Healthcare Heroes Awards 2022: कोविड के दौरान लोगों को मानसिक परेशानियों से उबारने के लिए आगे आया ePsyclinic

epsyclinic के जरिए शिप्रा डावर ने कोविड के दौरान 3 लाख से ज्यादा लोगों को मानसिक परेशानियों से उबरने में मदद की, ताकि लोग उम्मीद न खोएं।

सम्‍पादकीय विभाग
विविधWritten by: सम्‍पादकीय विभागPublished at: Jan 27, 2022Updated at: Jan 27, 2022
Healthcare Heroes Awards 2022: कोविड के दौरान लोगों को मानसिक परेशानियों से उबारने के लिए आगे आया ePsyclinic

कैटेगरी:  डिजिटल हेल्थ केयर

परिचय:  शिप्रा डावर 

योगदान: शिप्रा ने कोविड के दौरान मानसिक रूप से परेशान लोगों की मदद के लिए ‘epsyclinic’ की शुरुआत की। 

नॉमिनेशन का कारण: कोविड के दौरान परेशान लोगों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने और फ्री काउंसलिंग के जरिए उनकी मदद करने के लिए।

कोरोना महामारी के आने के बाद लॉकडाउन, नौकरियां जाने, बाजार की अस्थिरता, अव्यवस्था और स्वास्थ्य की चिंता ने बड़े पैमाने पर लोगों को मानसिक रूप से परेशान किया था। ऐसे में शिप्रा डावर ने ‘epsyclinic’ के जरिए लोगों को मानसिक परेशानियों से उबरने के लिए फ्री काउंसलिंग देना शुरू किया। अपने कॉलेज के समय में शिप्रा खुद डिप्रेशन का शिकार हो गयी थीं। इससे ठीक होने के बाद उन्हें अनुभव हुआ कि मानसिक रूप से परेशान लोगों को किसी ऐसे सेटअप की जरूरत है जहां वो बिना हिचक खुद को ट्रीट करवा सकें। 2015 में, इस विचार के साथ उन्होंने गुरुग्राम में 'epsyclinic' की शुरुआत की। वह अपने इस सेटअप के जरिए लोगों को paid और non-paid सर्विस देने लगीं।

shipra dawar

3 लाख से ज्यादा लोगों को दी मेंटल हेल्थ काउंसलिंग

कोरोना महामारी के दुष्परिणामों से बहुत से लोग डिप्रेशन और स्ट्रेस के शिकार होने लगे। ऐसे लोगों को इमोशनल और मेन्टल हेल्प की जरूरत थी। समय की इस नजाकत को समझते हुए शिप्रा ने अपने epsyclinic के दरवाजे सबके लिए खोल दिए। उन्होंने बिना फीस लिए अपनी टीम के साथ मिलकर, वीडियो और ऑडियो कॉउंसलिंग के जरिए हज़ारों लोगों की मदद की। इसके अलावा बहुत सारे कॉर्पोरेट ऑफिस और गवर्नमेंट संस्थानों ने अपने कर्मचारियों की मनोस्तिथि सुधारने के लिए epsyclinic से सम्पर्क साधा। इस तरह शिप्रा ने कोविड के दौरान लगभग 3 लाख से अधिक लोगों का इलाज किया। शिप्रा के इस महान कार्य के लिए Onlymyhealth ने उनको HealthCare Awards 2021 की सूचि में शामिल किया है। इनको ‘डिजिटल हेल्थ’ केयर कैटेगरी के लिए नॉमिनेट किया गया है। 

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कैसे आया मेन्टल हेल्थ केयर का विचार?

जब Onlymyhealth ने शिप्रा से यह सवाल किया तो उन्होंने इस प्रोफेशन को अपनाने की तीन वजह बताई-

#खुद का अनुभव - जब वह ऑस्ट्रेलिया में अपनी MBA की पढ़ाई कर रही थीं तब घर से दूर नए माहौल में एडजस्ट होना उनके लिए मुश्किल होने लगा। उनका अकेलापन उनको खाने लगा जिसकी वजह से वह डिप्रेशन की शिकार होने लगीं। शिप्रा बताती हैं कि -"सौभाग्य से मेरे एक प्रोफ़ेसर ने मेरी इस हालत को समझा और मुझे कॉउंसलिंग लेने की सलाह दी। जिस पर मैंने जवाब दिया - "मैं समझदार हूँ। प्रोफेसर का जवाब था-" हाँ, केवल समझदार लोग ही इस बात को समझते हैं कि उनको कोई प्रॉब्लम है जिसको ठीक करना जरूरी है।" प्रोफ़ेसर के इस जवाब से शिप्रा को हिम्मत मिली और वह कॉलिज के काउन्सलर के पास गयीं। वहाँ पहुँचकर शिप्रा चौंक गयीं - "वह सीन एकदम हॉस्पिटल की OPD की तरह था जहाँ पहले से 60 लोग लाइन में लगकर अपनी बारी का इन्तजार कर रहे थे। लगभग 3 से 4 सेशन के बाद मैं बेहतर महसूस करने लगी। मैंने इंडिया वापिस आने की बात अपने मन से निकाल दी। इसके बाद मैंने न केवल ऑस्ट्रेलिया में रहने का निश्चय किया बल्कि अपनी यूनिवर्सिटी में टॉप भी किया।" वह आगे कहती हैं कि- "उस समय मिली मदद की वजह से मैं अपना मनचाहा करियर बना सकी।"    

mental health support

जो मुझे मिला वही आगे देना है

शिप्रा कहती हैं कि-" मैं हमेशा एक एंटरप्रेन्योर(उद्यमी) बनना चाहती थी और अब मैं वो बन चुकी इसलिए मुझे लगता है कि मुझे भी आगे लोगों को वही देना चाहिए जो कभी मुझे चाहिए था।" शिप्रा ने इन शब्दों में स्पष्ट किया कि एक हताश इंसान को भी मेन्टल सपोर्ट की जरूरत होती है। 

