Sun Nov 1, 2026 | 03:47 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Aravinda S N , Lead Consultant – Internal Medicine

एंटीबायोटिक खाने के बाद लग गए दस्त? जानिए पेट को तुरंत आराम देने के लिए क्या खाएं और क्या नहीं

एंटीबायोटिक्स के कारण होने वाले दस्त (AAD) आंतों के बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ देते हैं, जिससे पाचन से जुड़ी समस्याएं होती हैं। इससे राहत पाने के लिए लिक्विड डाइट, सादा खाना और प्रोबायोटिक्स का सेवन करें। गंभीर लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
एंटीबायोटिक खाने के बाद लग गए दस्त? जानिए पेट को तुरंत आराम देने के लिए क्या खाएं और क्या नहींएंटीबायोटिक खाने के बाद लग गए दस्त? जानिए पेट को तुरंत आराम देने के लिए क्या खाएं और क्या नहीं

इंफेक्शन और कई स्वास्थ्य समस्याओं में लोग एंटीबायोटिक्स का सेवन करते हैं, लेकिन इनको लेने के बाद कई बार लोगों को दस्त की समस्या हो जाती है। ऐसे में अक्सर लोगों को खान-पान का खास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है, ताकि पेट को आराम मिले और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बना रहे। ऐसे में आइए इस बारे में Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV Hospital, Bengaluru से जानें।

एंटीबायोटिक के कारण दस्त क्यों होते हैं?

डॉ. अरविंद के अनुसार, एंटीबायोटिक इलाज के दौरान दस्त होना एक आम साइड इफेक्ट है। हालांकि एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल बैक्टीरियल इंफेक्शन से लड़ने के लिए किया जाता है, लेकिन ये पाचन तंत्र में मौजूद नेचुरल बैक्टीरिया के बैलेंस को भी प्रभावित कर सकते हैं। इससे पाचन प्रक्रिया में बाधा आ सकती है, जिसके कारण पतले या पानी जैसे दस्त, पेट में बेचैनी और पेट फूलने (ब्लोटिंग) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया को मारकर या उनकी ग्रोथ को रोकने का काम करते हैं। हालांकि, ये हमेशा हानिकारक बैक्टीरिया और आंतों में नेचुरल रूप से मौजूद फायदेमंद बैक्टीरिया के बीच फर्क नहीं कर पाते हैं। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो पाचन पर कुछ समय के लिए असर पड़ सकता है। एंटीबायोटिक से जुड़े हल्के दस्त, इलाज के दौरान या कोर्स पूरा होने के कुछ समय बाद शुरू हो सकते हैं।

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दस्त से राहत के लिए क्या खाएं?

डॉ. अरविंद का कहना है, हल्के लक्षणों को नियंत्रित करने में खान-पान और शरीर में पानी की मात्रा (हाइड्रेशन) बनाए रखना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, हेल्दी और जल्दी पचने वाले फूड्स को खाएं।

1. हेल्दी लिक्विड डाइट लें

दस्त होने पर, बार-बार मल त्याग के कारण शरीर से जो पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं, उनकी भरपाई के लिए पर्याप्त मात्रा में लिक्विड लेने चाहिए। अगर शरीर से बहुत ज्यादा पानी निकल गया हो, तो ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) काफी मददगार हो सकता है। नारियल पानी, साफ सूप और अन्य उपयुक्त लिक्विड भी शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।

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2. सादा खाना खाएं

डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, खाना सादा, आसानी से पचने वाला और कम मात्रा में होना चाहिए। आप अपनी डाइट में चावल, नरम खिचड़ी, केला, टोस्ट, उबले आलू और दही (अगर आपको इनसे कोई परेशानी न हो) शामिल कर सकते हैं।

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3. प्रोबायोटिक्स युक्त डाइट लें

डॉ. अरविंद का कहना है, कुछ मामलों में, प्रोबायोटिक्स आंतों के बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, ये आपके लिए सही हैं या नहीं, यह आपकी व्यक्तिगत स्थिति, इस्तेमाल की जा रही एंटीबायोटिक और आपके ओवरऑल स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। इन्हें कभी भी मेडिकल इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।

साल 2026 में Frontiers in Nutrition में सिस्टमेटिक रिव्यू में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, एंटीबायोटिक दवाएं अक्सर आंत के अच्छे बैक्टीरिया का बैलेंस बिगाड़ देती हैं, जिससे एंटीबायोटिक-जनित दस्त (AAD) की समस्या हो सकती है। इस परेशानी से बचने के लिए दही जैसे प्रोबायोटिक फूड्स या सप्लीमेंट्स का सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है, क्योंकि इनमें मौजूद लैक्टोबैसिलस और बिफिडोबैक्टेरियम जैसे अच्छे बैक्टीरिया आंतों के माइक्रोऑर्गेनिज्म का संतुलन बहाल करने और उनकी सुरक्षा परत मजबूत करने में मदद करते हैं।

दस्त की स्थिति में क्या नहीं खाएं?

डॉ. अरविंद के अनुसार, ज्यादा फैट वाले खाने, बहुत अधिक मसालेदार चीजें, तले हुए स्नैक्स और बहुत ज्यादा कैफीन का सेवन कुछ लोगों में पाचन संबंधी परेशानी को और बढ़ा सकता है। अगर दूध या अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स से पेट फूलने या दस्त की समस्या बढ़ती है, तो इनका सेवन सीमित कर देना चाहिए।

डॉक्टर से सलाह कब लें?

डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, अगर दस्त गंभीर हो जाएं, कुछ दिनों से ज्यादा समय तक बने रहें या इनके साथ बुखार आए, मल में खून या बलगम (म्यूकस) दिखे, पेट में तेज दर्द हो या डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के लक्षण दिखें, जैसे पेशाब कम आना, चक्कर आना और बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। कभी-कभी एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल से क्लोस्ट्रिडियोइड्स डिफिसाइल (Clostridioides difficile) नामक बैक्टीरिया से इंफेक्शन हो सकता है, जिसके लिए एक सही मेडिकल इलाज की जरूरत होती है।

मरीजों को खुद से एंटीबायोटिक्स लेना बंद नहीं करना चाहिए और न ही उनमें कोई बदलाव करना चाहिए। अगर दस्त की समस्या हो, तो अपने इलाज करने वाले डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि दवा बदलने की जरूरत है या आगे और जांच की जरूरत है।

निष्कर्ष

एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन से आंतों के अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने के कारण दस्त (AAD) की समस्या हो सकती है। इससे राहत पाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस और नारियल पानी पिएं, तथा सादा खाने जैसे खिचड़ी, केला और दही का सेवन करें। वहीं, मसालेदार, ऑयली और अत्यधिक कैफीन वाली चीजों से बचें। अगर दस्त गंभीर हो जाएं, उनमें खून या बलगम आए, साथ में तेज बुखार या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक्स लेना बंद न करें या इनमें कोई बदलाव न करें।

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FAQ

  • दस्त लगने के क्या कारण हैं?

    कई बार दूषित खाना खाने, दवाइयों का सेवन करने, खान-पान में गड़बड़ी और स्ट्रेस जैसे कई कारणों से लोगों को दस्त की समस्या हो सकती है। 
  • एंटीबायोटिक दवा खाने से क्या नुकसान होता है?

    एंटीबायोटिक दवाइयों का बिना कारण सेवन करने और अधिक सेवन करने से व्यक्ति को पाचन से जुड़ी समस्याएं होने, फंगल इंफेक्शन, एलर्जी, रिएक्शन, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और अंगों को नुकसान होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 01, 2026 14:28 IST

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