हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्‍ट में क्‍या अंतर है, इन स्थितियों में पेशेंट को जान बचाने के लिए करना चाहिए?

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच का फर्क (Heart attack and cardiac arrest) बता रहे हैं मुंबई के कार्डियोलॉजिस्‍ट डॉक्‍टर संतोष कुमार डोरा।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Aug 22, 2019
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्‍ट में क्‍या अंतर है, इन स्थितियों में पेशेंट को जान बचाने के लिए करना चाहिए?

Difference Between Heart Attack And Cardiac Arrest: हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट ये वो शब्द हैं जो ह्रदय से जुड़े संकट को सूचित करते हैं। हालांकि अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच भ्रमित हो जाते हैं। हालांकि दोनों ही ह्रदय से जुड़ी चिकित्सकीय आपातकालीन स्थितियां हैं लेकिन इन दोनों से बिल्कुल अलग तरीके से निपटा जाता है। हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच का फर्क बता रहे हैं– डॉक्‍टर संतोष कुमार डोरा, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, एशियन हार्ट इंस्टिट्यूट, मुंबई।

हार्ट अटैक क्या होता है- What is a heart attack

हार्ट अटैक या दिल का दौरा तब होता है जब अचानक ह्रदय को होने वाली खून की आपूर्ति में अवरोध उत्पन्न हो जाता है जो आम तौर पर खून के थक्के या कोलेस्ट्रोल के जमने से, जिसे प्लैक कहते हैं, होता है। इस तरह के खून की आपूर्ति में कमी की वजह से ह्रदय की मांसपेशियों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

हार्ट अटैक आमतौर पर किसी एक प्लैक के फटने की वजह से आता है जिससे फटने की जगह पर खून का थक्का बन जाता है। इस थक्के की वजह से कोरोनरी धमनी से जानेवाले खून की आपूर्ति बंद हो जाती है जिससे हार्ट अटैक आता है।

हृदय स्‍वास्‍थ्‍य

दिल का दौरा के लक्षण- Symptoms of heart attack

छाती में दर्द, शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द- ऐसा महसूस हो सकता है जैसे दर्द छाती से आपके हाथों की ओर बढ़ रहा है (आमतौर पर बायां हाथ प्रभावित होता है, लेकिन ये दोनों हाथों को भी प्रभावित कर सकता है), जबड़ा, गला, गर्दन, पीठ और पेट में दर्द शामिल है। 

चक्कर आना, पसीना आना, साँस फूलना, मितली आना या उल्टी, बहुत ज़्यादा चिंतित होना (एक घबराहट के दौरे की तरह), खांसी या घरघराहट शामिल है।

क्या है कार्डियक अरेस्ट- Sudden cardiac arrest: Symptoms and causes

कार्डियक अरेस्ट का मतलब है किसी व्यक्ति में जिसमें ह्रदय रोग का निदान हुआ हो या न हुआ हो, अचानक ह्रदय का काम करना बंद हो जाना। ये तब होता है जब ह्रदय अचानक पूरे शरीर के लिए खून की पम्पिंग करना बंद कर देता है।  

कार्डियक अरेस्ट के दौरान या तो ह्रदय की धड़कन रुक जाती है या फिर वो इतनी तेजी से धड़क रहा होता है जिससे कार्डियक चेंबर का प्रभावी तौर पर संकुचन नहीं हो पाता। इन दोनों ही मामलों में क्योंकि ह्रदय का संकुचन या तो नहीं है या प्रभावी नहीं है, शरीर के महत्वपूर्ण अवयवों को खून की आपूर्ति नहीं हो पाती। एक बार मस्तिष्क में खून पहुंचना बंद हो जाए तो मरीज़ बेहोश हो जाता है और साँस रुक जाती है। होश न रहना, सांसों और धड़कन के न होने से कार्डियक अरेस्ट का निदान हो पाता है।

कार्डिएक अरेस्ट होने की एक मुख्य वजह है हार्ट अटैक:

ऐसा नहीं है कि हर कोई व्यक्ति जिसे हार्ट अटैक आता है उसे कार्डिएक अरेस्ट भी होगा। लेकिन हार्ट अटैक से पीड़ित एक चौथाई मरीज़ों को अचानक कार्डियक अरेस्ट आने की संभावना होती है। ऐसा होने का कारण हार्ट अटैक के तुरंत बाद ह्रदय में होने वाली विद्युतीय खराबी है।

