Heart Health: हार्ट ट्रांसप्‍लांट कराने की जरूरत कब पड़ती है, जानिए Transplant का खर्च और पूरी प्रक्रिया

Heart Transplant Surgery: हृदय प्रत्यारोपण या हार्ट ट्रांसप्‍लांट एक सर्जिकल प्रॉसीजर है। इसके बारे में विस्‍तार से जानने के लिए पढ़ें ये आर्टिकल।

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Written by: डॉ संतोष कुमार डोराPublished at: Aug 04, 2020Written by: Atul Modi
Heart Health: हार्ट ट्रांसप्‍लांट कराने की जरूरत कब पड़ती है, जानिए Transplant का खर्च और पूरी प्रक्रिया

Heart Transplantation In Hindi: हाई ब्‍लड प्रेशर से शुरु होकर हृदय रोग कई गंभीर रोगों का कारण बनता है। इनमें हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और कॉर्डियक अरेस्‍ट जैसे कई हृदय रोग हैं जो जानलेवा हैं। आमतौर पर हृदय से जुड़ी शुरुआती समस्‍याएं नॉर्मल दवाओं और परहेज से ठीक हो जाती हैं। मगर कई बार लापरवाही या किसी अन्‍य रोगों के कारण हृदय संबंधी समस्‍याएं बढ़ जाती हैं। हृदय रोगों का समय रहते उपचार न किए जाने पर यह घातक हो सकते हैं। गंभीर स्थितियों में कॉर्डियोलॉजिस्‍ट 'हार्ट बाइपास सर्जरी' या किसी अन्‍य उपचार के विकल्‍प चुनते हैं। मगर कई बार ऐसी स्थिति भी बनती है, जिसमें मरीज का हार्ट ट्रांसप्‍लांट (Heart Transplant) करना पड़ता है। 

आज हम आपको इस लेख में बताएंगे, हार्ट ट्रांसप्‍लांट क्‍या होता है, हार्ट ट्रांसप्‍लांट का प्रोसीजर क्‍या होता है, हार्ट ट्रांसप्‍लांट का खर्च और हार्ट ट्रांसप्‍लांट का रिकवरी टाइम क्‍या है?

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हार्ट ट्रांसप्‍लांट क्‍या है- What Is Heart Transplant In Hindi

हार्ट ट्रांसप्‍लांट को हिंदी में हृदय प्रत्यारोपण भी कहा जाता है। यह एक शल्य प्रक्रिया (Surgical Procedure) है जिसमें एक रोगग्रस्त हृदय को सामान्य दाता (Donor) के हृदय द्वारा बदल दिया जाता है। हालांकि, यहां इस बात का ध्‍यान रखना महत्‍वपूर्ण होता है कि डोनर के हार्ट का साइज और ब्‍लड ग्रुप 'प्राप्तकर्ता' शरीर के अनुकूल होना चाहिए। डोनर का हार्ट आमतौर पर रिश्तेदारों से उचित सहमति प्राप्त करने के बाद एक ब्रेन डेड व्यक्ति से प्राप्त होता है।

हार्ट ट्रांसप्‍लांट कब कराया जाता है? 

हार्ट फेलियर (दिल की विफलता) हार्ट ट्रांसप्लांट का सबसे सामान्य कारण है। हार्ट फेलियर (Heart Failure) एक ऐसी स्थिति है जब दिल शरीर द्वारा आवश्यकतानुसार रक्त पंप करने में सक्षम नहीं होता है। शुरुआत में हृदय की विफलता को इटियोलॉजी, सॉल्‍ट रिस्ट्रिक्‍शन, फ्लुड रिस्ट्रिक्‍शन और दवाओं के माध्‍यम से उपचार किया जाता है। कुछ मामलों में, विशेष पेसमेकर (Cardiac Resynchronization Therapy) हार्ट पंपिंग फंक्शन को बेहतर बनाने में सहायक है। हालांकि जब हार्ट फेलियर सभी संभावित विकल्‍पों के बाद भी ठीक नहीं होता है तब हृदय प्रत्यारोपण का एक मात्र विकल्‍प होता है।

कुछ अन्‍य परिस्थितियों में भी हार्ट ट्रांसप्‍लांट एक विकल्‍प के तौर पर देखा जाता है, जो निम्‍नलिखित हैं: 

  • दवाओं के बावजूद Refractory Ventricular Arrhythmia की समस्‍या। 
  • कुछ प्रकार के जन्मजात हृदय रोग। 
  • कोरोनरी धमनी रोग खासकर जब चिकित्सा, एंजियोप्लास्टी और सर्जिकल विकल्प समाप्त हो जाते हैं या संभव नहीं होते हैं। 
  • पहले से ही ट्रांसप्‍लांट हृदय का फेलियर
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हार्ट ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता है?

हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी का प्रॉसीजर (Heart Transplant Surgery Procedure) बहुत ही जटिल होता है, यह एक बड़ी सर्जरी है। जब दाता दिल (Donor Heart) उपलब्ध होता है, तो प्राप्तकर्ता को अस्पताल में बुलाया जाता है। कभी-कभी प्राप्तकर्ता को पहले से ही अस्पताल में हार्ट फेलियर के उपचार के लिए या ट्रांसप्‍लांट के लिए भर्ती कराया जा सकता है। जिसे हृदय का प्रत्‍यारोपण किया जाता है उसकी प्रतिरक्षा को दबाने के लिए दवाएं दी जाती हैं, ताकि उसका शरीर डोनर के दिल को रिजेक्‍ट न करे। उसे एंटीबायोटिक्स जैसी अन्य दवाएं भी दी जाती हैं। उसे ऑपरेशन थियेटर में ले जाया जाता है और सामान्य ऐनेस्थिसिया दिया जाता है। उसे हार्ट-लंग मशीन पर रखा गया है। रोगग्रस्त हृदय को हटा दिया जाता है, और उस स्थान पर डोनर के दिल को फिट कर दिया जाता है। सर्जरी में आमतौर पर 5 से 6 घंटे लगते हैं।

हार्ट ट्रांसप्लांट में कितना खर्च आता है?

आमतौर पर भारत में हार्ट ट्रांसप्लांट का खर्च निजी अस्पतालों में लगभग 25 से 30 लाख तक होता है। इसके अलावा, यदि अस्पताल में किसी समस्‍या के कारण मरीज को लंबे समय तक भर्ती करना पड़ता है तो ये खर्च बढ़ भी सकता है। हालांकि, बीमा पॉलिसी के माध्‍यम से इसमें कवर भी मिल सकता है। इससे इलाज सस्‍ते में भी हो सकता है।

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हार्ट ट्रांसप्लांट किस आयु वर्ग के लोगों के लिए बेहतर है?

हार्ट ट्रांसप्लांट 60 वर्ष से कम उम्र के ज्यादातर युवा रोगियों को लाभ होता है। हालांकि, यह 70 वर्ष की आयु के रोगियों में भी किया जा सकता है, यदि रोगी शारीरिक रूप से स्वस्थ है। अधिक आयु वर्ग में सर्जिकल का जोखिम और प्रत्यारोपण रिजेक्‍शन दर अधिक होती है। इसके अलावा हृदय एक अनमोल अंग है, जो आमतौर पर युवा और उत्पादक आयु वर्ग के रोगियों के लिए आरक्षित होना चाहिए।

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हार्ट ट्रांसप्लांट का रिकवरी टाइम

ट्रांसप्लांट सर्जरी के बाद रोगी को अस्‍पताल में लगभग 2 से 3 सप्ताह तक रहना पड़ता है। नियमित फिजियोथेरेपी सर्जरी के बाद रोगी को जल्दी ठीक होने में मदद करती है। अधिकांश रोगी को सर्जरी से 2 से 3 महीने में नियमित गतिविधियों को करने में सक्षम हो जाते हैं। 

हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद भोजन और व्यायाम

भोजन: हृदय प्रत्यारोपण के रोगियों के लिए आहार बहुत महत्वपूर्ण है। आहार सभी पोषण जरूरतों को पूरा करना चाहिए और साथ ही यह किसी भी रोगाणुओं से मुक्त होना चाहिए। हृदय प्रत्यारोपण रोगियों के लिए आहार की संक्षिप्त दिशानिर्देश निम्नलिखित हैं: 

  • कच्चा भोजन न लें क्योंकि कच्चे भोजन से संक्रमण का खतरा रहता है। सलाद, अनपश्चराइज्ड मिल्क प्रोडक्ट्स, सुशी आदि से बचें। खाने से पहले फलों को अच्छी तरह से छील लें, क्योंकि छिलके में रोगाणु हो सकते हैं। बासी भोजन न लें।
  • सोडियम और चीनी की उच्च मात्रा वाले भोजन से बचें। जैसा कि आप स्टेरॉयड जैसी दवाएं ले रहे होंगे, जो खुद ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकती हैं, शुगर युक्त आहार खाने से बच सकते हैं। इम्यूनोसप्रेसेन्ट दवाएं गुर्दे को प्रभावित कर सकती हैं और रक्तचाप बढ़ा सकती हैं, इस प्रकार अतिरिक्त नमक लेने से बचें।
  • शराब और धूम्रपान से पूरी तरह से परहेज करें

व्यायाम: निम्नलिखित हृदय प्रत्यारोपण रोगियों के लिए व्यायाम करने के लिए एक सामान्य दिशानिर्देश हैं:

  • एक्‍सरसाइज करने से पहले वार्मअप करें।
  • पैदल चलना, साइकिल चलाना जैसी एक्टिविटी कर सकते हैं। 
  • 5 किलोग्राम से अधिक भारी वजन न उठाएं।
  • सिट अप्स, पुश अप्स और पुल अप्स न करें।
  • ऐसी किसी भी गतिविधि में हिस्‍सा न लें जो आपके सीने पर दबाव डालते हों।
  • कुछ दिनों के लिए यौन क्रियोओं से दूर रहें।

Inputs: Dr Santosh Kumar Dora, Senior Cardiologist, Asian Heart Institute, Mumbai

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