इस तरह से सांस लें तो आपके अंदर पैदा हो सकती है 'असीमित ऊर्जा', तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं ने खोजी थी ये तकनीक

टूमो ब्रिदिंग करने से मन शांत होता है। साथ ही शरीर को भीतर से ऊर्जा मिलती है। यह सकारात्मक होती है। जिसेस मानसिक अवस्था स्थिर होती है।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiUpdated at: Aug 11, 2021 11:27 IST
इस तरह से सांस लें तो आपके अंदर पैदा हो सकती है 'असीमित ऊर्जा', तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं ने खोजी थी ये तकनीक

तन और मन को सेहतमंद रखने के लिए आजकल बहुत सारे प्राणायम हैं, उन्हीं में से एक टूमो ब्रीदिंग एक्सरसाइज है। इस प्राणायाम का अभ्यास बौद्ध भिक्षुओं को द्वारा शुरू किया गया था। योग शिक्षक दिव्यांश शर्मा का कहना है कि कई शोध और अध्ययनों में पाया गया है कि किसी भी तरह के प्राणायाम (Breathing Exercises) हमाारे शरीर के पैरा सिंपथैटिक सिस्टम को बढ़ाने में मदद करती हैं। पैरा-सिंपथैटिक नर्वस सिस्टम का काम होता है शरीर के अंदर पाचन क्रिया को बढ़ाना, दिल की गति को आरामदायक स्थिति में लाना, फेफड़ों को आरामदायक स्थिति में लाना, सांसों की गति को सामान्य स्थिति में लाना और पूरे शरीर को सामान्य स्थिति में लाना। जिसके फलस्वरूप मानसकि तनाव, अवसाद, चिंता में गिरावट आती है और शरीर एक आरामदायक स्थिति में आ जाता है। इसी तरह टूमो ब्रिदिंग (tummo breathing) एक्सरसाइज है भी ध्यान अवस्था को बढ़ाती है।

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योग शिक्षक दिव्यांश शर्मा का कहना है कि  अंग्रेजी में पैरा सिंपथैटिक नर्वस सिस्टम के लिए वाक्य प्रयोग में लाया जाता है रेस्ट ऐंड डाइजेस्ट (Rest And Digest)। इससे हम समझ सकते हैं कि डॉक्टर्स द्वारा क्यों तनाव आने पर लंबी गहरी सांसें लेने को बोला जाता है। क्योंकि कोई भी प्राणायम या सांसों की क्रिया हमारे शरीर के रेस्ट ऐंड डाइजेस्ट के मंत्र को सक्रिय करती है।

क्या है टूमो ब्रिदिंग

टूमो ब्रिदिंग का अभ्यास तिब्बती बोद्ध भिक्षुओं द्वारा शुरू किया गया था। सांसों की यह एक्सरसाइज शरीर के भीतर की ऊर्जा को जगाती है। हमारे चक्र को एक्टिवेट करती है। साथ ही शरीर में ऊर्जा का विकास करती है। इसे चंडाली योग भी कहा जाता है। इस टेक्निक से अंदर की आग को महसूस किया जा सकता है। योग शिक्षक दिव्यांश शर्मा का कहना है कि टूमो ब्रिदिंग में आध्यात्मिक रूप से भी मन को जोड़ना पड़ता है। ये एक ऐसी टेक्नीक है जो मानसकि तनाव को दूर करती है। ये टेक्नीक भी पैरा सिंपथैटिक सिस्टम और सिपथैटिक नर्वस सिस्टम को संतुलित करती है। जिसकी वजह से मानसिक शांति मिलती है। इस टेक्नी का प्रयोग शरीर में ऊर्जा लाने के लिए किया जाता है। 

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टूमो ब्रिदिंग के फायदे

  • टूमो ब्रिदिंग से चक्र सक्रिय होते हैं। इन चक्रों की मदद से सेहत ठीक रहती है। 
  • इस ब्रिदिंग एक्सरसाइज को करने से इनर ट्रांसफॉर्मेशन होता है। इससे आप में क्रिएटिविटी, आत्मविश्वास आदि जागता है। 
  • यह ब्रिदिंग एक्सरसाइज ध्यान को बढ़ाता है और मानसिक शांति मिलती है।
  • टूमो ब्रिदिंग करने से तनाव भी दूर होता है।

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टूमो ब्रिदिंग कैसे करें

  • किसी एक जगह पर बैठ जाएं। अब पूरे अभ्यास के दौरान कमर, गर्दन सीधी रखते हुए हाथ को पेट पर रखें। इसके बाद अपने मन को शांत करने की कोशिश करें। सोच-विचारों को दूर करने की कोशिश करें।
  • आंखें बंद रखते हुए नाभि में किसी ज्वाला को महसूस करें। अपने आप को इस तरह से महसूस करें कि आप बड़े खाली गुब्बारे हो जिसके अंदर एक ज्वाला रखी हुई है। इस एहसास को पूरे अभ्यास के दौरान बनाएं रखें। 
  • नाक से एक लंबी गहरी सांस अंदर लेनी है और अपने चेस्ट को बाहर निकालते हुए पीठ को एक धनुषाकार (Arch) देना है। महसूस करना है कि आपके शरीर में जो ऑक्सीजन प्रवाह कर रहा है वह अग्नि को और ज्वाला दे रहा है। जोकि आपके पूरे शरीर में फैल रही है। 
  • अपने मुंह की आकृति एक सीटी जैसी बना लें। अब फूंक मारते हुए सांस को बाहर छोड़ें। इस दौरान अपने पीठ को पीछे की ओर निकालते हुए शरीर को आगे की ओर थोड़ा सा झुकाएं। अभी भी यह महसूस करना है कि गर्माहट और वो अग्नि आपके पूरे शरीर में फैल रही है। इसको पांच सांसों तक अभ्यास करें। और आप महसूस करेंगे कि शरीर में एक गर्माहट आनी शुरू हो गई है। 
  • इसके बाद अंदर भरी हुई सांस को अपने नाभि के पास में सांस को रोकें। तथा अपने पेल्विक फ्लोर मसल को सुकोड़ें (उड्यानबंद और मूलबंद की तरह)। जितनी देर सांसों को रोक सकते हैं, उसे रोकें और उसके बाद सांस तको बाहर छोड़ दें। 
  • अपने पेट और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशी को ढीला छोड़ा दें। इस अभ्यास कुछ बार दोहराएं। आपको शरीर में गर्माहट महसूस होगी और आपका मस्तिष्क सुचारू रूप से काम करेगा।

सावधानियां

प्रेग्नेंट महिलाएं, हाई बीप, हृदय रोगी आदि इस ब्रिदिंग टेक्नीक को न करें। या फिर डॉक्टर की सलाह से करें।   

टूमो ब्रिदिंग करने से मन शांत होता है। साथ ही शरीर को भीतर से ऊर्जा मिलती है। यह सकारात्मक होती है। जिसेस मानसिक अवस्था स्थिर होती है।

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