कार्डियक अरेस्ट की एक और मुख्य वजह पहले आए हार्ट अटैक से कमज़ोर हुआ ह्रदय और इससे क्षतिग्रस्त हुए ऊतक है। ऐसे मामलो में कार्डियक अरेस्ट को पहले ही एआईसीडी (ऑटोमैटिक इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफाइब्रिलेटर) इम्प्लांटेशन के माध्यम से रोका जा सकता है। एआईसीडी एक उपकरण है जो कार्डियक अरेस्ट का पता लगा लेता है और चंद सेकंडों में ज़रुरी थेरेपी उपलब्ध करा देता है। जानें कितने प्रकार के होते हैं हृदय रोग और क्या हैं इनके लक्षण

एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल अचानक आए कार्डियक अरेस्ट से 700,000 लोगों की मृत्यु हो जाती है जो देश में होने वाली सभी मौतों का 10% है।

जब अचानक आए कार्डियक अरेस्ट से जूझ रहे व्यक्ति के बचने की संभावना की बात होती है तो इसमें उपचार के लिए लगने वाला समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि कार्डियक अरेस्ट 5 मिनट से ज्यादा समय तक जारी रहता है तो मस्तिष्क को नुकसान होने की संभावना होती है और यदि कार्डियक अरेस्ट 10 मिनट से ज्यादा समय तक जारी रहता है तो मरीज़ की मौत होने की संभावना होती है। इसलिए कार्डिएक अरेस्ट के लिए जितनी जल्दी हो सके प्राथमिक उपचार किए जाने चाहिए। 

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्‍ट आने पर क्या करना चाहिए?

हार्ट अटैक के मामले में आपात स्थिति में आंकलन और उपचार किए जाने की ज़रुरत होती है। इसलिए हार्ट अटैक से पीड़ित मरीजों का उपचार बेहतर हो पाता है यदि इसके लक्षण शुरु होने के 1 घंटे के भीतर उन्हें अस्पताल में दाखिल किया जाए। आमतौर पर आपको आपातकालीन विभाग या आईसीयू में स्थिति का सही मूल्यांकन किए जाने के लिए दाखिल किया जाता है।

विशिष्ट क्लिनिकल दिखावों या लक्षणों के आधार पर हार्ट अटैक की आशंका होती है और ईसीजी या इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, खून की जांच और 2डी इकोकार्डियोग्राम जैसी जांच के आधार पर इसकी पुष्टि की जाती है। आमतौर पर जिस धमनी में अवरोध उत्पन्न हुआ है उसे दूर करने के लिए डॉक्टर या तो प्राथमिक एंजियोप्लास्टी करते हैं या धमनी में बाधा बन रहे खून के थक्के को पतला करने और घुलाने के लिए दवाइयां देते हैं।

एक अचानक आने वाले कार्डियक अरेस्ट के बारे में पहले से भविष्यवाणी कर पाना संभव नहीं है लेकिन ये जानना बेहद महत्वपूर्ण हैं कि ऐसी आपातकालीन स्थिति में क्या किया जाना चाहिए।

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पीड़ित व्यक्ति को उपचार मिलने में होने वाले प्रत्येक मिनट की देरी से उसके बचने की संभावना 10 % से कम हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कार्डिओपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), कार्डियक अरेस्ट से पीड़ित व्यक्ति में खून का बहाव सुचारु करने के लिए एक आपातकालीन प्रक्रिया प्रभावकारी उपचार के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहला कदम है। सीपीआर तब तक जारी रखना चाहिए जब तक ऑटोमैटिक इलेक्ट्रिकल डिफाइब्रिलेटर द्वारा इसका विद्युतीय कार्डियोवर्ज़न  करना शुरु न किया जाए।

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इस तरह आप सीपीआर के बारे में जानकर किसी के लिए जिंदगी और मौत का बदलाव ला सकते है जो कार्डियक अरेस्ट से जूझ रहे व्यक्ति के लिए थोड़े समय के लिए खून का बहाव और वायु संचालन बनाए रखने में मददगार होता है।

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