जानें कितने प्रकार के होते हैं हृदय रोग और क्या हैं इनके लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 20, 2018
Quick Bites

  • हृदय रोग 6 प्रकार के होते हैं, जिनमें ज्यादातर खतरनाक होते हैं।
  • हृदय रोगों के इन लक्षणों को जानना सभी के लिए जरूरी है।
  • भारत में हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति हृदय रोग से मरता है।

 

हृदय रोग ऐसी बीमारियां हैं, जिनसे आपका हृदय यानी दिल प्रभावित होता है। 2016 में छपे जर्नल 'सर्कुलेशन' के अनुसार कार्डियोवस्कुलर रोग भारत सहित दुनियाभर के देशों में मौत का एक प्रमुख कारण हैं। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के एक शोध में पाया गया है कि भारत में 26 साल की उम्र से कम के लोगों में हृदय रोगों का खतरा 34% तक बढ़ गया है। इस शोध के मुताबिक भारत में हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति की मौत कार्डियोवस्कुलर रोगों से होती है।
हालांकि कुछ लोग हृदय रोग का मतलब केवल हार्ट अटैक यानी हृदयाघात जानते हैं। मगर हार्ट अटैक के अलावा भी हृदय रोग कई प्रकार के होते हैं। आइए आपको बताते हैं कितने प्रकार के होते हैं हृदय रोग और क्या हैं इनके लक्षण।

एरिथमिया

एरिथमिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। एरिथमिया के कारण रोगी के दिल की धड़कन कभी सामान्य से तेज हो जाती है और कभी सामान्य से धीरे हो जाती है। एरिथमिया तब होता है जब दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाले इलेक्ट्रिक वेव्स ठीक से काम नहीं करते हैं। दिल की धड़कन अनियमित हो जाने आपको यह स्थिति अपने सीने, गले अथवा गर्दन में महसूस हो सकती है।

 

एरिथमिया के लक्षण

  • अचानक दिल की धड़कन तेज होना
  • अचानक दिल की धड़कन धीरे होना
  • ब्लड प्रेशर कम हो जाना
  • सीने में तेज दर्द
  • बोलने में परेशानी होना
  • अचानक थकान और सुस्ती आ जाना
  • चक्कर आना
  • सांस लेने में परेशानी होना
  • कुछ पलों के लिए धड़कन रुक जाना और फिर चलने लगना आदि

एथेरोस्क्लेरोसिस

एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण आपके दिल में ब्लड की सप्लाई कम हो जाती है। दिल तक सही मात्रा में ब्लड न पहुंचने से कई बार रोगी के लिए गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है। एथेरोस्क्लेरोसिस कई कारणों से हो सकता है। आमतौर पर शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ी हुई मात्रा, इंसुलिन हार्मोन की मात्रा घटना, हाई ब्लड प्रेशर, अधिक धूम्रपान, कम शारीरिक मेहनत, अधिक उम्र और अनुवांशिक कारणों से हो सकता है।

एथेरोस्क्लेरोसिस के लक्षण

  • हाथ पैरों में ठंड लगना
  • हाथ और पैरों में कंपकंपी
  • बिना किसी वजह अचानक दर्द होना
  • हाथ और पैरों में कमजोरी महसूस होना
  • समय से पहले माथे पर झुर्रियां
  • सांस लेने में परेशानी
  • सिरदर्द की समस्या
  • चेहरे का सुन्न पड़ जाना
  • पैरालिसिस हो जाना
  • माथे पर झुर्रियां

कॉन्जेनिटल हार्ट डिफेक्ट्स यानी जन्मजात हृदय दोष

जन्मजात हृदय दोष वो परेशानियां होती हैं, जो गर्भावस्था में ही शिशु के दिल में पैदा हो जाती हैं। गर्भ में हृदय और बड़ी रक्त वाहिनियों में विकास के दौरान हुए दोषों से इन विकारों का जन्म होता है। जब तक बच्चा गर्भाशय में रहता है या जन्म के तुरंत बाद तक गंभीर हृदय की खराबी के लक्षण साधारणतः पहचान में आ जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में यह तब तक पहचान में नहीं आते जब तक कि बच्चा बड़ा नहीं हो जाता और कभी-कभी तो वयस्क होने तक यह पहचान में नहीं आता। इनमें से कुछ हृदय दोषों को कभी ठीक नहीं किया जा सकता है, जबकि कुछ का इलाज संभव है। आमतौर पर दिल में छेद होना ऐसी ही एक गंभीर समस्या है, जो कई शिशुओं में जन्म से पहले ही हो जाती है।

