहायक है।
पीरियड्स को नियमित करने में सहायक
पीसीओएस की समस्या से पीड़ित महिलाओं को हार्मोन्स के असंतुलित होने और अनियमित पीरियड्स की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ओमेगा-3 के नियमित सेवन से हार्मोन्स को बैलेंस करने में मदद मिल सकती है, जिससे पीरियड्स को नियमित करने में भी मदद मिल सकती है।
2017 में Journal Of Research In Medical Sciences में प्रकाशित स्टडी के अनुसार ओमेगा-3 फैटी एसिड लेने से शरीर में लिपिड प्रोफाइल और कमर की चौड़ाई कम हुई है। इसके साथ ही पीरियड्स के बीच का अंतर भी कम हुआ है।
वजन को नियंत्रित करने में सहायक
पीसीओएस की समस्या में वजन बढ़ना एक आम समस्या है, जो शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण हो सकता है। शरीर में इंसुलिन का स्तर ज्यादा होने के कारण फैट जमा होने लगता है। ऐसे में ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर में मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने, इंसुलिन में सुधार करने और वजन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
2022 में Nutricion Hospitalaria में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, ओमेगा-3 सप्लीमेंट लेने से उन लोगों के पेट की चर्बी और फैट प्रतिशत को कम करने में मदद मिली है, जो पहले से वजन घटाने की डाइट ले रहे थे और जिनका वजन या मोटापा ज्यादा था।
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हार्ट के लिए फायदेमंद
पीसीओएस की समस्या से पीड़ित महिलाओं को हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ओमेगा-3 खराब कोलेस्ट्रॉल (bad cholesterol) को कम करने, हार्ट को स्वस्थ रखने और हार्ट की बीमारियों से बचाव करने में भी मदद मिलती है।
मुंहासों को कम करें
पीसीओएस की समस्या से पीड़ित महिलाओं को हार्मोनल असंतुलन के कारण मुंहासे और स्किन से जुड़ी समस्याएं होती हैं। ओमेगा-3 के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण स्किन की सूजन को कम करने, एक्ने में सुधार करने और हार्मोन्स को बैलेंस करने में फायदेमंद हो सकते हैं।
MDPI में Life Journal में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, एक्ने के मरीजों में की गई जांच में पाया गया है कि उनके शरीर में ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी होती है। इन मरीजों में ओमेगा-3 का लेवल 5.15% पाया गया, जबकि सेहत के लिए यह 8% से 11% के बीच होना चाहिए।
हार्मोन्स को बैलेंस करे
पीसीओएस की समस्या में महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स असंतुलित रहते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर के हार्मोन्स को संतुलित रखने में मदद करता है। जिससे पीसीओएस के लक्षणों में भी सुधार करने में मदद मिल सकती है।
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ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए क्या खाएं?
डॉ. गायत्री कार्तिक नागेश कहती हैं, "पीसीओएस की समस्या के कारण होने वाली समस्याओं से राहत देने में ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर फूड्स को डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए सैल्मन और सार्डिन जैसे फैटी फिश, अखरोट और अलसी के बीज को डाइट में शामिल किया जा सकता है।"
सप्लीमेंट्स का सेवन कब करें?
डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन कहती हैं, अगर किसी कारण से डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड पर्याप्त मात्रा में न मिल पाने पर डॉक्टर की सलाह के साथ सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं। इसके सप्लीमेंट्स को लंच और डिनर के साथ लिया जा सकता है। इसके अलावा, पीसीओएस की समस्या से राहत के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करना जरूरी हो जाता है।
PCOS में महिलाओं के लिए 2 ग्राम प्रतिदिन ओमेगा- 3 की खुराक बेहतर मानी जाती है। 2017 में Journal Of Research In Medical Sciences में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, जिन महिलाओं को 6 महीने तक 2 ग्राम प्रतिदिन ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स की खुराक फायदेमंद साबित हुई है। इस मात्रा में ओमेगा-3 सप्लीमेंट लेने वाली महिलाओं में बेली फैट कम हुआ, अच्छा कोलेस्ट्रॉल बढ़ा और बैड कोलेस्ट्रॉल के साथ फैट कम हुआ। साथ ही पीरियड्स में भी सुधार हुआ है।
सावधानियां
ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन सीमित मात्रा में डॉक्टर की सलाह के साथ ही करें, खासकर सप्लीमेंट्स का। इसका बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन करने से महिलाओं को पेट से जुड़ी समस्या और ब्लड थिनिंग की समस्या हो सकती है।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
पीसीओएस की समस्या में महिलाओं को अगर लंबे समय तक पीरियड्स के अनियमित होने, अधिक मुंहासे होने, चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल आने, सूजन आने, अधिक वजन बढ़ने, हार्ट से जुड़ी समस्या होने और इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या होने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। इसके अलावा, ओमेगा-3 फैटी एसिड सप्लीमेंट्स का सेवन डॉक्टर की सलाह के साथ ही करें।
निष्कर्ष
ओमेगा-3 फैटी एसिड पीसीओएस की समस्या से पीड़ित महिलाओं के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। इसका सेवन करने से हार्मोन्स को बैलेंस करने, सूजन कम करने, इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करने, हार्ट को हेल्दी रखने, वजन कम करने, बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने, मुंहासों को कम करने और पीरियड्स को नियमित करने में मदद मिलती है। हालांकि इसके लिए सिर्फ ओमेगा-3 पर्याप्त नहीं है। इसके साथ बैलेंस डाइट लें और हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें। ध्यान रहे, ओमेगा-3 फैटी एसिड सप्लीमेंट्स का सेवन सीमित मात्रा में डॉक्टर की सलाह के साथ ही करें।
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FAQ
अगर मुझे पीसीओएस है तो क्या मुझे ओमेगा 3 लेना चाहिए?
पीसीओएस की स्थिति में ओमेगा-3 फैटी एसिड से युक्त फूड्स का सेवन करना चाहिए। वहीं, स्वास्थ्य संबंधी समस्या महसूस होने पर डॉक्टर की सलाह के साथ सप्लीमेंट्स का सेवन किया जा सकता है।PCOS में क्या नहीं खाना चाहिए?
पीसीओएस की स्थिति में महिलाओं को मैदा से बने फूड्स, प्रोसेस्ड फूड्स, तला-भुना, अधिक मीठा और अधिक नमक युक्त फूड्स खाने से बचना चाहिए। इनका अधिक सेवन करने से पीसीओएस के लक्षणों के बिगड़ने की समस्या हो सकती है।पीसीओएस के लिए ओमेगा 3 लेने का सबसे अच्छा समय कब है?
पीसीओएस की स्थिति में ओमेगा-3 को लंच या डिनर के साथ लिया जा सकता है। इससे शरीर में ओमेगा-3 के अवशोषण को बेहतर करने में मदद मिल सकती है।ओमेगा 3 बढ़ाने के लिए क्या खाएं?
शरीर में ओमेगा-3 के स्तर को बढ़ाने के लिए डाइट में सार्डिन या सैल्मन जैसी फैटी फिश, अलसी के बीज, चिया सीड्स और अखरोट जैसे फूड्स को शामिल किया जा सकता है।
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Current Version
Apr 13, 2026 15:03 IST
Modified By : Priyanka Sharma Apr 13, 2026 15:03 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Archana Jain