यह सर्विस आज की जरूरत है- शिप्रा ने बताया कि -"जब मैं इंडिया आयीं तो मुझे अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और सहकर्मियों के बीच ऐसे लोग दिखे जो मानसिक तनाव में थे। इसलिए मुझे लगा कि मुझे मेन्टल हेल्थ सर्विस पर काम करना चाहिए। हमारे समाज में शारारिक बीमारी को मानसिक समस्या से अधिक तवज्जो दी जाती है। जबकि दोनों को बराबर अहमियत देने की जरूरत है।" शिप्रा बताती हैं कि- "इस तरह की सर्विस के लिए मुझे डिजिटल प्लेटफॉर्म ज्यादा इफेक्टिव लगा क्योंकि -इसके जरिये एक व्यक्ति अपने कम्फर्ट जोन में रहकर अपनी प्रॉब्लम शेयर कर पाता है। दूसरा, ज्यादातर मनोवैज्ञानिक शहरों में रहते हैं और किसी छोटी जगह या गांव में रह रहे लोगों के लिए हर बार दूर जाकर सेशन लेना मुश्किल होता। तो डिजिटल मेन्टल सपोर्ट इस डिस्टेंस को भी काम कर देता है।"

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क्या है epsyclinic?

epsyclinic एक कंपनी है, जिसके दो ब्रांड हैं- I will और I will Care  

शिप्रा ने बताया कि I Will थेरेपी उनके लिए है जो फीस दे सकते हैं। यह एक प्रीमियम थेरेपी है जिसमें हम पीड़ित को एक ख़ास पैटर्न के अनुसार हेल्प करते हैं। 

वहीं दूसरी तरफ I Will Care में हम सरकारी या अन्य संस्थानों के साथ जुड़कर काम करते हैं। जिसमे बड़े-बड़े ग्रुप को एक साथ हेल्थ सर्विस दी जाती है। 

  • -यह सर्विस असेसमेंट से शुरू होती है। यह असेसमेंट वैश्विक मापदंडों के अनुसार बना होता है। 
  • -व्यक्ति विशेष के लिए अलग प्रकार की रूपरेखा बनाई जाती है। 
  • -थेरेपी के लिए हम ‘कम्प्यूटराइज़्ड बिहेवरल थेरेपी प्रोग्राम’ का इस्तेमाल करते हैं। 
  • -इसके अलावा हम 24/7 सर्विस देते हैं ताकि कोई भी व्यक्ति किसी भी समय हमसे जुड़ सके।

कोविड और प्री-कोविड मेन्टल हेल्थ - शिप्रा ने बताया कि- 2020 कोरोना के आने के बाद बहुत सारे कॉपरेटिव ऑफिस और संस्थानों ने मेन्टल हेल्थ सर्विस से जुड़ना शुरू किया है। कोविड से पहले लोगों के व्यक्तिगत संघर्ष और समस्याएं होती थीं जबकि कोविड के समय में मेन्टल स्ट्रेस और डिप्रेशन एक ग्रुप प्रॉब्लम बन गए। शिप्रा Onlymyhealth के जरिए सन्देश देती हैं कि- ‘It’s OK Not To Be OK’ मतलब अगर 'आप ठीक नहीं है तो भी ठीक हैं। इस विचार को मन से निकाल दीजिए कि कोई क्या कहेगा? या क्या सोचेगा ? आप ठीक नहीं यह कहने में हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। जिस तरह शारारिक रोग या समस्या होने पर हम किसी को दोष नहीं दे सकते वही बात मानसिक समस्या होने पर भी लागू होती है। किसी व्यक्ति के मानसिक तनाव या स्ट्रेस को लेकर अपने फैसले और राय देने की बजाय उसको सपोर्ट कीजिए। जैसे शारारिक रूप से बीमार होने पर किसी इंसान की देखरेख होती है, ठीक उसी तरह की केयर और देखभाल मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति की भी होनी चाहिए। किसी व्यक्ति को गलत बात कहकर हतोत्साहित न करें, जितना अधिक हो सके परिवार और समाज को ऐसे इंसान का साथ देना चाहिए।" 

हम Onlymyhealth के जरिए शिप्रा डावर का आह्वान करते हैं, जिन्होंने मेन्टल हेल्थ सर्विस के द्वारा कई लोगों को उस समय सहारा दिया जब उनके अपने इस समस्या को नहीं समझ पा रहे थे। अगर आप भी शिप्रा डावर की कहानी से प्रभावित हुए हैं तो उनको वोट करके उनका मनोबल अवश्य बढ़ाएं। वोट करने या अवॉर्ड सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

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