बच्चों के दिल में क्यों होता है छेद? जानें किन कारणों से होता है ऐसा और कैसे करना चाहिए बचाव

कई बच्चे के दिल में छेद होने के मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं किन कारणों से होता है ऐसा। जानें क्या है इसका मुख्य कारण और बचाव। 

Vishal Singh
Written by: Vishal SinghUpdated at: Jun 01, 2020 17:49 IST
बच्चों के दिल में क्यों होता है छेद? जानें किन कारणों से होता है ऐसा और कैसे करना चाहिए बचाव

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आपने कई बार सुना होगा कि बच्चों के दिल में जन्मजात से ही छेद होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है। आमतौर पर बच्चों के जब दिल में छेद होता है तो इसका पता गर्भावस्था के समय ही चल जाता है। इस स्थिति में हमेशा घबराने की बात नहीं होती इसका इलाज काफी आसानी से किया जा सकता है।

आपको बता दें कि बच्चे की इस स्थिति में उसके दिल में खून का बहाव सामान्य से थोड़ा अलग हो जाता है। इसके इलाज के लिए बच्चे के दिल की स्थिति पर निर्भर होता है। लेकिन डॉक्टर के साथ-साथ आपको भी इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि इस स्थिति में क्या लक्षण होते हैं और इसके कारण क्या होते हैं। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि बच्चों के दिल में छेद के लक्षण क्या होते हैं और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है। 

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क्या होता है दिल में छेद (What Is A Hole In The Heart)

ये एक प्रकार का हृदय संबंधित रोग है, इस स्थिति में बच्चे के दिल में छेद हो सकता है या फिर हृदय वॉल, हृदय वॉल्व और ब्लड वैसल्स में समस्याएं हो सकती है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अनुसार, संयुक्त राज्य में करीब 1 मिलियन वयस्क और 1 मिलियन बच्चे जन्मजात हृदय रोग के साथ रहते हैं।

दिल में छेद के कारण (Causes Of Hole In The Heart)

  • हृदय दोष परिवार में चलता आ रहा हो।
  • गर्भावस्था के दौरान कुछ दवाओं का सेवन करने से बच्चे को दिल की खराबी का खतरा बढ़ जाता है।
  • गर्भावस्था के दौरान अल्कोहल या अवैध दवाओं का उपयोग करने से बच्चे में हृदय दोष होने का खतरा बढ़ सकता है।
  • जिन माताओं को गर्भावस्था के पहले तिमाही के दौरान वायरल संक्रमण हुआ था, उनमें दिल से संबंधित रोग वाले बच्चे को जन्म देने की संभावना भी ज्यादा होती है। 
  • डायबिटीज के साथ होने वाले रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि बचपन के विकास को प्रभावित कर सकती है।

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बच्चों के हृदय में छेद के लक्षण (Symptoms of children's heart piercing)

  • जन्म के वक्त, शिशु के वजन मे कमी होना।
  • छाती में दर्द होना।
  • बच्चे के विकास में देरी।
  • नीले होंठ, त्वचा, उंगलियां और पैर की उंगलियां
  • बार-बार सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ होना। 
  • बच्चे में बेहोशी का खतरा।
  • शरीर में सूजन होना।
  • हद से ज्यादा थकान महसूस करना।
  • सिर चकराना।

बचाव (Preventions) 

    • अगर आप गर्भवती होने के लिए योजना बना रही हैं, तो अपने डॉक्टर से किसी भी नुस्खे या ओवर-द-काउंटर दवाओं के बारे में बात करें।
    • अगर आप डायबिटीज से पीड़ित महिला हैं तो आपको गर्भावस्था से पहले ये जरूर जान लेना चाहिए कि आपका ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित है या नहीं। गर्भवती होने पर बीमारी का प्रबंधन करने के लिए अपने डॉक्टर की सलाह लेना आपके लिए बहुत जरूरी है।
    • अगर आपको रूबेला, या जर्मन खसरा का टीका नहीं लगा हुआ तो आपके बच्चे के दिल से संबंधित रोग का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए आपको पहले अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए या फिर संबंधित सभी टीके लगवाने चाहिए। 
    • परिवार में किसी को अगर हृदय संबंधित रोग है और आप गर्भावस्था के लिए योजना बना रही हैं तो इससे पहले आपको डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए और गर्भावस्था के बाद समय-समय पर जांच के लिए डॉक्टर से मिलना चाहिए। 
    • इसके अलावा आपको गर्भावस्था के दौरान शराब पीने और अवैध दवाओं का सेवन करने से बचना चाहिए। 
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