जन्मजात हृदय दोष के लक्षण

  • शरीर के अंगों जैसे मुंह, कान, नाखूनों और होठों में नीलपन दिखाई देने लगता है।
  • सांस लेने में परेशानी होना
  • बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होता है।
  • शारीरिक गतिविधियों के दौरान जल्दी थक जाना।
  • कई बार बच्चे थकान के कारण अचानक बेहोश हो जाते हैं।
  • शिशु को दूध पीने में परेशानी होना।
  • शिशु का वजन तेजी से कम होने लगना।
  • दूध पीते समय शिशु को पसीना आना
  • शिशु के पैर, पेट और आंखों में सूजन आना।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) या कोरोनरी धमनी रोग

कोरोनरी धमनी रोग (सीएडी) या कोरोनरी हृदय रोग (सीएचडी) एक गंभीर अवस्‍था है। इसमें हृदय को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों युक्त रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में प्लाक जमने के कारण या क्षतिग्रस्त होने के कारण ये हृदय तक पूरी मात्रा में रक्त नहीं पहुंचा पाती हैं। दरअसल प्‍लाक के कारण कोरोनरी धमनियां सिकुड़ जाती हैं। जिसके चलते हृदय को कम मात्रा में रक्‍त प्राप्‍त होता है।

कोरोनरी धमनी रोग के लक्षण

  • सीने में तेज दर्द होना
  • सीने में किसी दबाव या खिंचाव का महसूस होना
  • बेचैनी और पसीना निकलना
  • जी मिचलाना
  • सांस लेने में परेशानी होना या सांस तेज हो जाना
  • पेट में गैस बनना या अपच की समस्या

कार्डियोमायोपैथी

कार्डियोमायोपैथी एक ऐसी बीमारी है, जिसके कारण दिल की मांसपेशियां बड़ी और कठोर हो जाती हैं। इसी कारण ये मांसपेशियां मोटी और कमजोर हो जाती हैं। कार्डियोमायोपैथी को लोग ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम भी कहते हैं क्योंकि अक्सर ज्यादा खुशी या ज्यादा गम होने पर व्यक्ति में इसके लक्षण देखे जा सकते हैं। कार्डियोमायोपैथी के कारण हार्ट फेल होने का खतरा होता है। हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को इसका ज्यादा खतरा होता है।

कार्डियोमायोपैथी के लक्षण

  • सांस लेने में परेशानी होना
  • आराम की स्थिति में भी सांस लेने में परेशानी होना
  • पैरों, एड़ियों और तलवों में सूजन
  • तरल पदार्थ के कारण पेट फूलने लगना
  • लेटे हुए खांसी आना
  • थकान
  • दिल की धड़कन का तेज होना या असामान्य हो जाना
  • छाती पर दबाव या वजन महसूस होना
  • चक्कर आना और बेहोशी होना

हार्ट इंफेक्शन या हृदय का संक्रमण

बैक्टीरिया हर जगह होते हैं। ये हमारे शरीर में भी होते हैं और हमारे रक्त में भी होते हैं। अगर किसी को दिल से जुड़ी कोई सामान्य बीमारी भी है, तो कई बार रक्त में मौजूद बैक्टीरिया डैमेज टिशू से चिपक जाते हैं और एक तरह के संक्रमण का कारण बनते हैं, जिसे एंडोकार्डाइटिस कहते हैं। दरअसल हृदय के अंदरूनी दीवार को एंडोकार्डियम कहते हैं। जब शरीर के किसी अन्य हिस्से से पहुंचे हुए बैक्टीरिया एंडोकार्डियम तक पहुंच जाते हैं, तो इंफेक्शन का कारण बनते हैं।

हार्ट इंफेक्शन के लक्षण

  • सीने में दर्द
  • खांसी आना
  • बुखार आना
  • तेज ठंड लगना
  • त्वचा पर चकत्ते होना

हार्ट अटैक

हार्ट अटैक हृदय रोग का कोई प्रकार नहीं है बल्कि ये एरिथमिया के अंतर्गत ही आता है। हार्ट अटैक एक ऐसी स्थिति है जब दिल के किसी हिस्से की एक या एक से ज्यादा मांसपेशियों में ठीक से ब्लड सप्लाई न हो पाने के कारण वो हिस्सा मर जाता है। आमतौर पर ऐसा तब होता है जब धमनियों में प्लाक जम जाने के कारण ब्लड की सप्लाई अवरुद्ध होती है।

हार्ट अटैक के लक्षण

  • तेज खांसी आना
  • जी मिचलाना
  • उल्टी होना
  • छाती में तेज दर्द होना
  • चक्कर आना
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • बचैनी

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